क्या होता है Ultra-Processed Food, जिसे रोज खाने से आप बना सकते हैं Diabetes और Heart के मरीज

punjabkesari.in Thursday, Sep 24, 2026 - 10:35 AM (IST)

नारी डेस्क:  एक स्टडी के मुताबिक, रोज़ाना अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड की 100 ग्राम अतिरिक्त मात्रा लेने से दिल से जुड़ी बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स) का खतरा 14% बढ़ सकता है। फ़ैमिली मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ जर्नल में छपी स्टडी के नतीजों से पता चला है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड से मिलने वाली एनर्जी में हर 10% की बढ़ोतरी मेटाबोलिक सिंड्रोम या डायबिटीज के 16% ज़्यादा खतरे से जुड़ी थी।
 

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 88 लाख लोगो का किया गया विश्लेषण 

कई रिसर्चर ने अमेरिका, यूरोप, एशिया और ओशिनिया की 51 स्टडीज़ के डेटा का विश्लेषण किया। इन स्टडीज़ में 88 लाख से ज़्यादा लोग शामिल थे - जिनकी औसत उम्र 23-77 साल थी - और उन्हें 2 से 32 साल तक फ़ॉलो-अप किया गया। बहुत ज़्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड खाने का संबंध दिल की बीमारियों (24%), कैंसर (12%) और मोटापे या ज़्यादा वज़न (23%) के ज़्यादा खतरे से पाया गया। ज़्यादा एनर्जी, चीनी और नमक वाले इन प्रोडक्ट्स के सेवन का संबंध मेटाबोलिक सिंड्रोम या डायबिटीज़ (24%), डिप्रेशन और एंग्जायटी (27%), पाचन संबंधी बीमारियों (31%), हाई ब्लड प्रेशर (11%) और किसी भी वजह से मौत (18%) के ज़्यादा खतरे से भी था।


 हाई ब्लड प्रेशर का भी ज्यादा खतरा

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड ऐसे प्रोडक्ट्स होते हैं जिन्हें सीधे खाया जा सकता है या गर्म करके परोसा जा सकता है और जिनकी बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग की गई होती है। इनमें डाइटरी फ़ाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल कम होते हैं। लेखकों ने लिखा- "डोज़-रिस्पॉन्स एनालिसिस से पता चला कि हर 100 ग्राम (रोज़ाना) अतिरिक्त सेवन का संबंध हाई ब्लड प्रेशर के 11% ज़्यादा खतरे, दिल की बीमारियों के 14% ज़्यादा खतरे, कैंसर के 4% ज़्यादा खतरे और किसी भी वजह से मौत के 3% ज़्यादा खतरे से था। एनर्जी इनटेक में हर 10% की बढ़ोतरी का संबंध मेटाबोलिक सिंड्रोम (MetS) या डायबिटीज़ के 16% ज़्यादा खतरे से था।" उन्होंने कहा कि नए सबूतों से पता चलता है कि कई एडिटिव्स का मिश्रण इंसानी सेहत पर 'कॉकटेल जैसा असर' डाल सकता है।
 

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 गट माइक्रोबायोम पर भी पड़ता है बुरा असर

 लैब स्टडीज़ से पता चला है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड्स की बनावट में बड़े बदलाव से गट माइक्रोबायोम पर बुरा असर पड़ सकता है, और इससे सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फ़ूड प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाले कई कंपाउंड्स - जैसे कि एक्रिलामाइड (जो हीट-ट्रीटेड प्रोसेस्ड फ़ूड्स में बनने वाला एक हानिकारक पदार्थ है) और एक्रोलीन (जो फैट को गर्म करने पर बनता है) - का संबंध दिल की बीमारियों के ज़्यादा मामलों से पाया गया है। चूंकि UPF से जुड़ी पुरानी बीमारियां अक्सर एक साथ कई बीमारियों (मल्टीमॉर्बिडिटी) के रूप में सामने आती हैं, इसलिए UPF (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड्स) का सेवन कम करना और उनकी जगह कम प्रोसेस किए गए विकल्पों को अपनाना पुरानी बीमारियों की रोकथाम और प्राइमरी केयर मैनेजमेंट के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है।


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vasudha

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