तेज सिरदर्द और उल्टी को न करें Ignore, हो सकती है Brain की यह गंभीर बीमारी

punjabkesari.in Thursday, Jan 01, 2026 - 03:53 PM (IST)

 नारी डेस्क: मैनिंजाइटिस एक गंभीर बीमारी है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन के कारण होती है। इन सुरक्षात्मक झिल्लियों को मेनिंजेस (Meninges) कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो मैनिंजाइटिस दिमाग की बाहरी परत में होने वाला संक्रमण या सूजन है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। मैनिंजाइटिस वायरस, बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों के संक्रमण के कारण हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले लेता है।

मैनिंजाइटिस का पहला लक्षण क्या होता है?

तेज बुखार

मैनिंजाइटिस का सबसे पहला और आम लक्षण तेज बुखार आना होता है। यह बुखार अचानक शुरू होता है और अक्सर बहुत ज्यादा होता है। खास बात यह है कि यह बुखार सामान्य दवाइयों से भी जल्दी नहीं उतरता। शुरुआत में लोग इसे वायरल या सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर बुखार लगातार बना रहे और साथ में सिरदर्द या उल्टी हो, तो यह मैनिंजाइटिस का संकेत हो सकता है। बच्चों और बुज़ुर्गों में यह लक्षण ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

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तेज सिरदर्द

मैनिंजाइटिस में होने वाला सिरदर्द सामान्य सिरदर्द से बिल्कुल अलग और बहुत तेज होता है। यह दर्द लगातार बना रहता है और समय के साथ बढ़ता जाता है। कई बार दर्द इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति ठीक से बैठ या लेट भी नहीं पाता। दर्द दवाइयों से भी पूरी तरह ठीक नहीं होता। यह सिरदर्द दिमाग की झिल्लियों में सूजन के कारण होता है, इसलिए इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

जी मिचलाना और उल्टी

तेज बुखार और सिरदर्द के साथ अक्सर जी मिचलाने और उल्टी की समस्या भी होती है। कई बार बिना कुछ खाए भी उल्टी हो सकती है। यह लक्षण इस बात का संकेत होता है कि दिमाग के अंदर दबाव बढ़ रहा है। बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। अगर उल्टी बार-बार हो रही हो और साथ में तेज सिरदर्द भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

रोशनी से परेशानी

मैनिंजाइटिस के मरीजों को तेज रोशनी बिल्कुल भी सहन नहीं होती। हल्की रोशनी भी आंखों में चुभन और दर्द पैदा कर सकती है। ऐसे लोग अक्सर अंधेरे कमरे में रहना पसंद करते हैं। रोशनी देखने से सिरदर्द और ज्यादा बढ़ जाता है। यह लक्षण दिमाग और आंखों की नसों में सूजन की वजह से होता है और मैनिंजाइटिस का एक अहम संकेत माना जाता है।

मानसिक भ्रम या उलझन

मैनिंजाइटिस होने पर व्यक्ति की मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। मरीज को सोचने-समझने में दिक्कत होती है और वह ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। कई बार वह सवालों के सही जवाब नहीं दे पाता या भ्रमित नजर आता है। कुछ मामलों में व्यक्ति असामान्य व्यवहार करने लगता है, जैसे अचानक गुस्सा करना या चुप रहना। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है।

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शरीर पर चकत्ते होना एक गंभीर संकेत

मैनिंजाइटिस के कई मामलों में शरीर पर लाल या बैंगनी रंग के चकत्ते दिखाई देने लगते हैं। यह एक गंभीर लक्षण माना जाता है। अगर इन चकत्तों पर कांच का गिलास दबाने पर भी ये गायब न हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मैनिंजाइटिस होने के कारण

बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस: यह सबसे खतरनाक प्रकार का मैनिंजाइटिस होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है और जल्दी इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।

वायरल मैनिंजाइटिस: यह बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस की तुलना में कम गंभीर होता है। यह सबसे आम प्रकार है और सही देखभाल से ठीक हो सकता है।

फंगल और अन्य कारण: कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगल या अन्य संक्रमण के कारण भी मैनिंजाइटिस हो सकता है।

मैनिंजाइटिस का इलाज क्या है? 

मैनिंजाइटिस एक गंभीर बीमारी है, इसलिए इसका इलाज जल्दी और सही समय पर शुरू करना बहुत जरूरी होता है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मैनिंजाइटिस बैक्टीरियल, वायरल या फंगल किस कारण से हुआ है। देर होने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।

बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस का इलाज

बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस सबसे खतरनाक होता है और इसमें तुरंत अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है। इसमें मरीज को नसों के जरिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, ताकि संक्रमण को जल्दी रोका जा सके। कई बार सूजन कम करने के लिए स्टेरॉयड भी दिए जाते हैं। इलाज में देरी होने पर दिमाग को नुकसान, सुनने की शक्ति कम होना या अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इसमें लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

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वायरल मैनिंजाइटिस का इलाज

वायरल मैनिंजाइटिस आमतौर पर बैक्टीरियल की तुलना में कम गंभीर होता है। कई मामलों में यह कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाता है। इलाज में मरीज को पूरा आराम, पर्याप्त पानी, बुखार और दर्द कम करने की दवाएं दी जाती हैं। अगर वायरस ज्यादा गंभीर हो, तो डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं भी दे सकते हैं। इस दौरान शरीर को कमजोर न होने देना बहुत जरूरी होता है।

फंगल मैनिंजाइटिस का इलाज

फंगल मैनिंजाइटिस ज्यादातर उन लोगों में होता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। इसके इलाज में एंटीफंगल दवाएं लंबे समय तक दी जाती हैं। यह इलाज डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाता है, क्योंकि इसमें समय लग सकता है और नियमित जांच जरूरी होती है।

लक्षणों के अनुसार इलाज

मैनिंजाइटिस में सिर्फ संक्रमण ही नहीं, बल्कि लक्षणों को कंट्रोल करना भी जरूरी होता है। इसके लिए बुखार कम करने की दवाएं, सिरदर्द और उल्टी रोकने की दवाएं दी जाती हैं। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए फ्लूइड्स दिए जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज को आईसीयू में रखा जा सकता है।

इलाज के दौरान जरूरी सावधानियां

मरीज को पूरी तरह आराम देना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लेनी चाहिए। खुद से दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। अगर इलाज के दौरान कोई नया लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। इलाज पूरा होने के बाद भी कुछ समय तक फॉलो-अप जरूरी होता है।

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मैनिंजाइटिस होने पर क्या नुकसान हो सकता है?

अगर मैनिंजाइटिस का समय पर इलाज न किया जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। व्यक्ति की सुनने की क्षमता कम हो सकती है या पूरी तरह जा सकती है। याददाश्त कमजोर हो सकती है और सीखने में परेशानी हो सकती है। यह बीमारी मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है और कुछ मामलों में किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है।

मैनिंजाइटिस एक गंभीर लेकिन समय रहते पहचानी जाए तो इलाज योग्य बीमारी है। तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द, उल्टी, रोशनी से परेशानी और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देरी करना खतरनाक हो सकता है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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