कहीं ढोल-ताशे तो कहीं खास पकवान, देशभर में ऐसे मनाया जाता है गणेश उत्सव
punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 06:44 PM (IST)
नारी डेस्क : गणेश चतुर्थी का नाम आते ही आंखों के सामने गणपति बप्पा की खूबसूरत मूर्ति, पूजा, मोदक और उत्सव का माहौल नजर आने लगता है। देशभर में यह त्योहार बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य और क्षेत्र में इसे मनाने की परंपराएं अलग-अलग हैं। कहीं गणपति की स्थापना के साथ अनोखी सजावट की जाती है, तो कहीं खास पकवान बनाए जाते हैं। कुछ जगहों पर ढोल-ताशों की गूंज उत्सव में रंग भर देती है। आइए जानते हैं देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेश उत्सव के खास रंग...
गोवा में 'चवथ' के नाम से मनता है गणेश उत्सव
गोवा में गणेश चतुर्थी को 'चवथ' के नाम से जाना जाता है। यहां गणपति बप्पा की स्थापना के साथ घरों में खास तरह की सजावट की जाती है, जिसे 'माटोली' कहा जाता है। माटोली को सजाने के लिए फल, सब्जियां, अलग-अलग तरह की पत्तियां और प्रकृति से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। गोवा में गणपति उत्सव परिवार के साथ मनाने की परंपरा है। इस दौरान मोदक के अलावा कई स्थानीय व्यंजन भी बनाए जाते हैं। माटोली की प्राकृतिक सजावट इस त्योहार को एक अलग पहचान देती है।

तमिलनाडु में गणेश जी को कहते हैं 'पिल्लैयार'
तमिलनाडु में भगवान गणेश को 'पिल्लैयार' नाम से भी पूजा जाता है। गणेश चतुर्थी के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस मौके पर कोझुकट्टई नामक पारंपरिक पकवान का खास महत्व है, जिसे आमतौर पर मोदक के रूप में जाना जाता है। यहां गणपति की पूजा के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्रसाद का भी विशेष महत्व देखने को मिलता है।

बिहार के मिथिला में चौरचन का अलग रंग
बिहार के मिथिला क्षेत्र में गणेश चतुर्थी के आसपास चौरचन पर्व की विशेष परंपरा देखने को मिलती है। इस दिन महिलाएं परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं। शाम के समय घर के आंगन में अरिपन बनाया जाता है और चंद्रमा की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान चंद्रमा को फल, पकवान और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। चंद्र दर्शन के साथ भगवान गणेश की आराधना का भी महत्व माना जाता है। मिथिला की यह परंपरा गणेश उत्सव को एक अलग सांस्कृतिक रंग देती है।

मध्य प्रदेश में पंडाल और चलित झांकियों की धूम
मध्य प्रदेश में गणेश उत्सव के दौरान जगह-जगह गणपति की स्थापना की जाती है। बड़े-बड़े पंडालों से लेकर चौराहों तक बप्पा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। यहां उत्सव में पूजा के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी रंग देखने को मिलता है। कई जगहों पर चलित झांकियां आकर्षण का केंद्र बनती हैं। वहीं ढोल-ताशों की गूंज पूरे माहौल को भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बना देती है।
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अलग-अलग परंपराएं, एक ही आस्था
देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेश चतुर्थी मनाने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन हर जगह गणपति बप्पा के प्रति श्रद्धा और आस्था एक जैसी दिखाई देती है। कहीं माटोली की प्राकृतिक सजावट त्योहार की खूबसूरती बढ़ाती है, तो कहीं पारंपरिक पकवान और लोक परंपराएं इसे खास बनाती हैं। यही विविधता भारत के गणेश उत्सव को और भी खास बनाती है।

