लखनऊ अग्निकांड: लपटों ने जिंदगियाें के साथ सपने भी किए राख, एक झटके में बर्बाद हो गए 15 परिवार
punjabkesari.in Tuesday, Jun 23, 2026 - 11:57 AM (IST)
नारी डेस्क: लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि उनके साथ जुड़े अनगिनत सपनों, उम्मीदों को भी हमेशा के लिए राख कर दिया। कोई अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, कोई बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देख रहा था, कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, तो कोई छुट्टियां बिताने की तैयारी में जुटा था। लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनके जीवन के साथ-साथ उनके सपनों को भी निगल लिया।

परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे अब्दुल
अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर लगी आग में 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है और पीछे छूट गए हैं बूढ़े माता-पिता, भाई-बहन और वे अधूरे सपने, जो अब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे। मृतकों में 22 वर्षीय आईटी तकनीशियन अब्दुल रहमान भी शामिल हैं। वह पिछले एक वर्ष से 'एरिया स्टूडियो' में कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता अफजल कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। रहमान की मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
बाहर जाने का सपना देख रहा था शहजान
इस भीषण अग्निकांड में मोहम्मद इमरान के इकलौते बेटे शाहजान (18) की भी मौत हो गई। जानकीपुरम निवासी शाहजान एक छोटे कारोबारी परिवार से थे और पिछले कुछ समय से कंप्यूटर प्रशिक्षण ले रहे थे। परिजनों के अनुसार, वह बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाने की योजना बना रहे थे। सुखमनी सिंह (22) भी इस हादसे का शिकार हो गईं। उनके परिवार में पिता प्रभजोत सिंह, मां और एक छोटा भाई हैं।

प्रभजोत सिंह ने मरने से पहले दोस्त को किया था फोन
प्रभजोत सिंह सिविल डिफेंस में कार्यरत हैं। दुर्घटना में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव के परिवार के लिए यह सदमा बेहद गहरा है। पेशे से थ्री-डी कलाकार आदित्य ने आग लगने के बाद अपने एक मित्र को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन बचाया नहीं जा सका। आदित्य ने हाल में अपनी बचत से नया कंप्यूटर खरीदा था और उत्तराखंड में छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे थे। थ्री-डी डिजाइनिंग के क्षेत्र में आने से पहले उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग में भी काम किया था। परिजनों के अनुसार, वह अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर था और करियर के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। परिवार में उनके वकील पिता, मां और एक छोटा भाई हैं।
मोहम्मद अम्मार की शादी की चल रही थी बात
मोहम्मद अम्मार (24) भी इस हादसे में मारे गए। बाराबंकी निवासी अम्मार अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत ने परिवार के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। रिश्तेदारों के अनुसार, परिवार ने हाल में उनकी शादी की तैयारियों पर चर्चा शुरू की थी, लेकिन इस हादसे ने सारी योजनाओं पर विराम लगा दिया। परिजनों का कहना है कि अम्मार एक जिम्मेदार बेटे थे और अपने माता-पिता को बेहतर जीवन देना चाहते थे। अग्निकांड में अपनों को खो चुके परिजनों के लिए ट्रॉमा सेंटर और पोस्टमार्टम हाउस में बिताया गया हर पल असहनीय था। कई लोगों को अंतिम क्षण तक उम्मीद थी कि उनका बेटा, बेटी या रिश्तेदार जीवित होगा और किसी अस्पताल में उसका इलाज हो रहा होगा।
अस्पतालों में अपनों की तलाश करते दिखे परिजन
अधिकांश परिजन घंटों तक अस्पतालों में तलाश करने के बाद ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। केजीएमयू में परिजनों की सहायता के लिए तैनात एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कहा- ''हमारे लिए यह बताना बेहद कठिन था कि उनका परिजन यहां भर्ती नहीं है और उन्हें पहचान के लिए पोस्टमार्टम हाउस जाना होगा।'' इसके बाद परिजनों को एक और पीड़ा से गुजरना पड़ा जब ट्रॉमा सेंटर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित मुर्दाघर में उन्हें शव दिखाए गए और पहचान करने के लिए कहा गया। पोस्टमार्टम से पहले केवल निकट संबंधियों को ही औपचारिक पहचान की अनुमति दी गई।

