Sadhguru ने बताया इम्यूनिटी बढ़ाने का आसान नुस्खा, बस शहद में भिगोकर खाएं ये 2 चीजें

punjabkesari.in Monday, Aug 17, 2026 - 01:42 PM (IST)

नारी डेस्क : इम्यूनिटी मजबूत हो तो शरीर संक्रमण और मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहता है, जबकि कमजोर इम्यूनिटी में अक्सर थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी मानी जाती है। इसी बीच आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का बताया आंवला, शहद और काली मिर्च का मिश्रण चर्चा में है। आइए जानते हैं इस नुस्खे को कैसे तैयार किया जाता है, इन तीनों चीजों के संभावित फायदे क्या हैं और इसका सेवन करते समय किन लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

सद्गुरु ने बताया मिश्रण

सद्गुरु की वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, आंवले को शहद में रातभर भिगोकर उसमें थोड़ी कुटी हुई काली मिर्च मिलाने की बात कही गई है। उनके अनुसार इसे खाली पेट लिया जा सकता है और मूल सलाह में 3 चम्मच दिन में 3 बार लेने का उल्लेख है। साथ ही, सद्गुरु ने दावा किया है कि इसे 4 से 8 सप्ताह तक लेने पर इम्यून सिस्टम में सुधार देखा जा सकता है।

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कैसे तैयार करें आंवला-शहद और काली मिर्च का मिश्रण?

इस नुस्खे को तैयार करने के लिए
3-5 ताजे आंवले लें।
आंवले को धोकर बीज निकालें और छोटे टुकड़ों में काट लें।
इसमें थोड़ी मात्रा में कुटी हुई काली मिर्च डालें।
अब इसमें शहद मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें।
मिश्रण को ढककर रातभर रखा जा सकता है।
आंवला, शहद और काली मिर्च को रातभर साथ रखने और अगले दिन सेवन करें।

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आंवला, शहद और काली मिर्च क्यों है खास?

आंवला विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है। विटामिन C शरीर के सामान्य इम्यून फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए आंवले को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। शहद में कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। शोध में शहद को खासकर खांसी में राहत देने वाले घरेलू उपाय के रूप में कुछ लाभ दिखा है। काली मिर्च में पाइपरीन समेत कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल भारतीय भोजन में लंबे समय से मसाले के रूप में होता रहा है। सीमित मात्रा में इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है।

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खाली पेट लेने से पहले रखें सावधानी

हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। आंवला और काली मिर्च कुछ लोगों में एसिडिटी, पेट में जलन या असहजता पैदा कर सकते हैं। वहीं शहद में प्राकृतिक शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को इसकी मात्रा को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों ने भी अनियंत्रित डायबिटीज वाले लोगों को ऐसे घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेने को कहा है।

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किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोग।
जिन्हें बार-बार एसिडिटी या पेट में जलन होती है।
किसी बीमारी के लिए नियमित दवाएं लेने वाले लोग।
जिन्हें आंवला, शहद या काली मिर्च से एलर्जी है।
1 साल से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे बोटुलिज्म का जोखिम होता है।

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इम्यूनिटी के लिए सिर्फ नुस्खे पर निर्भर न रहें

आंवला, शहद और काली मिर्च को सामान्य डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे चमत्कारी इम्यूनिटी बूस्टर या बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन, फल-सब्जियां, अच्छी नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
नोट : सद्गुरु द्वारा बताए गए मिश्रण को किसी बीमारी के इलाज या संक्रमण से बचाव की गारंटी न समझें। यदि आपको कोई बीमारी है, आप नियमित दवाएं लेते हैं या इस नुस्खे से परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।


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Content Editor

Monika

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