कोरोना के बाद इस वायरस की चपेट में आया ये देश, जानें लक्षण और बचाव के तरीके
punjabkesari.in Sunday, Jan 18, 2026 - 06:08 PM (IST)
नारी डेस्क : कोरोना महामारी की यादें अभी पूरी तरह फीकी भी नहीं पड़ी थीं कि चीन में एक और वायरस ने चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के फोशान शहर स्थित एक सीनियर हाई स्कूल में 103 छात्र नोरोवायरस से संक्रमित पाए गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सभी छात्र सुरक्षित हैं और फिलहाल कोई भी मामला गंभीर या जानलेवा नहीं है। संक्रमित छात्रों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आए थे। शुरुआती मेडिकल जांच में इन सभी मामलों को नोरोवायरस संक्रमण से जोड़ा गया है।
मेडिकल डिपार्टमेंट ने क्या कहा?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी 103 छात्रों की हालत स्थिर है। एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर को पूरी तरह डिसइन्फेक्ट कर दिया गया है। छात्रों की सेहत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उनकी स्कूल उपस्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही संक्रमण के स्रोत का पता लगाने के लिए महामारी विज्ञान सर्वे (Epidemiological Survey) शुरू कर दिया गया है। ग्वांगडोंग प्रांत के डिजीज कंट्रोल अधिकारियों ने बताया कि यहां हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच नोरोवायरस के मामले बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड के मौसम में यह वायरस तेजी से फैलता है।

क्या है नोरोवायरस?
नोरोवायरस (Norovirus) दुनिया भर में पाए जाने वाले सबसे आम वायरस में से एक है। हर साल इसके करीब 68.5 करोड़ मामले सामने आते हैं, जिनमें लगभग 20 करोड़ बच्चे पांच साल से कम उम्र के होते हैं। विश्व स्तर पर यह वायरस हर साल लगभग 2 लाख लोगों की मौत का कारण बनता है, जिनमें करीब 50 हजार बच्चे शामिल होते हैं। इसका असर खासतौर पर कम आय वाले देशों में ज्यादा देखा जाता है। नोरोवायरस से होने वाले स्वास्थ्य और आर्थिक नुकसान को मिलाकर इसका वैश्विक खर्च लगभग 60 अरब डॉलर आंका गया है। इसका पहला बड़ा प्रकोप 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था, इसी कारण इसे पहले “नॉरवॉक वायरस” कहा गया।
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कैसे फैलता है नोरोवायरस?
नोरोवायरस अक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Norovirus acute gastroenteritis) का कारण बनता है, जिसे आम भाषा में लोग अक्सर “स्टमक फ्लू” कह देते हैं। हालांकि यह फ्लू से अलग है, क्योंकि फ्लू सांस की बीमारी करता है, जबकि नोरोवायरस (Norovirus) पेट को प्रभावित करता है। यह वायरस मुख्य रूप से दूषित भोजन या पानी, संक्रमित व्यक्ति के हाथों से छुए गए खाने, अधपके शेलफिश, गंदे पानी से धुली सब्ज़ियों और फलों के जरिए फैलता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह वायरस दरवाज़ों के हैंडल, नल, काउंटर जैसी सतहों पर दो हफ्ते तक जीवित रह सकता है।

नोरोवायरस से बचाव के तरीके
फिलहाल नोरोवायरस के लिए कोई प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोना सबसे जरूरी
केवल हैंड सैनिटाइजर इस वायरस पर पूरी तरह असरदार नहीं होता
बाथरूम और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को ब्लीच मिले पानी से साफ करें
संक्रमित व्यक्ति को घर पर ही आराम करना चाहिए
पानी, सूप और इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक जैसे तरल पदार्थ का अधिक सेवन करें।
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कोरोना के बाद चीन में नोरोवायरस के मामले सामने आना एक बार फिर यह याद दिलाता है कि स्वच्छता और सावधानी कितनी जरूरी है। समय पर जानकारी और सही बचाव से इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

