कैन में सिर्फ कोल्ड ड्रिंक्स ही नहीं अब Mineral water भी मिलेगा

6/25/2020 4:52:35 PM

प्लास्टिक के प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है। मगर, ऐसी सी चीजें है जो अभी भी प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाती है। यहां तक कि मिनरल वाटर भी प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाता है। लोगों को लगता है कि इन प्लास्टिक की बातलों में मिलने वाला पानी सुरक्षित है जबकि ऐसा नहीं है। रिसर्च में यह बात साफ हो गई है कि प्लास्टिक का यूज सेहत के लिहाज से सही नहीं है, फिर चाहे आप उसमें पानी ही क्यों ना पी रहे हो।

एल्युमिनियम कैन में मिलेगा मिनरल वाटर

मगर, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए अब एक कंपनी पानी के लिए कैन का निर्माण करने जा रही है। जी हां, अब सिर्फ कोल्ड ड्रिंक्स ही नहीं बल्कि मिनरल वाटर भी एल्युमिनियम के कैन में मिलेगा। अगर नई पैकेजिंग सफल रहती है, तो यह किसी भी कंपनी द्वारा प्लास्टिक खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम माना जाएगा। अगर  यह कदम सफल हो जाता है तो इससे 8,000 मेट्रिक टन से अधिक का प्लास्टिक कच्चा खत्म हो जाएगा।

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क्यों हानिकारक है प्लास्टिक की बोतलों?

दरअसल, प्लास्टिक बोतलों में रखी हुई चीजों में हवा नहीं पहुंचती, जिसकी वजह से इसके अंदर रखा सामान जल्दी खराब हो जाता है और इनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यही बैक्टीरिया आपके पेट में जाकर आपको बीमार बना सकते हैं। सिर्फ खाने पीने वाली चीजें ही नहीं बल्कि पानी भी प्लास्टिक की बोतलों में सुरक्षित नहीं है। कंपनी का दावा है कि कैन में मिलने वाला पानी 7.4 ph लेवल के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होगा।

इसलिए ज्यादा फायदेमंद होता है कैन

प्लास्टिक की बोतलों के मुकाबलें एल्युमिनियम कैन ज्यादा सुरक्षित होते हैं। एल्युमिनियम कैन में दोबारा यूज करने वाली 70% सामग्री भी अधिक होती है। साथ ही उपभोक्ता इन्हें रिसाइकल भी कर सकते है। इसके साथ ही इनके समुद्र में तैरने की संभावना भी कम है।

कैन में हिमायल वॉटर होगा पैक

कंपनी का कहना है कि एल्युमिनियम के डिब्बे में पैक किया पानी जमीन से पंप नहीं किया गया है बल्कि सीधे हिमालय से आएगा, जोकि पूरी तरह प्राकृतिक होगा। हालांकि इसकी कीमत नॉर्मल मिनिरल वॉटर के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होगी। नॉर्मल वॉटर बोतल की तुलना में इसकी 500 मि.ली. कैन की कीमत 60रुपए होगी, जिसे आप वेबसाइट से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। यह दिल्ली और मुंबई के स्टोरों में भी उपलब्ध है।

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वर्तमान में, भारत में प्लास्टिक कचरे का उत्पादन लगभग सालाना 9.46 मिलियन टन है, जिसमें से 40% रिसाइकल ही नहीं हो पाता। इस बात को ध्यान में रखते हुए एल्युमिनियम कैन में वॉटर पैकेजिंग का प्राकृतिक विकल्प चुना गया। कंपनी के कार्यक्रता इसके जरिए 'Responsible Whatr' ब्रांड को भी विकसित करना चाहते हैं।


Anjali Rajput

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