पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है मोटापा, देश की 31% नारी है Overweight
punjabkesari.in Thursday, Jun 04, 2026 - 09:17 AM (IST)
नारी डेस्क: पिछले कुछ सालों से भारत कुपोषण और अतिपोषण, दोनों समस्याओं से जूझ रहा है। एक दशक से भी कम समय में, वयस्कों में मोटापा तेज़ी से बढ़ा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) से पता चलता है कि ज़्यादा वज़न वाली महिलाओं का हिस्सा 2015-16 में 21 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में लगभग 31 प्रतिशत हो गया है वहीं पुरुष फिटनेस को लेकर ज्यादा सजग होने लगे हैं जिसके चलते कम वजन के पुरुषों का प्रतिशत बढ़ रहा है। शहरी भारत में मोटापे का खतरा ग्रामीण भारत की तुलना में काफी ज़्यादा है।

शहरी महिलाओं तेजी से हो रही है मोटी
आंकड़ों के अनुसार, देश में 15-49 आयु वर्ग की 30.7 फीसदी महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की जद में हैं। यानी उनका बीएमआई 25 से अधिक है। यह सर्वे 2023-24 का है। इससे पहला सर्वेक्षण एनएचएफएस-5, 2019-21 के दौरान हुआ था, तब यह 24% था। NFHS-6 से पता चलता है कि शहरी इलाकों की महिलाओं में से 42.8 प्रतिशत का वज़न ज़्यादा है जो ग्रामीण महिलाओं के 25.5 प्रतिशत के आंकड़े से कहीं ज़्यादा है। तीन वर्षों के अंतराल में मोटापे की शिकार महिलाओं में 6.7% की वृद्धि हुई है। 15-49 आयु वर्ग की महिलाएं मोटापे का ज्यादा शिकर हाे रही है।
मोटापा बढ़ने की वजह
शहरी-ग्रामीण अंतर से पता चलता है कि भारत में मोटापे का कारण तेज़ी से जीवनशैली और पर्यावरण बन रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा 2021 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि शहरी इलाकों में खान-पान के तरीके और सुस्त जीवनशैली के कारण वहां की आबादी में मोटापे का खतरा ज़्यादा होता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में भी मोटापे को भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया है, जिसका मुख्य कारण अस्वस्थ खान-पान, सुस्त जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड (अत्यधिक प्रसंस्कृत) खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन है। पिछले एक दशक में भारत का पैकेटबंद भोजन और फ़ास्ट-फ़ूड बाज़ार तेज़ी से बढ़ा है, खासकर उन शहरों में जहाँ रोज़मर्रा के खान-पान में 'रेडी-टू-ईट' (तुरंत खाने लायक) भोजन, मीठे पेय और प्रोसेस्ड स्नैक्स ज़्यादा आम हो गए हैं।

कम वजन वाले पुरुषों की संख्या तेजी से बढ़ी
कम वजन वाले यानी अंडरवेट पुरुषों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे पुरुष जिनका बीएमआई 18.5 से कम है, उनका प्रतिशत 19.7 है जबकि ऐसी महिलाएं 18.7 फीसदी हैं। तीन वर्षों में अंडरवेट पुरुषों की संख्या 3.5 फीसदी बढ़ी है, जबकि ऐसी महिलाओं की संख्या में महज एक फीसदी बढ़ी। फिटनेस के जानकारों की मानें तो इसके पीछे पुरुषों में फिटनेस को लेकर जागरुकता होना बड़ा कारण हो सकता है। फिटनेस के लिए समय निकाल पा रहे हैं, खानपान शैली भी बदल रहे ह पर जरूरत से कम वजन होना भी सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं है। फिर भी मोटापे से यह बेहतर मानी जाती है। जबकि महिलाएं व्यस्तता में फिटनेस के लिए समय नहीं दे पा रही है।

