बेहद चमत्कारी है कश्मीर का खीर भवानी मंदिर, यहां कुंड के पानी का रंग करता है भविष्यवाणी
punjabkesari.in Monday, Jun 22, 2026 - 05:39 PM (IST)
नारी डेस्क: कश्मीरी पंडित समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहारों में से एक 'ज्येष्ठ अष्टमी' को मनाने के लिए सोमवार को मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुल्ला में स्थित माता खीर भवानी मंदिर पहुंचे। यहां तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह पहली 'आरती' के साथ ही दिनभर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इन अनुष्ठानों में विशेष पूजा, हवन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण शामिल रहे। जम्मू, दिल्ली और अन्य राज्यों से आए कई कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यहां आकर उन्हें अपनी मिट्टी और बचपन की यादें ताजा हो गई।

इस प्राचीन मंदिर का इतिहास और आस्था से जुड़ाव काफी गहरा है। देवी दुर्गा के इस मंदिर में देवी की पूजा उपासना मां रागनी के रूप में होती है। देवी खीर भवानी का यह मंदिर एक झरने के बीच में बना हुआ है जिससे चारों तरफ एक विशाल और खूबसूरत पत्थर है। इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर अपना रंग बदलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लंका नरेश रावण मां बड़ा भक्त था। मां खीर भवानी रावण की भक्ति से हमेशा ही प्रसन्न रहती थीं, लेकिन जब रावण ने माता सीता का हरण किया तब देवी रावण से रुष्ट हो गईं। देवी इतनी क्रोधित हुईं कि उन्होंने अपना स्थान ही त्याग दिया। वहीं दूसरी तरफ एक अन्य मान्यता यह भी है कि देवी ने भगवान हनुमान से मूर्ति को लंका से उठाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने को कहा, जब देवी की आज्ञा का पालन करते हुए हनुमान जी मूर्ति को लंका से निकालकर कश्मीर में स्थापित कर दिया था।

तभी से माता का स्थान कश्मीर हो गया और नियमित रूप से माता के भक्त यहां पर उनकी पूजा-आराधना करते आ रहे हैं। इस मंदिर का निर्माण महाराजा प्रताप सिंह ने साल 1912 में करवाया था और बाद में इसका जीर्णोद्धार महाराज हरि सिंह ने कराया था। मंदिर में छह कोनों वाला एक झरना है और एक सफेद संगमरमर का छोटा सा मंदिर है, जिसमें देवी की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां एक कुंड है जिसमें भरे पानी का रंग अलग-अलग मौकों पर बदलता है। और यह रंग शुभ और अशुभ का संकेत देता है। जब कुंड के पानी का रंग काला हो जाता है तो इसे अनिष्ट का संकेत माना जाता है।

बताया जाता है कि जब घाटी में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ था तब कुंड के पानी का रंग काला हो गया था। इसी तरह कोरोना काल में भी कुंड का रंग काला हो गया था। करगिल की लड़ाई के दौरान इसका रंग लाल हो गया था और धारा 370 जब हटी थी तब इसका रंग हरा हुआ था। देवी दुर्गा के इस मंदिर का नाम खीर भवानी इसलिए प्रचलित हुआ क्योंकि माता को विशेष रूप से खीर का भोग लगाया जाता है। वसंत के मौसम में खीर चढ़ाई जाती है। वहीं यहां के लोग इस मंदिर को महारज्ञा देवी, राज्ञा देवी मंदिर , रजनी देवी मंदिर और राज्ञा भवानी मंदिर के नाम से भी बुलाते हैं।

