ये चेतावनी संकेत कि आपके फेफड़े काम करना बंद कर रहे हैं...!

punjabkesari.in Saturday, Apr 05, 2025 - 08:27 PM (IST)

नारी डेस्कः जब भी कोई नया वायरस आता है या कोई फ्लू वायरल होता है तो उसकी चपेट में सबसे पहले ज्यादातर फेफड़े ही आते हैं क्योंकि सांस के द्वारा बैक्टीरिया सीधा फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। कोरोना के बाद अब सुपरबग नाम का वायरस भी फेफड़ों पर अटैक कर रहा है। ऐसे में फेफड़ों को हैल्दी बनाए रखना जरूरी है। 

फेफड़ों में सुपरबग क्या है?

"सुपरबग" स्यूडोमोनस एरुगिनोसा एक विशेष रूप से खतरनाक जीवाणु है, जो कई एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध करता है, और जब यह फेफड़ों में प्रवेश करता है तो खतरनाक निमोनिया और मृत्यु का कारण बनता है। बता दें कि सुपरबग वो बैक्टीरिया होते हैं जो जिन पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता यानी जब व्यक्ति को संक्रमण होता है और उसे दवा दी जाती है, तब ये बैक्टीरिया मरते नहीं, बल्कि और मजबूत हो जाते हैं। यह बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण, खून में संक्रमण, घाव में इंफेक्शन और मूत्र संक्रमण का कारण बन सकता है जो ICU, वेंटिलेटर मरीज और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक है।

फेफड़ों में समस्या होने के सामान्य लक्षण (Lung Problem Symptoms)

फेफड़ों में अगर कोई समस्या (Lung Problem) शुरू होती है तो शरीर में पहले ही इसके कई तरह के संकेत (Lung Symptoms) दिखने शुरू हो जाते हैं। इन संकेतों को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है, ताकि सही जांच और इलाज शुरू किया जा सके। अगर आपके फेफड़े परेशानी में हैं, तो आपको संघर्ष करना पड़ता है। खासकर अगर फेफड़े, कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने की कोशिश कर रहा हो। इसलिए समय रहते ही लक्षण देखना बहुत जरूरी है। चलिए उन्हीं लक्षणों के बारे में आपको बताते हैं। 
PunjabKesari

लगातार खांसी (Chronic Cough)

खांसी और कफ वाली जिद्दी खांसी, ये लंग इंफेक्शन होने का सबसे आम लक्षण है। 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी,  सूखी या बलगम वाली, सुबह या रात को ज्यादा रहने वाली खांसी।

सांस लेने में दिक्कत (Breathlessness)

अगर आम थोड़ा सा चलने या सीढ़ी चढ़ने में ही साँस फूलना महसूस करते हैं। गहरी सांस लेने में तकलीफ होती है तो फेफड़ों में दिक्कत है। दरअसल, हमारे फेफड़े सांस भरते हैं और खाली करते हैं लेकिन जब बीमार फेफड़े यह कार्य सही से नहीं करते तो आप हांफने पर मजबूर हो जाते हैं और रक्त को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती।

सीने में दर्द या जकड़न (Chest Tightness or Pain)

खांसते समय या गहरी सांस लेने पर सीने में चुभन या भारीपन का अहसास होना। हर समय जकड़न सी महसूस होना। यह फेफड़ों में सूजन या संक्रमण का संकेत हो सकता है

बलगम बनना (Excess Mucus Production)

लगातार सफेद, पीला, हरा या खून मिला बलगम निकलना। खासकर सुबह के समय ज्यादा निकलना

घरघराहट या सीटी जैसी आवाज़ (Wheezing)

सांस लेने में सीटी जैसी आवाज़ आना। कफ छाती और फेफड़ों में जमा हो सकता है। यह अस्थमा, एलर्जी या ब्रोंकाइटिस का संकेत हो सकता है

थकान और कमजोरी (Fatigue)

शरीर जल्दी थक जाना वो भी बिना मेहनत के ही थकावट और कमजोरी महसूस होना।

बुखार और ठंड लगना (Fever & Chills)

जब फेफड़ों में इंफेक्शन होती है तो व्यक्ति को बुखार आने लगता है और ठंड भी लगती है। खासकर निमोनिया या टीबी जैसी इंफेक्शन में ऐसे लक्षण दिखते हैं। 

वज़न का अचानक घटना

लंबे समय तक फेफड़ों में समस्या जैसे टीबी, कैंसर आदि में वजन तेजी से कम हो सकता है।

नीली त्वचा या होंठ (Bluish Lips or Skin)

ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठ या उंगलियों का रंग नीला पड़ सकता है। इसके पीछे की वजह फेफड़ों में किसी तरह की इंफेक्शन हो सकती है। आपकी त्वचा स्वस्थ दिखती है, क्योंकि आपके लाल रक्त कोशिकाएं आपके ऊतकों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करती हैं। नीले-भूरे होंठ, उंगलियां और पैर की उंगलियां इस बात का संकेत हैं कि शरीर के उन अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। जब त्वचा काली पड़ती है तो इसे ज्यादातर फेफड़ों की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है।

भ्रम और धुंध

मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और जब फेफड़ों द्वारा पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होती तो O2 स्तर गिर जाता है, इससे आपके विचार भ्रमित हो सकते हैं। कम ऑक्सीजन स्तर और उच्च कार्बन डाइऑक्साइड स्तर से व्यक्ति भ्रमित या थका हुआ महसूस कराता है। 
PunjabKesari

फेफड़ों के लिए कौन-कौन सी जांच करवाई जाती है?

