श्रीनगर के इस मंदिर में 36 साल बाद मनाई गई राम नवमी,  यहां 1990 में आतंकियों ने तोड़ दी थीं मूर्तियां

punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 09:49 AM (IST)

नारी डेस्क: श्रीनगर के हब्बा कदल स्थित रघुनाथ मंदिर में एक ऐतिहासिक अवसर आया, जब 36 साल के अंतराल के बाद वहां राम नवमी मनाई गई। मंदिर समिति ने इस अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। रघुनाथ मंदिर समिति के महासचिव सुनील टिकू ने बताया कि यह मंदिर कभी इस त्योहार के लिए पूरे क्षेत्र से कश्मीरी पंडितों को आकर्षित करता था, और इस साल यहां एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। खास बात तो यह थी कि इस आयोजन के लिए  चावल, लकड़ियां और फूल  मंदिर के आस-पास रहने वाले स्थानीय मुस्लिम परिवारों द्वारा जुटाई गई। 

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वीरवार  को ANI से बात करते हुए टिकू ने कहा- "इस मंदिर का मुख्य त्योहार राम नवमी था, और कश्मीरी पंडित दूर-दूर से यहां आते थे। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है हमने 36 साल बाद इस त्योहार का आनंद लिया, और ईश्वर की कृपा से ही यह सब संभव हो पाया।" नौ दिनों तक चलने वाला यह त्योहार, जिसे 'राम नवरात्रि' भी कहा जाता है, राम नवमी के दिन समाप्त होता है। राम नवमी भगवान राम के जन्मदिवस का प्रतीक है। पूरे त्योहार के दौरान, ये सभी नौ दिन देवी शक्ति के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होते हैं। 

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यह त्योहार पूरे भारत में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, जिसमें विभिन्न अनुष्ठानों और प्रार्थनाओं के माध्यम से देवी के विविध स्वरूपों का पूजन किया जाता है। राम नवमी वह पावन दिवस है जब भगवान राम ने अपने मानवीय और दिव्य स्वरूप में अवतार लिया था। इस दिन को पूरे भारत में, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर अयोध्या में, अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। राम नवमी से पहले, हिंदू चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों का उपवास रखते हैं। 

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इस उपवास में मद्यपान और धूम्रपान से परहेज किया जाता है; साथ ही सात्विक शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है और शरीर के शुद्धिकरण (detoxification) की प्रक्रिया को सुगम बनाने हेतु स्वयं को प्रार्थना और ध्यान में लीन रखा जाता है।इसी क्रम में, एक 'शोभा यात्रा' का भी आयोजन किया गया। जम्मू में राम नवमी के शुभ अवसर पर। इस मंदिर को  1990 में आतंकियों ने तबाह कर दिया था। निजाम-ए-मुस्तफा का नारा देते हुए आतंकी मंदिर में घुसे। मंदिर को लूटा, मूर्तियां तोड़ीं और मूर्तियों को झेलम में फेंक दिया।


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vasudha

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