Cancer फैलाने वाली किचन की सबसे गंदी चीज जो लगभग सारे भारतीय इस्तेमाल कर रहे!
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 08:55 PM (IST)
नारी डेस्कः कैंसर आज ऐसी बीमारी है जो तेजी से पैर पसार रही है। इसका संबंध आपके लाइफस्टाइल से ही जुड़ा है। वहीं गंदे भोजन, पानी व प्रदूषण के चलते भी कैंसर को बढ़ावा मिल रहा है लेकिन क्या आपने सुना है कि बर्तन साफ करने वाला वॉशिंग स्पंज भी कैंसर दे सकता है। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला किचन स्पंज (Kitchen Sponge) देखने में भले ही छोटा और साधारण लगे, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, यह घर की सबसे ज्यादा गंदी चीजों में से एक हो सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि किचन स्पंज में टॉयलेट सीट से भी अधिक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि स्पंज हमेशा नमी, भोजन के कण और गर्म वातावरण के संपर्क में रहता है, जो बैक्टीरिया बढ़ने के लिए आदर्श जगह बनाता है। हाल ही में शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में जाने-माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. तरंग कृष्णा पहुंचे थे और उन्होंने इसी पर बात की।
उन्होंने इस इंटरव्यू में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़े कई अहम विषयों जैसे- कैंसर के लक्षण, बचाव, शुरुआती जांच के महत्व और इससे जुड़े मानसिक डर पर खुलकर बातचीत की। रसोई की चीजें कैंसर फैला रही है उसे लेकर भी उन्होंने पॉडकास्ट में बात की और बताया कि कैसे भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला किचन स्पंज, टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदा और बैक्टीरिया बहुत ज्यादा होते हैं।

डॉ. तरंग कृष्ण के अनुसार, कैंसर का एक कारण किचन स्पंज को भी मानते हैं। भारतीय रसोई में लगातार वॉशिग स्पंज को लगातार इस्तेमाल किया जाता है। रसोई के घर के सारे बर्तन इस स्पंज से साफ करते हैं और बाद में इसे ऐसे ही छोड़ देते हैं और फिर अगले दिन दोबारा इस्तेमाल करते हैं और ऐसे ही लगातार कई दिनों व महीनों तक इसे ही ऐसे ही इस्तेमाल करते रहते हैं जिसमें गंदगी बैक्टीरिया से भरे रहते हैं जबकि बर्तनों को साफ करने के बाद इन किचन वॉशिंग स्पंज को गर्म पानी में अच्छे से धोना जरूरी है ताकि बैक्टीरिया मर जाए। इसे रोजाना साफ करें और धूप में सुखाना ना भूलें। वहीं हर 15 दिनों बाद आपको इस वॉशिंग स्पंज को बदलना भी जरूरी रहता है।

किचन स्पंज में इतने बैक्टीरिया क्यों होते हैं?
किचन स्पंज का उपयोग बर्तन साफ करने, तेल-चिकनाई हटाने और खाने के अवशेष साफ करने के लिए किया जाता है। इस्तेमाल के बाद स्पंज अक्सर गीला ही पड़ा रहता है। यह नमी बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं को तेजी से बढ़ने का मौका देती है। खासकर भारतीय रसोई में मसाले, तेल, दूध, दाल और कच्ची सब्जियों के कण स्पंज में फंस जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया की संख्या और बढ़ जाती है।
रिसर्च क्या कहती है?
जर्मनी में हुई एक प्रसिद्ध रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल किए गए किचन स्पंज की जांच की। शोधकर्ताओं को स्पंज में करोड़ों की संख्या में बैक्टीरिया मिले। कुछ बैक्टीरिया ऐसे भी थे जो संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। रिसर्च में यह भी बताया गया कि कई बार स्पंज में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा टॉयलेट सीट से ज्यादा पाई गई। अमेरिका और यूरोप की कई स्टडी में भी यह सामने आया कि किचन स्पंज घर की सबसे दूषित वस्तुओं में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार गीला और लंबे समय तक इस्तेमाल किया गया स्पंज बैक्टीरिया का “हॉटस्पॉट” बन जाता है।
कौन-कौन से बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं?
किचन स्पंज में कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जैसे:
ई. कोलाई (E. coli)
साल्मोनेला (Salmonella)
स्टैफिलोकोकस (Staphylococcus)
कैंपिलोबैक्टर (Campylobacter)
ये बैक्टीरिया पेट दर्द, उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग और संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
टॉयलेट सीट से ज्यादा गंदा कैसे?
टॉयलेट सीट को लोग नियमित रूप से फिनाइल, डिसइंफेक्टेंट और क्लीनर से साफ करते हैं, जबकि किचन स्पंज को अक्सर केवल पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है। स्पंज की सतह में छोटे-छोटे छेद होते हैं, जहां बैक्टीरिया आसानी से छिप जाते हैं और तेजी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि कई बार स्पंज में टॉयलेट सीट से भी ज्यादा कीटाणु पाए जाते हैं।
क्या केवल धोने से स्पंज साफ हो जाता है?
सिर्फ पानी से धोने पर अधिकांश बैक्टीरिया खत्म नहीं होते। कई लोग स्पंज को साबुन से धोकर साफ समझ लेते हैं, लेकिन रिसर्च बताती है कि बैक्टीरिया स्पंज के अंदर गहराई तक छिपे रहते हैं। यहां तक कि बार-बार धोने के बाद भी उनमें तेजी से दोबारा बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं। रोज इसे गर्म पानी में उबालना जरूरी है और 10 से 15 दिनों बाद इसे बदलना भी जरूरी है।
स्पंज को सुरक्षित रखने के तरीके
स्पंज को इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह निचोड़कर सूखी जगह पर रखें।
हर 1–2 सप्ताह में स्पंज बदल दें।
बहुत ज्यादा बदबू आने लगे तो तुरंत फेंक दें।
स्पंज को गर्म पानी या माइक्रोवेव में कुछ सेकंड गर्म करके बैक्टीरिया कम किए जा सकते हैं।
कच्चे मांस या चिकन साफ करने वाले स्पंज को अलग रखें।
बर्तन और किचन स्लैब के लिए अलग-अलग स्पंज इस्तेमाल करें।
भारतीय रसोई में सावधानी क्यों जरूरी है?
भारतीय भोजन में मसाले, तेल और नमी ज्यादा होती है, जिससे स्पंज जल्दी गंदा हो सकता है। गर्म मौसम में बैक्टीरिया और तेजी से बढ़ते हैं इसलिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

