Brain Clotting मामले में भारतीय अक्सर कर देते हैं ये बड़ी गलती, यहीं होती जानलेवा
punjabkesari.in Saturday, Jul 04, 2026 - 08:51 PM (IST)
नारी डेस्कः ब्रेन शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। दिमाग में कोई दिक्कत हो तो पूरी बॉडी रूक जाती है। इस समय ब्रेन क्लोटिंग के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ब्रेन में ब्लड क्लॉट (Blood Clot) एक मेडिकल इमरजेंसी है। यह तब होता है जब मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में खून का थक्का बन जाता है या किसी धमनी में रुकावट आ जाती है, जिससे मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्ट्रोक, स्थायी विकलांगता या जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है। ऐसे में इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
ब्रेन में ब्लड क्लॉट क्या होता है?
ब्रेन में ब्लड क्लॉट का मतलब है कि मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में खून का थक्का बन जाना, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
ब्रेन में ब्लड क्लॉट होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
1. अचानक तेज सिरदर्द
यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द हो, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।
2. शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन
चेहरे, हाथ या पैर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना स्ट्रोक का प्रमुख लक्षण है।
3. बोलने या समझने में परेशानी
अचानक बोलने में लड़खड़ाहट, शब्द स्पष्ट न निकलना या दूसरों की बात समझने में कठिनाई होना।
4. देखने में दिक्कत
एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखना, दो-दो चीजें दिखना या अचानक दृष्टि कम हो जाना।
5. संतुलन बिगड़ना
चलने में कठिनाई, चक्कर आना या शरीर का संतुलन खो देना।
6. चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होना
मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा नीचे की ओर झुक जाना स्ट्रोक का महत्वपूर्ण संकेत है।
7. भ्रम या बेहोशी
अचानक भ्रम की स्थिति, प्रतिक्रिया कम होना या बेहोश हो जाना।
8. दौरे (Seizures)
कुछ मामलों में ब्रेन क्लॉट के कारण दौरे भी पड़ सकते हैं, खासकर यदि क्लॉट मस्तिष्क के संवेदनशील हिस्से को प्रभावित करे।

भारतीय लोग अक्सर कौन-सी बड़ी गलती करते हैं?
1. लक्षणों को नजरअंदाज करना: अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या तेज सिरदर्द होने पर भी कई लोग इसे मामूली समस्या समझकर इंतजार करते रहते हैं।
2. घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना: कुछ लोग पहले घरेलू उपाय, तेल की मालिश या आराम करने की सलाह मान लेते हैं, जबकि ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी होता है।
3. डॉक्टर के बजाय खुद दवा लेना: बिना जांच के दर्द की दवा या अन्य दवाएं लेना खतरनाक हो सकता है। हर स्ट्रोक का इलाज एक जैसा नहीं होता। खासकर ब्लड थिनर जैसी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।
4. अस्पताल पहुंचने में देरी करना: कई परिवार पहले लक्षण ठीक होने का इंतजार करते हैं या पास के क्लिनिक में समय गंवा देते हैं। जबकि स्ट्रोक के इलाज में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
5. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नजरअंदाज करना: भारत में कई लोग नियमित जांच नहीं कराते या दवाएं बीच में छोड़ देते हैं, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। हाथ उठाने में कमजोरी है?
किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?
हाई ब्लड प्रेशर
डायबिटीज
हाई कोलेस्ट्रॉल
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
मोटापा
हृदय संबंधी बीमारियां
एट्रियल फाइब्रिलेशन (अनियमित धड़कन)
लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी
बढ़ती उम्र
परिवार में स्ट्रोक का इतिहास
FAST नियम से पहचानें स्ट्रोक
F – Face (चेहरा): क्या चेहरा एक तरफ झुक गया है?
A – Arm (बांह): क्या एक हाथ उठाने में कमजोरी है?
S – Speech (बोलना): क्या बोलने में परेशानी हो रही है?
T – Time (समय): यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।
क्या करें?
तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल जाएं।
लक्षण शुरू होने का समय नोट करें।
खुद से कोई दवा, खासकर ब्लड थिनर, बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
मरीज को सुरक्षित स्थिति में रखें और बेहोश होने पर करवट दिलाएं।
बचाव के उपाय
ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें।
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
संतुलित आहार लें।
नियमित व्यायाम करें।
कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं समय पर लें।
Disclaimer: ब्रेन क्लॉटिंग या स्ट्रोक के मामलों में सबसे बड़ी गलती इलाज में देरी करना और शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना है। समय पर सही इलाज मिलने से कई मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, इसलिए किसी भी चेतावनी संकेत को नजरअंदाज न करें। यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यदि स्ट्रोक या ब्रेन ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

