भारत में एक ऐसा समुदाय जहां बेटियां घर की वारिस और बेटे होते हैं विदा
punjabkesari.in Sunday, Jan 18, 2026 - 02:12 PM (IST)
नारी डेस्क: हमारे समाज में अक्सर यह मान्यता रही है कि लड़कियों की शादी के बाद विदाई होती है और बेटियां अपने ससुराल चली जाती हैं। बचपन से ही लड़कियों को यही सिखाया जाता है कि उनका असली घर उनके माता-पिता का घर है, लेकिन शादी के बाद वे किसी और के घर में चली जाएंगी। वहीं, बेटे अपनी जन्मभूमि में ही रहते हैं और उन्हें विदाई का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन भारत में कुछ ऐसे समुदाय भी हैं, जहां परंपरा इसके बिल्कुल उलट है। यहां बेटियां घर की वारिस होती हैं और बेटे शादी के बाद अपने ससुराल चले जाते हैं। यह समुदाय पितृसत्तात्मक नहीं, बल्कि मातृसत्तात्मक समाज का पालन करता है।

खासी जनजाति – मेघालय का अनोखा समाज
खासी जनजाति भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में रहती है। इस समुदाय में लड़कियां घर की वारिस होती हैं।
संपत्ति और विरासत – खासी समाज में बेटियां अपनी मां के घर में रहती हैं और घर की सारी संपत्ति उन्हें ही मिलती है। बेटे शादी के बाद अपने ससुराल चले जाते हैं।
नाम की परंपरा – यहां बच्चों को पिता के नाम से नहीं, बल्कि मां के नाम से जाना जाता है। यानी, बच्चों के नाम के पीछे मां का सरनेम लगाया जाता है।
विदाई की परंपरा –आम हिंदू समाज में लड़कियों की विदाई होती है, लेकिन खासी समाज में लड़कों की विदाई होती है। लड़के ससुराल जाते हैं और घर के काम-काज में योगदान करते हैं, जबकि बेटियां परिवार और समाज में सक्रिय रहती हैं।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और लोग इसे खुशी-खुशी अपनाते हैं।

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भारत में अन्य मातृसत्तात्मक समुदाय
खासी जनजाति के अलावा भारत में और भी ऐसे समुदाय हैं जो मातृसत्तात्मक समाज अपनाते हैं
गारो जनजाति –गारो जनजाति भी मेघालय में रहती है। यहां मां ही परिवार की मुखिया होती है। बच्चे मां का नाम और सरनेम अपनाते हैं, और शादी के बाद बेटों की विदाई होती है।
नायर जनजाति – नायर समाज में भी महिलाएं घर की मुखिया होती हैं, जिसे ‘थरावद’ कहा जाता है। परिवार में पुरुष अलग कमरों में रहते हैं और महिलाएं परिवार का पूरा प्रबंधन करती हैं।
अन्य समुदाय – तुलुवा और बोंडा जनजातियों में भी मातृसत्तात्मक व्यवस्था देखने को मिलती है।

ये समाज दिखाते हैं कि दुनिया में हर जगह पितृसत्तात्मक परंपरा अनिवार्य नहीं है। खासी, गारो, नायर और अन्य मातृसत्तात्मक समुदायों में महिलाओं को अधिकार और सम्मान मिलता है, बेटियां घर की वारिस होती हैं, और बेटे शादी के बाद विदा होते हैं। यह हमारी समाज की विविधता और संस्कृति की विशेषता को दर्शाता है।

