क्या सच में इस दिन पढ़ने से नाराज़ होती हैं मां सरस्वती? जानें सच
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 01:27 PM (IST)
नारी डेस्क : हर साल सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी के आसपास एक सवाल ज़रूर उठता है। क्या इस दिन पढ़ाई करनी चाहिए या नहीं? कई घरों में बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं कि सरस्वती पूजा के दिन किताबें नहीं खोलनी चाहिए। कुछ लोग मानते हैं कि अगर इस दिन पढ़ाई की गई, तो देवी सरस्वती नाराज़ हो जाती हैं। वहीं, कुछ का कहना होता है कि पूजा के दिन केवल पूजा-पाठ होना चाहिए, पढ़ाई नहीं। इसी वजह से बच्चों और छात्रों के मन में कन्फ्यूजन बना रहता है।
अक्सर देखा जाता है कि सरस्वती पूजा के दिन किताबें देवी की मूर्ति के नीचे रख दी जाती हैं और पूरे दिन उन्हें छुआ तक नहीं जाता। धीरे-धीरे यही परंपरा लोगों के मन में यह धारणा बना देती है कि इस दिन पढ़ना गलत है।
लेकिन सवाल यह है—क्या वाकई शास्त्रों में ऐसा लिखा है?
अगर अगले दिन परीक्षा हो और आज सरस्वती पूजा पड़े, तो क्या पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए?
क्या ज्ञान की देवी खुद अपने भक्तों को पढ़ने से मना करेंगी?
आइए, इन सभी सवालों का जवाब सही अर्थ और शास्त्रों की समझ के साथ जानते हैं।

सरस्वती पूजा से जुड़ी आम धारणा
लोगों के बीच सबसे आम धारणा यही है कि सरस्वती पूजा के दिन पढ़ना मना होता है। इसका एक कारण यह है कि इस दिन किताबों को पूजा में रख दिया जाता है और उन्हें खोला नहीं जाता। बच्चों को साफ़ शब्दों में कह दिया जाता है “आज पढ़ाई मत करो।” लेकिन सच्चाई यह है कि यह परंपरा पूरी तरह सही अर्थ में नहीं समझी गई है।
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शास्त्रों में क्या कहा गया है?
अगर शास्त्रों की बात करें, तो कहीं भी यह नहीं लिखा कि सरस्वती पूजा के दिन पढ़ाई करना गलत है। असल में यहां एक शब्द आता है—“अनध्ययन”। अधिकतर लोग इस शब्द का गलत मतलब निकाल लेते हैं। अनध्ययन का अर्थ है उस दिन वेदों का पाठ न करना। यह नियम विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो वेदों का विधिवत अध्ययन करते हैं। इसका स्कूल, कॉलेज, परीक्षा या सामान्य पढ़ाई से कोई संबंध नहीं है। लेकिन समय के साथ लोगों ने इस नियम को पूरी पढ़ाई पर लागू कर दिया, जो शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है।

छोटे बच्चों की परंपरा क्या बताती है?
सरस्वती पूजा के दिन एक बेहद सुंदर और अर्थपूर्ण परंपरा निभाई जाती है, विद्यारंभ संस्कार। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाए जाते हैं। माता-पिता उनका हाथ पकड़कर लिखना सिखाते हैं और शिक्षा की शुरुआत कराते हैं। अब ज़रा सोचिए अगर इस दिन पढ़ना गलत होता, तो बच्चों को पहली बार अक्षर क्यों लिखवाए जाते? यह परंपरा खुद साबित करती है कि सरस्वती पूजा पढ़ाई से दूर रहने का नहीं, बल्कि पढ़ाई की शुरुआत का दिन है।
अगर एग्ज़ाम हो तो क्या पढ़ना चाहिए?
मान लीजिए कल आपका एग्ज़ाम है और आज सरस्वती पूजा। ऐसे में पढ़ाई छोड़ देना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। यह सोचना कि “आज पूजा है, इसलिए मैं नहीं पढ़ूंगा” खुद के भविष्य के साथ अन्याय करना है। माता सरस्वती ज्ञान की देवी हैं। वे चाहेंगी कि उनके भक्त पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने जीवन में सफलता हासिल करें।
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पूजा और पढ़ाई में संतुलन कैसे बनाएं?
सरस्वती पूजा के दिन आप ये सरल तरीके अपना सकते हैं।
सुबह स्नान कर पूजा करें
मां सरस्वती का आशीर्वाद लें
कुछ समय के लिए किताबें पूजा में रखें
फिर श्रद्धा और मन से पढ़ाई करें
इस तरह पूजा का सम्मान भी रहेगा और पढ़ाई भी नहीं छूटेगी।

अगर कोई कहे “आज पढ़ना पाप है” तो क्या जवाब दें?
अगर कोई आपसे कहे कि सरस्वती पूजा के दिन पढ़ना पाप है, तो आप शांति से यह बात समझा सकते हैं कि शास्त्रों में केवल वेद पाठ रोकने की बात है
आम पढ़ाई पर कोई रोक नहीं है, विद्यारंभ जैसी परंपराएं पढ़ाई के पक्ष में हैं, सरस्वती पूजा और पढ़ाई का सही अर्थ सरस्वती पूजा का मतलब किताबें बंद करना नहीं, बल्कि ज्ञान का सम्मान करना है। यह दिन पढ़ाई छोड़ने का नहीं, बल्कि और श्रद्धा व एकाग्रता से पढ़ने का है। मां सरस्वती नाराज़ नहीं होतीं, बल्कि वही बच्चों और छात्रों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

