बस एक Test और नहीं पड़ेगी Chemotherapy की जरूरत! Cancer ट्रीटमेंट में नई उम्मीद
punjabkesari.in Tuesday, Jun 02, 2026 - 10:08 AM (IST)
नारी डेस्क: ब्रेस्ट कैंसर के इलाज को लेकर मेडिकल साइंस में एक नई और उम्मीद जगाने वाली खोज सामने आई है। अब तक इस बीमारी के इलाज में कीमोथेरेपी को एक जरूरी और मुख्य विकल्प माना जाता था, लेकिन इससे जुड़ी साइड इफेक्ट्स जैसे बाल झड़ना, कमजोरी और मानसिक तनाव मरीजों के लिए काफी मुश्किलें पैदा करते हैं। ऐसे में हाल ही में सामने आए शोध और जीनोमिक टेस्टिंग की मदद से यह संभावना जताई जा रही है कि कुछ मरीजों को बिना कीमोथेरेपी के भी प्रभावी इलाज दिया जा सकता है। यह बदलाव न सिर्फ इलाज को ज्यादा पर्सनलाइज बना रहा है, बल्कि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
एक जीनोमिक टेस्ट बदल सकता है इलाज का तरीका
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में हुए एक अंतरराष्ट्रीय ट्रायल ‘OPTIMA’ में यह पाया गया कि सिर्फ एक जीनोमिक टेस्ट के जरिए यह तय किया जा सकता है कि मरीज को कीमोथेरेपी की जरूरत है या नहीं। इस टेस्ट को ‘प्रोजिग्ना’ नाम दिया गया है, जो ट्यूमर में मौजूद 50 जीन की गतिविधियों का विश्लेषण करता है और कैंसर के लौटने के खतरे का अनुमान लगाता है।

कैसे काम करता है यह ‘प्रोजिग्ना’ टेस्ट
यह टेस्ट ट्यूमर की बायोलॉजी को समझकर मरीज के लिए पर्सनलाइज इलाज तय करने में मदद करता है। अगर टेस्ट में रिस्क “लो” आता है, तो डॉक्टर मरीज को कीमोथेरेपी के बजाय केवल हार्मोन थेरेपी देने का निर्णय ले सकते हैं।इससे मरीजों को अनावश्यक टॉक्सिसिटी और कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स से बचाया जा सकता है।
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ट्रायल के नतीजे रहे बेहद सकारात्मक
इस शोध में 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र की 4,429 महिलाओं को शामिल किया गया था। ये ट्रायल नॉर्वे, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और थाईलैंड जैसे देशों में किया गया।

पांच साल के फॉलोअप में पाया गया कि
कीमोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी लेने वाले लगभग 95% मरीज स्वस्थ रहे। केवल हार्मोन थेरेपी लेने वाले 94% मरीज भी कैंसर मुक्त पाए गए। इस तकनीक से अब डॉक्टर हर मरीज का इलाज उसके शरीर और ट्यूमर की स्थिति के अनुसार तय कर सकेंगे। इससे न सिर्फ इलाज अधिक सटीक होगा बल्कि मरीजों को अनावश्यक दर्द और साइड इफेक्ट्स से भी राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय
प्रोफेसर रॉब स्टीन के अनुसार यह शोध कैंसर उपचार को एक नई दिशा देता है, जहां इलाज लक्षणों के बजाय ट्यूमर की बायोलॉजी पर आधारित होगा। यह आने वाले समय में कैंसर ट्रीटमेंट को पूरी तरह बदल सकता है।

