Ovarian Cancer के ये शुरुआती लक्षण अक्सर 80% महिलाएं कर देती हैं इग्नोर

punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 04:24 PM (IST)

नारी डेस्क: महिलाओं में होने वाले कैंसरों में ओवेरियन कैंसर सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है। चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य और हल्के होते हैं कि ज्यादातर महिलाएं इन्हें साधारण स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही कारण है कि ओवेरियन कैंसर को अक्सर "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसका इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है। लेकिन जागरूकता की कमी और लक्षणों को अनदेखा करने की आदत के कारण कई मामलों में इसका पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

  ये संकेत हो सकते हैं ओवेरियन कैंसर की चेतावनी

ओवेरियन कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें लगातार नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। बार-बार पेट फूलना, पेल्विक एरिया या पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, थोड़ा खाने पर भी जल्दी पेट भर जाना, भूख कम लगना और बार-बार पेशाब आने की समस्या इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण गैस, यूरिन इन्फेक्शन, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या अन्य सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन अगर ये कई हफ्तों तक लगातार बने रहें तो इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है।

PunjabKesari

क्यों महिलाएं इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं

अक्सर जब किसी महिला को बार-बार पेट फूलने या अपच जैसी समस्या होती है तो वह खानपान में बदलाव कर लेती है या गैस की दवा ले लेती है। अधिकांश लोगों के मन में यह विचार नहीं आता कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इसी वजह से ओवेरियन कैंसर के कई मामले शुरुआती अवस्था में पकड़ में नहीं आते और बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है।

पैप स्मीयर टेस्ट को लेकर है बड़ी गलतफहमी

बहुत सी महिलाओं को लगता है कि नियमित पैप स्मीयर टेस्ट कराने से ओवेरियन कैंसर का भी पता चल जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। पैप स्मीयर टेस्ट केवल सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। इसका ओवेरियन कैंसर की पहचान से सीधा संबंध नहीं होता। इस गलतफहमी के कारण कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि उनकी पूरी प्रजनन प्रणाली स्वस्थ है और वे अतिरिक्त जांच की आवश्यकता महसूस नहीं करतीं।

Ovarian Cancer के  शुरुआती लक्षण 

ओवेरियन कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसके शुरुआती लक्षण किसी गंभीर बीमारी जैसे नहीं लगते। शुरुआत में तेज दर्द, ब्लीडिंग या कोई ऐसा संकेत नहीं मिलता जिससे तुरंत खतरे का अंदाजा लगाया जा सके। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अक्सर रोजमर्रा की आम समस्याओं जैसे गैस, अपच, हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ने या मेनोपॉज के प्रभावों से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए महिलाएं इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं।ओवेरियन कैंसर के अन्य लक्षण... 

PunjabKesari

बार-बार पेट फूलना
पेल्विक (निचले पेट) में दर्द या दबाव महसूस होना
थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना
भूख में कमी आना
बार-बार या अचानक पेशाब आने की जरूरत महसूस होना
पेट में लगातार भारीपन रहना
कब्ज या पाचन संबंधी समस्याएं
बिना वजह थकान महसूस होना
कमर दर्द
वजन का अचानक घटना या बढ़ना

ये भी पढ़ें:  पंकज भदौरिया को हुआ ब्रेस्ट कैंसर! महिलाओं से की अपील, ये 3 Test जरूर करवाएं

क्या ओवेरियन कैंसर की कोई नियमित स्क्रीनिंग मौजूद है

स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राम और कोलन कैंसर के लिए कोलोनोस्कोपी जैसी नियमित स्क्रीनिंग जांच उपलब्ध हैं, लेकिन ओवेरियन कैंसर के लिए फिलहाल ऐसी कोई पूरी तरह भरोसेमंद और नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि डॉक्टर महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति अधिक सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

शरीर के संकेतों को समझना है बेहद जरूरी

हर महिला को अपने शरीर की सामान्य गतिविधियों और बदलावों को समझना चाहिए। यदि कोई परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या पहले की तुलना में बढ़ने लगती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर पेट फूलना, पेट या पेल्विक दर्द, भूख कम लगना, जल्दी पेट भर जाना या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं कई सप्ताह तक लगातार बनी रहें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 किन महिलाओं को ओवेरियन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है

कुछ महिलाओं में ओवेरियन कैंसर होने की संभावना सामान्य से अधिक होती है। ऐसे मामलों में नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से परामर्श बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में परिवार में ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास शामिल है। इसके अलावा BRCA1 और BRCA2 जैसे आनुवंशिक जीन में बदलाव भी खतरा बढ़ा सकते हैं। बढ़ती उम्र, विशेषकर मेनोपॉज के बाद का समय, और कभी गर्भधारण न करना भी जोखिम कारकों में शामिल माना जाता है।

PunjabKesari

कौन-कौन सी जांच मदद कर सकती हैं

ओवेरियन कैंसर की पुष्टि केवल एक टेस्ट से नहीं की जा सकती, लेकिन कुछ जांचें डॉक्टर को बीमारी की पहचान करने में मदद करती हैं। सबसे पहले पेल्विक एग्जाम किया जाता है, जिसमें डॉक्टर प्रजनन अंगों की स्थिति की जांच करते हैं। इसके अलावा ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड के जरिए अंडाशय की तस्वीर लेकर किसी असामान्यता का पता लगाया जाता है। CA-125 ब्लड टेस्ट भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह खून में मौजूद एक विशेष प्रोटीन के स्तर को मापता है, जो कुछ मामलों में ओवेरियन कैंसर से जुड़ा हो सकता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

ओवेरियन कैंसर एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर पहचान और उपचार से इसके खिलाफ लड़ाई आसान हो सकती है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए। छोटी-छोटी समस्याओं को बार-बार नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। सही जानकारी, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर Medicla सलाह ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

हर महिला को यह याद रखना चाहिए कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

  
 
 
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static