Earwax का सेहत से गहरा कनैक्शन, संकेत जिसे ना करें इग्नोर

2021-06-15T10:06:51.737

इयरवैक्स यानि कान में जमा मोमी पदार्थ, जिसे सेरुमेन भी कहा जाता है। यह गंदा और चिपचिपा कान का मैल, शरीर में एक सुरक्षात्मक रूप में कार्य करता है। यह बाहरी गंदगी, मृत त्वचा और हानिकारक कण को शरीर में जाने से रोकता है। हालांकि हर व्यक्ति के काम में ईयरवैक्स अलग-अलग रंग का होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका रंग आपके शरीर का हाल ब्यां करते हैं। अगर ईयरवैक्स का रंग बदल रहा है तो उसे इग्नोर ना करें क्योंकि यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। चलिए जानते हैं क्या कहता है आपके ईयरवैक्स का बदला हुआ रंग...

पीला, नम और चिपचिपा वैक्स

अक्सर बच्चे पीले और अधिक तरल इयरवैक्स का उत्पादन करते हैं। हालांकि कानों में पीला, नम और चिपचिपा वैक्स हो तो घबराने की कोई जरूरत नहीं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं,मोम का रंग गहरा होता जाता है।

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डार्क एंड गूई (Dark And Gooey)

अगर आपका पसीना बदबूदार है तो कानों में गहरे रंग, नम और चिपचिपा ईयरवैक्स जमा हो सकता है। इसके अलावा ऐसी वैक्स शारीरिक और मानसिक तनाव का संकेत भी हो सकता है। दरअसल, शरीर में एपोक्राइन ग्रंथियां तनाव के कारण ऐसे ईयरवैक्स का उत्पादन करती हैं।

सफेद (सूखा और पपड़ीदार)

सफेद रंग और बनावट में सख्त और शुष्क ईयरवैक्स सोरायसिस के कारण बन सकती है। ऐसे में चिकित्सीय सहायता लेने में संकोच न करें।

गहरा भूरा या काला

बहुत गहरा या काला ईयरवैक्स निकल रहा है तो उसे इग्नोर ना करें और तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। चूंकि यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

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लाल रक्त या थक्केदार रक्त वाला ईयरवैक्स

कान की सफाई करते समय खून के निशान दिखें तो ऐसा कान की झिल्ली के फटने के कारण हो सकता है, जिसे आमतौर पर ईयरड्रम के रूप में जाना जाता है। साथ ही कान की बाहरी त्वचा से खून बहने की भी संभावना हो सकती है। ऐसे में आपको जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

पानीदार या बहने वाला ईयरवैक्स

अगर ईयरवैक्स बह रहा है तो यह कान में बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण के कारण हो सकता है। ऐसे में घबराने की बजाए किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।

कान से पानी निकलना

कान से पानी जैसा लिक्विड या खून निकलता है तो इसे भी इग्नोर बिल्कुल न करें। चूंकि यह कान के कैंसर की तरफ इशारा हो सकता है।

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वैक्स का नुकसान

कान में वैक्स जमा होने को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इससे  सुनने में परेशानी, झनझनाहट की आवाज आना, दर्द और चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या करें क्या नहीं?

1. कान की वैक्स हार्ड होती है इसलिए इसे दवाई से डिजोल्व करके निकालें। वैक्स अगर ज्यादा बनती है तो 3 महीने में एक बार सफाई करवाएं।
2. कानों में तेल डालने से बचें क्योंकि इससे इंफेक्शन हो सकता है।
3. सफाई के लिए ईयर बड का यूज भी ना करें क्योंकि इससे वैक्स अंदर चली जाती है।
4. सड़क किनारे बैठे कान साफ करने वालों से सफाई ना करवाएं क्योंकि उनके उपकरण अच्छी तरह साफ नहीं होते, जिससे इंफेक्शन हो सकता है।

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Content Writer

Anjali Rajput

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