रथयात्रा के बीच प्रभु जगन्नाथ से क्यों नाराज हो जाती है मां लक्ष्मी? हर साल तोड़ती हैं रथ का पहिया
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 05:32 PM (IST)
नारी डेस्क: ओडिशा का पुरी इस समय भक्ति में डूबा हुआ है । वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के तहत भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के रथों की गुंडिचा मंदिर की ओर यात्रा जारी है। जय जगन्नाथ' के जयघोष के साथ लाखों भक्त बारिश और उमस के बीच तीनों देवताओं - भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों को खींच रहे हैं। रथ यात्रा के दौरान माता के रूठने और रथ का पहिया तोड़ने की लीला बहुत ही अद्भुत व प्रसिद्ध है।

नंदीघोष रथ का तोड़ा जाता है पहिया
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ में बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ दसों अवतार का रूप धारण करते हैं। इस समय उनका व्यवहार सामान्य मनुष्यों जैसा होता है। रथयात्रा के तीसरे दिन पंचमी को लक्ष्मी जी भगवान जगन्नाथ को ढूंढ़ते यहां आती हैं। तब द्वैतापति दरवाजा बंद कर देते हैं तो वह नाराज हो जाती हैं और भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ का एक पहिया तोड़ देती हैं, ताकि वे वापस ना जा सकें। इसके बाद हेरा गोहिरी साही पुरी का एक मुहल्ला जहां लक्ष्मी जी का मन्दिर है, वहां लौट जाती हैं।
रसगुल्ले से प्रसन्न होती है मां लक्ष्मी
बाद में भगवान जगन्नाथ लक्ष्मी जी को मनाने जाते हैं। उनसे क्षमा मागकर और अनेक प्रकार के उपहार देकर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। इस दौरान भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को कईं बेशकीमती चीजें और मिठाई भेंट करते हैं, जिन्में रसगुल्ले विशेष रूप से होते हैं। काफी कोशिश के बाद देवी लक्ष्मी मान जाती हैं और ये शर्त रखती हैं आगे से ऐसी भूल नहीं होनी चाहिए। इस तरह ये रुठने-मनाने की परंपरा सालों से चली आ रही है। इस परंपरा को हेरा पंचमी कहते हैं।

हर जगह मिलता है रसगुल्ले का प्रसाद
इस आयोजन में एक ओर द्वैताधिपति भगवान जगन्नाथ की भूमिका में संवाद बोलते हैं तो दूसरी ओर देवदासी लक्ष्मी जी की भूमिका में संवाद करती है। पुरी के जगन्नाथ धाम में सिर्फ यही एक दिन होता है, जब महाप्रभु को विशेष रूप से सफेद रसगुल्ले का भोग लगता है और वह देवी लक्ष्मी के साथ इसका भोग स्वीकार करते हैं। इस दिन आपको पुरी के हर चौक-चौराहे, घर-मंदिर में बेहिसाब रसगुल्ले का प्रसाद मिलेगा।

