कैंसर के दर्द से तड़प उठी थी ये Actress! सालों बाद बीमारी पर तोड़ी चुप्पी, कहा- कैसे प्यार करूं…
punjabkesari.in Monday, Oct 12, 2026 - 05:51 PM (IST)
नारी डेस्क : बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे अपनी खूबसूरती और शानदार अदाकारी के साथ-साथ अपनी हिम्मत के लिए भी जानी जाती हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने जिंदगी को देखने का अपना नजरिया बदल लिया। हाल ही में सोनाली बेंद्रे ने कैंसर के इलाज के दौरान झेले गए दर्द, चुनौतियों और खुद से प्यार करने के अपने सफर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल दौर में उनके मन में कई सवाल उठते थे। सबसे बड़ा सवाल यह था कि जब उनका अपना शरीर उन्हें इतना दर्द दे रहा था, तो वह उससे प्यार कैसे करें?
कैंसर से उबरने के बाद बदली जिंदगी
सोनाली बेंद्रे इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘पति पत्नी और पंगा 2’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच वह माधुरी दीक्षित द्वारा होस्ट किए जा रहे मराठी शो ‘कौन होणार करोड़पति’ के प्रीमियर में पहुंचीं। यहां बातचीत के दौरान माधुरी दीक्षित ने कैंसर से उबरने के बाद सोनाली के जीवन में आए बदलावों और उनकी हिम्मत की तारीफ की। माधुरी ने कहा कि कैंसर से उबरने के बाद दर्शकों को सोनाली का एक नया रूप देखने को मिला। उन्होंने बताया कि किस तरह सोनाली एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में सामने आईं। इस बातचीत के दौरान सोनाली ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस बीमारी ने उन्हें जिंदगी के बारे में बहुत कुछ सिखाया।

मैंने कैंसर को कभी जंग की तरह नहीं देखा
सोनाली बेंद्रे ने बताया कि कैंसर से लड़ने के अनुभव को अक्सर जीत और हार की भाषा में समझाया जाता है, लेकिन उन्होंने इस बीमारी को देखने का एक अलग नजरिया अपनाया। उनके मुताबिक, उस समय उनका मकसद सिर्फ बीमारी से छुटकारा पाना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि इस अनुभव से वह क्या सीख सकती हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने कैंसर के पूरे सफर को सीखने के एक अवसर के रूप में देखा। इस मुश्किल दौर ने उन्हें खुद को बेहतर तरीके से समझने और अपनी जिंदगी के प्रति नया नजरिया अपनाने में मदद की।
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जब शरीर दर्द दे रहा हो, तो खुद से प्यार कैसे करें?
सोनाली ने बातचीत के दौरान अपने मन में उठने वाले सबसे मुश्किल सवाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब हम किसी बीमारी को हराने की बात करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हम अपने ही शरीर के खिलाफ लड़ रहे हों। जबकि कैंसर की कोशिकाएं भी शरीर की ही कोशिकाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान असहनीय दर्द से गुजरते हुए उनके मन में सवाल उठता था कि आखिर वह अपने शरीर से प्यार कैसे करें, जब वही उन्हें इतना दर्द दे रहा है। उनके लिए यह समझना आसान नहीं था कि जिस शरीर के साथ वह हमेशा से जुड़ी रही हैं, उसी के दर्द को किस तरह स्वीकार करें। सोनाली के मुताबिक, धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर के साथ लड़ने के बजाय उसके प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखने के बारे में सोचना शुरू किया। उन्हें लगा कि शायद अपने शरीर को समझना और उसके प्रति संवेदनशील होना ही उनके लिए सही रास्ता हो सकता है।

कैंसर ने सिखाया खुद को स्वीकार करना
सोनाली बेंद्रे की इस बातचीत से यह बात सामने आती है कि किसी गंभीर बीमारी से गुजरना केवल शारीरिक चुनौती नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी मुश्किल अनुभव हो सकता है। उनके लिए कैंसर का सफर सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उन्हें खुद के प्रति अपने नजरिए पर दोबारा विचार करने का मौका भी दिया। एक्ट्रेस ने जिस तरह अपने अनुभवों को साझा किया, उससे यह समझने में मदद मिलती है कि मुश्किल समय में खुद के प्रति दयालु रहना और अपनी भावनाओं को स्वीकार करना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

