Mahashivratri पर करें ये विशेष उपाय, कालसर्प और राहु दोष से मिलेगा छुटकारा

punjabkesari.in Sunday, Feb 15, 2026 - 01:30 PM (IST)

नारी डेस्क : भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पर्व ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन ग्रह दोषों को शांत करने के लिए किए गए उपाय जल्दी फल देते हैं। खासतौर पर कालसर्प दोष और राहु दोष से पीड़ित जातकों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। महाशिवरात्रि को जागृत रात्रि कहा जाता है, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है। ऐसे में भगवान शिव की उपासना करने से राहु-केतु जैसे अशुभ ग्रहों के प्रभाव को शांत किया जा सकता है। ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाने से कालसर्प दोष बनता है, जिससे जीवन में बाधाएं, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप

महाशिवरात्रि के दिन राहुकाल में महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…”का सवा लाख जाप विधिपूर्वक करने या कराने से कालसर्प और राहु दोष से मुक्ति मिलती है। जाप के अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है। इस बार रविवार को महाशिवरात्रि होने से शाम 4:30 से 6:00 बजे तक का समय विशेष शुभ माना गया है।

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चार पहर शिव अभिषेक

राहु दोष की शांति के लिए महाशिवरात्रि के दिन चार पहर शिवलिंग का अभिषेक करें। पंचामृत से अभिषेक करने और शिव पुराण का पाठ करने से राहु की महादशा का प्रभाव कम होता है।

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पंचाक्षर मंत्र और रात्रि जागरण

इस दिन रात्रि जागरण कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। पंचाक्षर मंत्र के जाप से कालसर्प दोष और राहु दोष दोनों की शांति होती है।

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चांदी के नाग-नागिन का दान

महाशिवरात्रि पर बेलपत्र पर ॐ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। साथ ही चांदी से बने नाग-नागिन के जोड़े को शिव मंदिर में अर्पित करने से कालसर्प दोष का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

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अन्न दान का विशेष महत्व

कुष्ठ रोगियों के लिए समर्पित स्थान पर अन्न का दान करने से राहु दोष शांत होता है। मान्यता है कि कुष्ठ रोग पर राहु का प्रभाव होता है, इसलिए इस दिन किया गया दान विशेष पुण्य देता है।
 


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Monika

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