नानी का नुस्खा, अब दिलजीत दोसांझ की भी पसंद! आयुर्वेद एक्सपर्ट ने बताए इसके फायदे
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 05:31 PM (IST)
नारी डेस्क: बचपन में आपने घर के बड़े-बुजुर्गों से अक्सर सुना होगा कि रात को सोने से पहले नाभि में तेल लगाना चाहिए। अब यही पारंपरिक तरीका एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने एक वीडियो में बताया कि नेवल ऑयलिंग (Navel Oiling) उनकी सेल्फ-केयर रूटीन का हिस्सा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस आयुर्वेदिक उपाय को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, नाभि में तेल लगाने की परंपरा कोई नया ट्रेंड नहीं, बल्कि सदियों पुराना आयुर्वेदिक अभ्यास है। हालांकि, इसके कई दावों पर आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
आयुर्वेद में नाभि को क्यों माना जाता है खास
आयुर्वेद के अनुसार नाभि शरीर का महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। इसे ऊर्जा, पाचन शक्ति और शरीर के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद में नाभि के आसपास स्थित मणिपुर चक्र का उल्लेख मिलता है, जिसे शरीर की ऊर्जा और इच्छाशक्ति का केंद्र माना जाता है। यह भी माना जाता है कि नाभि के आसपास की त्वचा अपेक्षाकृत पतली होती है और इस क्षेत्र के नीचे कई रक्त वाहिकाएं तथा तंत्रिका तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से मौजूद होते हैं। इसी वजह से इस स्थान पर तेल से हल्की मालिश करने की परंपरा चली आ रही है।
क्या हैं नाभि में तेल लगाने के संभावित फायदे
आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से नाभि में तेल लगाने से शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करने में मदद मिल सकती है। इससे पाचन तंत्र बेहतर रहने, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलने और शरीर को पोषण बेहतर तरीके से मिलने की बात कही जाती है। इसके अलावा कई लोग मानते हैं कि इससे त्वचा को नमी मिलती है, रूखापन कम होता है और बालों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंच सकता है। हालांकि, इन फायदों की पुष्टि के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं हैं।
त्वचा और शरीर की जरूरत के अनुसार चुनें सही तेल
हर व्यक्ति की त्वचा और शरीर की प्रकृति अलग होती है। इसलिए आयुर्वेद में अलग-अलग तेलों के अलग उपयोग बताए गए हैं।
नारियल का तेल
अगर आपकी त्वचा रूखी या संवेदनशील है तो नारियल का तेल अच्छा विकल्प माना जाता है। यह त्वचा को नमी देने, जलन और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है।
तिल का तेल
तिल का तेल विशेष रूप से वात दोष को संतुलित करने वाला माना जाता है। यह त्वचा को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने और सर्दियों में होने वाले रूखेपन को कम करने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में इसे शरीर को गहराई से पोषण देने वाला तेल भी बताया गया है।
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बादाम का तेल
बादाम के तेल में विटामिन ई और हेल्दी फैटी एसिड पाए जाते हैं। यह त्वचा को मुलायम बनाए रखने, प्राकृतिक चमक बढ़ाने और बालों को पोषण देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग इसे एंटी-एजिंग स्किन केयर रूटीन का भी हिस्सा मानते हैं।
नीम का तेल
अगर त्वचा ऑयली है या बार-बार मुंहासे निकलते हैं तो आयुर्वेद में नीम के तेल का उपयोग लाभकारी माना गया है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ रखने में मदद कर सकते हैं। साथ ही यह डैंड्रफ जैसी समस्याओं में भी उपयोगी माना जाता है।

सरसों का तेल
सरसों का तेल शरीर को गर्माहट देने वाला माना जाता है। इसलिए सर्दियों के मौसम में इसका उपयोग अधिक किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और रक्त संचार को सक्रिय रखने में सहायक हो सकता है।
नाभि में तेल लगाने का सही तरीका
अगर आप यह पारंपरिक उपाय अपनाना चाहते हैं तो सबसे पहले तेल को हल्का गुनगुना कर लें। इसके बाद नाभि में दो से चार बूंद तेल डालें और नाभि के आसपास हल्के हाथों से गोलाकार गति में मालिश करें। मालिश के बाद कुछ मिनट तक सीधे लेट जाएं ताकि तेल त्वचा पर अच्छी तरह लगा रहे। आयुर्वेद में इसे रात को सोने से पहले करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
कौन सा तेल आपके लिए सही है
आयुर्वेद के अनुसार तेल का चुनाव व्यक्ति की वात, पित्त और कफ प्रकृति, मौसम और त्वचा की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर त्वचा बहुत रूखी है तो नारियल या तिल का तेल बेहतर माना जाता है, जबकि ऑयली और मुंहासों वाली त्वचा के लिए नीम का तेल उपयोगी हो सकता है।
क्या सिर्फ नाभि में तेल लगाने से मिल जाएंगे सभी फायदे?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ त्वचा, मजबूत बाल और बेहतर पाचन के लिए केवल नाभि में तेल लगाना ही पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम और सही स्किन केयर भी उतने ही जरूरी हैं। अगर त्वचा, बाल या पाचन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

