मेरे लिए भीख मांगने वाला कोई पिता नहीं था', Sara Ali Khan ने नेपोटिज्म पर  कहा - मेरा कोई गॉडफादर नहीं

punjabkesari.in Wednesday, Oct 28, 2026 - 12:36 PM (IST)

 नारी डेस्क:  बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। कुछ लोगों का मानना है कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को इंडस्ट्री में आसानी से मौके मिल जाते हैं, जबकि बाहर से आने वाले लोगों को अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। अब इस मुद्दे पर अभिनेत्री सारा अली खान ने खुलकर अपनी बात रखी है। सारा ने माना कि स्टार किड होने के कारण उन्हें करियर की शुरुआत में कुछ फायदे जरूर मिले, लेकिन उनका कहना है कि उनके पिता सैफ अली खान ने फिल्मों में काम दिलाने के लिए किसी से सिफारिश नहीं की। एक्ट्रेस ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि फिल्म 'केदारनाथ' के दौरान आई मुश्किलों को उन्हें खुद ही संभालना पड़ा था।

नेपोटिज्म पर क्या बोलीं सारा अली खान?

सारा अली खान ने फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में अपने फिल्मी करियर, परिवार और नेपोटिज्म पर बात की। उन्होंने कहा कि वह इस बात से इनकार नहीं करतीं कि फिल्मी परिवार से होने के कारण उनके लिए इंडस्ट्री के दरवाजे खुले। उन्हें मौके मिले और अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले ही लोग उन्हें जानने लगे थे। हालांकि, सारा का मानना है कि किसी कलाकार को सिर्फ उसके परिवार के नाम से पहचानना और उसकी मेहनत को नजरअंदाज करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि नेपोटिज्म शब्द को अब इस तरह देखा जाने लगा है कि इससे कलाकार की अपनी मेहनत और काबिलियत पर सवाल उठने लगते हैं। सारा के मुताबिक, जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे और उनके जैसी अभिनेत्रियों ने यह तय नहीं किया था कि उनका जन्म किस परिवार में होगा। इसलिए सिर्फ इस वजह से उन्हें गलत ठहराना ठीक नहीं है।

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'हमने यह नहीं चुना कि किसके घर पैदा होना है'

सारा ने बातचीत के दौरान कहा कि फिल्मी परिवार से आने का फायदा और नुकसान, दोनों हो सकते हैं। एक तरफ ऐसे कलाकारों को शुरुआती मौके आसानी से मिल सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनसे उम्मीदें भी काफी ज्यादा रखी जाती हैं। उन्होंने कहा, 'यह दोनों का मिश्रण है। मैं इतनी भोली नहीं हूं कि इस बात को स्वीकार न करूं और इसके लिए आभारी न रहूं कि इससे मेरे लिए दरवाजे खुले। इससे मुझे मौके मिले, पहचान मिली और शायद अभिनेत्री बनने से पहले ही शोहरत भी मिल गई।' सारा ने आगे कहा कि उन्हें इस बात से परेशानी होती है जब नेपोटिज्म की बहस में कलाकार की मेहनत को कम करके देखा जाता है। उनके मुताबिक, किसी का जन्म किस परिवार में होगा, यह उसके हाथ में नहीं होता। इसलिए कलाकार के काम को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए, जितनी उसके परिवार और पृष्ठभूमि को दी जाती है।

'हमें उस बात के लिए दोषी ठहराना सही नहीं, जो हमारी गलती नहीं'

सारा ने यह भी माना कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को डेब्यू के लिए ऐसे मौके मिल सकते हैं, जिन्हें पाने के लिए दूसरे लोग लंबे समय तक कोशिश करते हैं। वह खुद को इस मामले में भाग्यशाली मानती हैं। लेकिन उनका कहना है कि करियर में कई साल काम करने के बाद भी बार-बार सिर्फ परिवार के नाम पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार को अपने जन्म के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। सारा के मुताबिक, उन्होंने और उनकी जैसी पृष्ठभूमि से आने वाली अभिनेत्रियों ने अपनी मेहनत से भी आगे बढ़ने की कोशिश की है। इसलिए उनके काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वे किसकी बेटी हैं।

