अभिजीत दीपके के माता-पिता ने अपने बेटे से की वापस आने की अपील,  डर में जी रहा था परिवार

punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 07:23 PM (IST)

नारी डेस्क: कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में असाधारण अभियान के परिणामस्वरूप केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को उनके माता-पिता की महीनों पुरानी चिंता राहत और खुशी में बदल गई। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने अपने आंसू रोकते हुए कहा- ''मैं उससे जल्दी घर आने को कहूंगी। अगर वह नहीं आया, तो हम जाकर उसे वापस लाएंगे। मैं उसे कसकर गले लगाऊंगी और उसकी आरती उतारूंगी। पिछली बार जब वह यहां आया था, तो उसने यह कहते हुए मुझे आरती उतारने से रोक दिया था कि वह कोई खास व्यक्ति नहीं है।'' 

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अभिजीत की मां हुई भावुक

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर शहर में अपने घर पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा- ''मैं बेहद खुश हूं। उसकी ईमानदारी की जीत हुई है। युवाओं के समर्थन ने उसकी मदद की और उसने एक बड़ी जीत हासिल की।'' दीपके के भारत लौटकर आंदोलन शुरू करने के समय से उनकी मां चिंतित थीं। अनीता ने कहा कि नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉजपा का आंदोलन शुरू होने के बाद वह सो भी नहीं पाती थीं। उन्होंने कहा- ''मैं हर समय चिंतित रहती थी। मेरी रातें बिना सोए बीतती थीं। हर सुबह, मैं अपना फोन देखने से भी डरती थी कि कहीं कोई परेशान करने वाला वीडियो न देख लूं। मैं तुरंत उसके दोस्तों को फोन करके पूछती थी कि वह सुरक्षित है या नहीं।'' 
 

डर में जी रहा था परिवार 

दीपके के दोस्तों ने अनीता को आश्वस्त किया और बताया कि जब भी उसे पता चलता था कि उसकी मां चिंतित हैं, तो वह भावुक हो जाता था। आंदोलन के पहले दिन को याद करते हुए अनीता ने कहा कि वह चिंता और पीड़ा की वजह से रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा- ''आज मेरी आंखों में जो आंसू हैं, वे खुशी के हैं।'' प्रधान के इस्तीफे को ''युवाओं की जीत'' बताते हुए अनीता ने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए हजारों युवाओं ने अथक परिश्रम किया। दीपके के पिता भगवानराव दीपके ने कहा कि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के उनके बेटे द्वारा कॉजपा की स्थापना किए जाने के बाद से परिवार लगातार डर के साए में जी रहा था। भगवानराव ने बताया कि उन्होंने गिरफ्तारी के डर से जून में दीपके से अनुरोध किया था कि वह अमेरिका से भारत न लौटे। उन्होंने कहा- ''हम इतने डरे हुए थे कि शुरुआती दिनों में हम घर छोड़कर कोंकण में रहने चले गए थे। हम पर जबरदस्त दबाव था। हमें शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियां मिल रही थीं।'' 

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अभिजीत के पिता ने की शिक्षा मंत्री की तारीफ

आंदोलन के दौरान दीपके पर दो बार हमला हुआ। बीस जुलाई को एक पुलिस अधिकारी द्वारा दीपके को खींचे जाने की घटना याद करते हुए उन्होंने कहा- ''मुझे लगा कि अगर मेरा दीपके पुलिस के हत्थे चढ़ गया, तो वह नहीं बचेगा। ईश्वर की कृपा से वह सुरक्षित है। मुझे लगता है कि अब उसे घर आ जाना चाहिए और हमारे साथ रहना चाहिए।'' प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए भगवानराव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने पद छोड़ते हुए छात्रों से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहकर ''बड़ा दिल'' दिखाया है। उन्होंने कहा, ''इसे किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इतने बड़े पद को छोड़ने के लिए बड़े दिल की जरूरत होती है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने छात्रों के हितों के बारे में सोचा।'' भगवानराव ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि दीपके का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। उन्होंने कहा- ''दीपके ने पहले (आम आदमी पार्टी के नेता) अरविंद केजरीवाल के साथ काम किया था और राजनीति को करीब से देखा है। मुझे व्यक्तिगत रूप से राजनीति पसंद नहीं है, इसलिए मुझे नहीं पता कि वह आगे क्या करेगा। लेकिन मैं उसके साथ रहूंगा।''
 


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vasudha

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