बच्चों की तस्करी को गंभीरता से लें, सुप्रीम कोर्ट सख्त कहा- 'आंखों में धूल झोंकना' बंद करें राज्य
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 03:41 PM (IST)
नारी डेस्क: देश में मासूम बच्चों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, जो समाज के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं। इस दर्दनाक सच्चाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों को फटकार लगाई है और साफ कहा है कि अब सिर्फ दिखावे की कार्रवाई नहीं चलेगी। कोर्ट ने भावुक शब्दों में इशारा किया कि बच्चों की जिंदगी से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए ‘आंखों में धूल झोंकना’ बंद कर वास्तविक और ठोस कदम उठाने का समय आ गया है, ताकि इन मासूमों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस J. B. Pardiwala और K. V. Viswanathan की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बाल तस्करी से जुड़े गिरोह देशभर में सक्रिय हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह निगरानी कर सकता है, लेकिन असली कार्रवाई राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित एजेंसियों को ही करनी होगी।

राज्यों के रवैये पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि 2025 में दिए गए फैसले को सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। पीठ ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में बच्चों को बचाया जाना यह साबित करता है कि समस्या का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए मजबूत राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति जरूरी है।
2025 के फैसले में क्या दिए गए थे निर्देश?
पिछले साल 15 अप्रैल को कोर्ट ने कई अहम निर्देश दिए थे, जिनमें शामिल हैंतस्करी से जुड़े मामलों की सुनवाई 6 महीने के अंदर पूरी करना। मानव तस्करी निरोधक इकाइयों (AHTU) को मजबूत बनाना। जांच प्रक्रिया को बेहतर करना संवेदनशील इलाकों की पहचान और निगरानी बढ़ाना।
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रिपोर्ट दाखिल न करने पर फटकार
कोर्ट ने कुछ राज्यों की रिपोर्ट को “आंखों में धूल झोंकना” तक बता दिया। मध्य प्रदेश, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और पंजाब जैसे राज्यों ने अब तक तय फॉर्मेट में रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

राज्यों को आखिरी मौका
जब मध्य प्रदेश के गृह सचिव ने गलती मानी, तो कोर्ट ने “आखिरी मौका” देते हुए चेतावनी दी कि अगर बार-बार लापरवाही हुई, तो राज्यों को आदेश का पालन न करने वाला घोषित किया जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी बताया कि करीब 15 राज्यों ने अभी तक निगरानी समितियां तक नहीं बनाई हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जिसमें कोर्ट राज्यों की प्रगति की समीक्षा करेगा।
बाल तस्करी एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। राज्यों को जिम्मेदारी निभाते हुए तुरंत एक्शन लेना होगा, तभी इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