'मेरे पिता ने फिल्मों के लिए किसी से सिफारिश नहीं की'

अपने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए सारा ने पिता सैफ अली खान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां अमृता सिंह के साथ पली-बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, सैफ ने फिल्मों में काम दिलाने के लिए निर्माताओं के चक्कर नहीं लगाए और न ही उनके कॉन्ट्रैक्ट के लिए किसी से गुजारिश की। सारा ने कहा, 'मैं अपनी मां के साथ रहती हूं। मेरे पिता ऐसे नहीं थे कि दफ्तरों में जाकर मेरे कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत करते या लोगों से मेरी फिल्मों में कास्ट करने की गुजारिश करते, भीख मांगते या मिन्नतें करते।' एक्ट्रेस ने बताया कि जब उनकी पहली फिल्म 'केदारनाथ' के दौरान परेशानी आई थी, तब उन्हें खुद ही उस स्थिति को संभालना पड़ा था। उस समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि इस मुश्किल से निकलने के लिए उनके पास कोई मदद करने वाला नहीं था। उन्होंने अपने अनुभव को दोधारी तलवार जैसा बताया। सारा के मुताबिक, फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें पहचान जरूर मिली, लेकिन इंडस्ट्री में उनका कोई ऐसा गॉडफादर नहीं था, जो हर मुश्किल में उनके लिए रास्ता बनाता।

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'केदारनाथ' के दौरान आई थी परेशानी

सारा अली खान ने साल 2018 में फिल्म 'केदारनाथ' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में उनके साथ सुशांत सिंह राजपूत नजर आए थे। फिल्म की रिलीज से पहले कुछ परेशानियां भी सामने आई थीं, जिनका जिक्र सारा ने अपने इंटरव्यू में किया। सारा के मुताबिक, उस समय उन्हें परिस्थितियों को खुद समझना और संभालना पड़ा। उन्होंने इस अनुभव के जरिए यह बताने की कोशिश की कि फिल्मी परिवार से आने का मतलब यह नहीं है कि करियर में हर कदम पर किसी की मदद मिलती ही रहेगी। 'केदारनाथ' के बाद सारा ने 'सिंबा', 'लव आज कल', 'अतरंगी रे', 'जरा हटके जरा बचके' और 'ऐ वतन मेरे वतन' जैसी फिल्मों में काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। सारा अभिनेता सैफ अली खान और अभिनेत्री अमृता सिंह की बेटी हैं। वह दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की पोती भी हैं। ऐसे में उनका फिल्मी परिवार से जुड़ाव हमेशा चर्चा का विषय रहा है।

'उड़ता तीर' को लेकर भी चर्चा में हैं सारा

काम की बात करें तो सारा अली खान इन दिनों फिल्म 'उड़ता तीर' को लेकर चर्चा में हैं। आकाश कौशिक के निर्देशन में बनी इस स्पाई-कॉमेडी फिल्म में आयुष्मान खुराना मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में राहुल बोस, राम कपूर, गुलशन ग्रोवर, मुकुल देव, सुहैल नैय्यर, सुप्रिया पिलगांवकर, बृजेंद्र काला और संदीप आनंद भी अहम किरदारों में नजर आते हैं। फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस और सिख्या एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया गया है। इसे दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।

फिलहाल सारा का नेपोटिज्म पर दिया गया बयान एक बार फिर इस बहस को सामने ले आया है कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के लिए परिवार का नाम कितना मायने रखता है और कलाकार की अपनी मेहनत की भूमिका कितनी अहम है। सारा ने अपने बयान में दोनों पहलुओं को स्वीकार करते हुए अपनी बात रखी है।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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