जान ताे बच गई लेकिन पल- पल डर... ठीक नहीं है Air India हादसे में  इकलौता जिंदा बचे शख्स की हालत

punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 06:53 PM (IST)

नारी डेस्क: गुजरात के अहमदाबाद में एक साल पहले उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हुई विमान दुर्घटना में जीवित बचे एकमात्र व्यक्ति को आज भी उस हादसे की यादें भयभीत कर देती हैं। 12 जून 2025 को एअर इंडिया का विमान (उड़ान संख्या 171) लंदन आ रहा था, लेकिन अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद यह बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विश्वास कुमार रमेश नामक एक व्यक्ति को छोड़कर विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी। 

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 उड़ान भरने के 32 सेकंड बाद हो गया था हादसा

दुनिया भर के मीडिया प्रतिष्ठानों ने दुर्घटना वाली जगह से दूर जाते रमेश की तस्वीरें दिखाई थीं, जिनकी टी-शर्ट पर खून के धब्बे थे और हाथ में मोबाइल फोन था। रमेश का कहना है कि आज एक साल बाद भी वह ''नींद न आने, घबराहट और मुश्किल यादों से जूझ रहे हैं।'' बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में चालक दल के 12 सदस्यों समेत कुल 242 लोग सवार थे। उड़ान भरने के लगभग 32 सेकंड बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में 241 विमान यात्रियों के साथ ही जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी मौत हो गई थी। ब्रिटेन के लीसेस्टर में अपने परिवार के साथ रहने वाले 39 साल के रमेश ने इस हादसे में अपने भाई अजय को खो दिया। उनका कहना है कि इस घटना ने उन्हें एक इंसान के तौर पर बदल दिया।
 

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उस भयानक हादसे को नहीं भूल पाए रमेश

 रमेश ने कहा- ''मैं जीवित रहने के लिए आभारी हूं, लेकिन जीवित रहना कहानी का केवल एक हिस्सा है। उसके बाद मैंने जो कुछ भी झेला है, वह शब्दों में बयां करने से कहीं ज़्यादा मुश्किल रहा है।'' उन्होंने कहा कि वह अब भी ''शारीरिक, मानसिक और आर्थिक'' रूप से संघर्ष कर रहे हैं। लीसेस्टर के सामुदायिक नेता और रमेश के परिवार के करीबी पटेल ने कहा कि वह (रमेश) बिना किसी सहारे के अपने घर से बाहर निकलने में असमर्थ हैं और प्लेन में बैठने के नाम से ही वह घबरा जाते हैं। उन्होंने कहा- ''रमेश अब भी गहरे सदमे में हैं और जख्म लंबे समय तक, या शायद हमेशा के लिए, उनके साथ रहेंगे।'' उन्होंने कहा, -''इससे प्रभावित सभी परिवार गहरे सदमे से गुज़र रहे हैं। हर कोई मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। और रमेश तथा उनके परिवार के लिए यह इतना भयानक रहा है कि इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।''
 


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vasudha

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