स्टडी में हुआ खुलासा, 2040 तक प्लास्टिक लोगों की जिंदगी में जहर घोल देगी

punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 05:24 PM (IST)

नारी डेस्क: एक नई स्टडी में चेतावनी दी गई है कि अगर प्लास्टिक के इस्तेमाल और उत्पादन में बदलाव नहीं किया गया, तो 2040 तक यह लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा बन सकता है। रिसर्च के अनुसार, प्लास्टिक का पूरा जीवनचक्र  यानी उसका निर्माण, इस्तेमाल और निपटान  हर चरण में इंसानों और पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है।

क्या स्टडी में पाया गया?

रिसर्च में 2016 से 2040 तक के डेटा का विश्लेषण किया गया। अगर मौजूदा तरीके जारी रहे, तो प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान दोगुने हो सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर असर में लगभग 40% योगदान होगा। प्लास्टिक बनाने की प्रक्रियाओं से हवा में होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 32% होगा। प्लास्टिक के जीवनचक्र में पर्यावरण में छोड़े जाने वाले जहरीले रसायनों का असर 27% तक होगा। इसके अलावा पानी की कमी, ओजोन परत पर असर और रेडिएशन से होने वाला नुकसान 1% से कम है।

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कैसे प्रभावित होती है सेहत?

प्लास्टिक के उत्सर्जन से कैंसर और गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के निर्माण और खुले में जलाने से होता है। 2016 में प्लास्टिक से स्वास्थ्य पर 2.1 मिलियन साल का नुकसान हुआ था, जो 2040 तक 4.5 मिलियन साल तक बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, 2016 से 2040 के बीच ग्लोबल प्लास्टिक सिस्टम लोगों की 83 मिलियन साल की स्वस्थ जीवन अवधि कम कर सकता है।

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क्या समाधान है?

केवल कचरा इकट्ठा करना और रीसाइक्लिंग सुधारने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। प्लास्टिक सामग्री बदलने, दोबारा इस्तेमाल करने और उत्पादन को नियंत्रित करने से स्वास्थ्य पर प्रभाव कम किया जा सकता है। नीति बनाने वालों को नए प्लास्टिक के उत्पादन को नियंत्रित करना और गैर-जरूरी इस्तेमाल को कम करना चाहिए।

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अगर वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक के उत्पादन और इस्तेमाल में बदलाव नहीं हुआ, तो 2040 तक यह न केवल पर्यावरण बल्कि इंसानों की सेहत पर भी गंभीर खतरा बन जाएगा।   


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Content Editor

Priya Yadav

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