10 अक्टूबर को पितृ अमावस्या पर जरूर जलाएं दीपक, पितरों के निमित्त करें यह काम
punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 04:44 PM (IST)
नारी डेस्क: पितृ पक्ष के दौरान पितरों को याद करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इस समय लोग अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। इसी तरह आटे का चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा भी कुछ परिवारों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए दीपक जलाने से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जाती है।अगर आप भी पितरों के निमित्त यह पारंपरिक उपाय करना चाहते हैं, तो आटे से चौमुखा दीपक घर पर ही आसानी से बना सकते हैं। इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। आटा, हल्दी, काले तिल, तेल और रूई की बातियों की मदद से इसे तैयार किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी धार्मिक उपाय के फल की गारंटी नहीं होती। इसे आस्था और परंपरा के रूप में ही करना चाहिए।
आटे का चौमुखा दीपक बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
इस दीपक को बनाने के लिए आपको घर में आसानी से मिलने वाली कुछ चीजों की जरूरत होगी।
थोड़ा सा गेहूं का आटा
जरूरत के अनुसार पानी
चुटकी भर हल्दी
थोड़े से काले तिल
दीपक जलाने के लिए तेल
चार रूई की बातियां
आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री में बदलाव भी कर सकते हैं।
आटे का चौमुखा दीपक बनाने की आसान विधि
पहला चरण: आटा तैयार करें
सबसे पहले एक बर्तन में थोड़ा सा गेहूं का आटा लें। इसमें चुटकी भर हल्दी और थोड़े से काले तिल मिला दें। अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए आटा गूंध लें। ध्यान रखें कि आटा न ज्यादा सख्त हो और न ही बहुत नरम, ताकि दीपक आसानी से आकार ले सके।
दूसरा चरण: चार मुख वाला दीपक बनाएं
गूंधे हुए आटे को हाथों से दीपक का आकार दें। इसके चारों तरफ चार छोटे मुख बनाएं, ताकि उनमें बातियां रखी जा सकें। दीपक का आधार थोड़ा मजबूत रखें, जिससे तेल डालने पर वह आसानी से टूटे नहीं। जरूरत हो तो दीपक को कुछ देर सूखने दें।
तीसरा चरण: तेल और बातियां रखें
अब दीपक के बीच में थोड़ा तेल डालें। इसके चारों मुखों पर रूई की बातियां रखें। ध्यान रखें कि बातियों का एक सिरा तेल में रहे और दूसरा सिरा बाहर की तरफ हो, ताकि उन्हें आसानी से जलाया जा सके।
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चौथा चरण: श्रद्धापूर्वक दीपक जलाएं
दीपक तैयार होने के बाद उसे किसी सुरक्षित और स्थिर स्थान पर रखें। पितरों का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में मुख्य द्वार के पास दीपक रखने की मान्यता है, तो उसे वहां किसी सुरक्षित जगह पर रख सकते हैं।
चौमुखा दीपक जलाने की क्या है धार्मिक मान्यता
हिंदू परंपराओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की याद में श्राद्ध, तर्पण, दान और प्रार्थना करते हैं। दीपक जलाना भी पूजा-पाठ का एक पारंपरिक हिस्सा है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के निमित्त चौमुखा दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और जीवन की परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। हालांकि, यह आस्था से जुड़ी परंपरा है। ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि दीपक जलाने से जीवन की बाधाएं या पितृ दोष निश्चित रूप से दूर हो जाते हैं।

दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
दीपक को ऐसी जगह रखें, जहां वह आसानी से पलटे नहीं। जलते दीपक को पर्दों, कागज, सूखे फूलों और दूसरी ज्वलनशील चीजों से दूर रखें। दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें। जलते दीपक को कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें। अगर दीपक मुख्य द्वार पर रख रहे हैं, तो आने-जाने का रास्ता खुला रखें।
पितृ पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करना और उनकी स्मृति का सम्मान करना है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा और आस्था के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं।

