ब्लड कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, भारत बायोटेक की कंपनी बनाएंगी खास थेरेपी
punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 03:15 PM (IST)
नारी डेस्क: ब्लड कैंसर के मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की वेजेन बायो के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मिलकर मल्टीपल मायलोमा नाम के ब्लड कैंसर के इलाज के लिए एक नई थेरेपी विकसित करने पर काम करेंगी। इस थेरेपी का नाम VL-2511 है। कंपनियों का लक्ष्य साल 2028 तक इसे बाजार में उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना है। इसके साथ ही कोशिश की जाएगी कि मरीजों को यह इलाज किफायती कीमत पर मिल सके। हालांकि, अभी यह थेरेपी विकास और जांच के चरण में है, इसलिए मरीजों के लिए इसकी उपलब्धता कई जरूरी प्रक्रियाओं और क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगी।
क्या है मल्टीपल मायलोमा, जिससे होता है ब्लड कैंसर
मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है, जो प्लाज्मा सेल्स को प्रभावित करता है। ये सफेद रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करने वाली एंटीबॉडी बनाने का काम करती हैं। ये कोशिकाएं बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर मौजूद उस ऊतक में पाई जाती हैं, जहां खून की कोशिकाएं बनती हैं। इस बीमारी में असामान्य प्लाज्मा सेल्स बढ़ने लगती हैं और बोन मैरो में जमा होकर सामान्य रक्त कोशिकाओं के निर्माण को प्रभावित कर सकती हैं। इससे मरीज को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे हड्डियों में दर्द, लगातार थकान, बार-बार संक्रमण होना और किडनी से जुड़ी समस्याएं। कुछ मरीजों में बीमारी समय के साथ दोबारा बढ़ सकती है या मौजूदा इलाज से पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में नए उपचार विकल्पों की जरूरत महसूस होती है।

क्या है CAR-T थेरेपी और कैसे करती है काम
VL-2511 को CAR-T सेल थेरेपी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह एक खास तरह का इलाज है, जिसमें मरीज की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता की कोशिकाओं को कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज के खून से टी-सेल्स नाम की प्रतिरक्षा कोशिकाएं निकाली जाती हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में इन कोशिकाओं में बदलाव किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद खास पहचान वाले प्रोटीन को पहचान सकें और उन पर हमला कर सकें। तैयार की गई कोशिकाओं को फिर मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। इस तरह की थेरेपी का उद्देश्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, CAR-T थेरेपी हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती और इससे कुछ गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में और निर्धारित चिकित्सा प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है।
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VL-2511 किन प्रोटीन को बनाएगी निशाना
वेजेन बायो की VL-2511 थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद BCMA और CD19 नाम के प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इन प्रोटीन को पहचानने की क्षमता विकसित करके थेरेपी का उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को पहचानना और उन पर हमला करना है। इस परियोजना में वेजेन बायो अपनी तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स थेरेपी के निर्माण और उत्पादन से जुड़ी प्रक्रिया विकसित करने पर काम करेगी। कंपनी हैदराबाद स्थित अपनी विशेष सुविधा में इसके निर्माण और भविष्य में बड़े स्तर पर उत्पादन की तैयारी करने की योजना बना रही है।
2028 तक बाजार में लाने की तैयारी
दोनों कंपनियों ने VL-2511 को साल 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस थेरेपी पर चीन में क्लिनिकल विकास का काम हो चुका है और अमेरिका में भी इसे विकसित किया जा रहा है। भारत में इसे आगे की जांच और क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार करने की योजना है। हालांकि, किसी भी नई कैंसर थेरेपी को मरीजों के लिए उपलब्ध कराने से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय मंजूरी से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इसलिए 2028 का लक्ष्य तय समय में पूरा होगा या नहीं, यह आगे होने वाली जांच और ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगा।

मरीजों के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी
मल्टीपल मायलोमा के इलाज में नई थेरेपी विकसित होने से उन मरीजों के लिए भविष्य में अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं, जिनमें मौजूदा इलाज से बीमारी नियंत्रित नहीं हो पाती या दोबारा बढ़ जाती है। भारत में ही इस तरह की उन्नत थेरेपी के निर्माण और उत्पादन की क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
कंपनियों का प्रयास है कि भविष्य में इस इलाज को किफायती बनाया जा सके, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद मरीजों तक इसकी पहुंच संभव हो। फिलहाल VL-2511 को लेकर उम्मीदें जरूर हैं, लेकिन इसे ब्लड कैंसर का प्रमाणित या उपलब्ध इलाज मानना जल्दबाजी होगी। मरीजों को अपने इलाज के विकल्पों के लिए हेमेटोलॉजिस्ट या कैंसर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