X-ray या HRCT चेस्ट – फेफड़ों की आंतरिक स्थिति देखने के लिए

स्पाइरोमीट्री टेस्ट – फेफड़ों की सांस लेने की क्षमता नापने के लिए

ब्लड टेस्ट (CBC, ESR) – संक्रमण या सूजन की जानकारी के लिए

सपुटम टेस्ट (बलगम की जांच) – टीबी या संक्रमण का पता लगाने

ऑक्सीजन लेवल चेक (Pulse Oximeter) – शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा मापने के लिए

पीएफटी (Pulmonary Function Test) – फेफड़ों की कार्यक्षमता को जांचने का विस्तृत तरीका

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

3 हफ्ते से ज्यादा खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो।
सीने में लगातार दर्द हो।
बुखार के साथ खांसी और बलगम हो।
रात को सोते समय बार-बार सांस फूलना।
वजन तेजी से गिर रहा हो।

यह भी पढ़ेंः पैरों के तलवों में जलन से हैं परेशान तो पहले सही वजह जानें फिर इलाज करें

क्या सावधानी बरतनी जरूरी

धूम्रपान बिलकुल ना करें।
प्रदूषण से बचाव करें और मास्क लगाएं।
रोज़ाना हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें खाएं।
घर में नमी और धूल से बचाव करें।

फेफड़ा खराब होने पर आदमी कितना दिन तक जीवित रह सकता है?

यह हमेशा व्यक्ति के स्वास्थ स्थिति पर निर्भर करता है। फेफड़े खराब होने पर जीवन की अवधि महीनों से लेकर सालों तक हो सकती है हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि लंग्स की बीमारी कितनी गंभीर है और इसका इलाज कितना बेहतर मिलता है। जैसे लंग कैंसर सबसे ज्यादा खतरनाक रहता है। गंभीर मामलों में मरीज़ आमतौर पर कम समय तक जीवित रहते हैं। स्टेज 4 लंग कैंसर से पीड़ित व्यक्ति की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग एक साल होती है।

COPD के साथ लोग कई सालों तक जीवित रह सकते हैं अगर वे सही देखभाल और इलाज लेते रहे तो। 

अगर फेफड़े पूरी तरह से खराब हो जाएं तो सर्जरी या अन्य गंभीर उपचार की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

बचाव के लिए डॉक्टरी सलाह पर दवाइयां ले। पसलियों पर ज्यादा प्रेशर ना डालें और कपड़े आरामदायक और लूज पहने। धूम्रपान से बचें। 

लंग्स को हैल्दी रखने के लिए क्या खाएं

फेफड़ों (Lungs) को हेल्दी और मजबूत रखने के लिए सही खानपान बहुत ज़रूरी है। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो फेफड़ों की सफाई करने में मदद करते हैं, सूजन को कम करते हैं और श्वसन तंत्र को मज़बूत बनाते हैं।

यह भी पढ़ेंः बच्चे की बॉडी में ये संकेत दिखना Diabetes होने की निशानी

लंग्स को हेल्दी रखने के लिए क्या खाएं

हरी पत्तेदार सब्जियांः पालक, मेथी, सरसों। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होता है जो फेफड़ों से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करते हैं।

 ब्रोकली और क्रूसिफेरस सब्जियांः ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी। इनमें सूजन कम करने वाले तत्व होते हैं जो फेफड़ों को संक्रमण से बचाते हैं।

 विटामिन C युक्त फलः जैसे संतरा, आंवला, नींबू, कीवी। ये इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाते हैं और फेफड़ों में ऑक्सीजन के अवशोषण में मदद करते हैं।

 टमाटरः  टमाटर में लाइकोपीन होता है जो फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है और सूजन घटाता है।

लहसुनः इसमें एलिसिन नामक तत्व होता है जो सांस की नली को खोलता है और इंफेक्शन से लड़ता है।

हल्दी और अदरकः ये दोनों प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी हैं और फेफड़ों में जमा बलगम को साफ करने में सहायक हैं।

बेरीज़ ः ये फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और फेफड़ों को डैमेज होने से बचाते हैं।

ज्यादा पानी पिएंः फेफड़ों में बलगम अगर जमा है तो उसे पतला करने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखना ज़रूरी है। काढ़ा भी फेफड़ों के लिए हैल्दी माना जाता है। आप कोई हर्बल काढ़ा पी सकते हैं। 

इन चीजों से बचें

जंक फूड और डीप फ्राई चीजें
प्रोसेस्ड मीट (जैसे सॉसेज)
बहुत ज्यादा नमक और चीनी
स्मोकिंग या पैसिव स्मोकिंग

क्या करना जरूरी 

हर दिन प्राणायाम करें जिसमें अनुलोम-विलोम, कपालभाति जरूर हो। 
धूल और प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनें
घर में वेंटिलेशन रखें, ताजा हवा का आना ज़रूरी है

डिस्कलैमरः इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी उपलब्ध करवाना है। फेफड़ों से जुड़ी जानकारी के लिए पेशेवर डॉक्टर से बात करें। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Vandana

Related News

static