घर के दरवाजे पर बुद्ध की मूर्ति क्यों नहीं रखनी चाहिए?
punjabkesari.in Monday, Mar 30, 2026 - 03:39 PM (IST)
नारी डेस्क : आजकल घरों को सजाने के लिए अलग-अलग तरह की मूर्तियां रखना एक आम ट्रेंड बन गया है। घोड़े, मछली और भगवान बुद्ध की मूर्तियां खास तौर पर वास्तु और फेंग शुई के अनुसार शुभ मानी जाती हैं, इसलिए लोग इन्हें अपने घर में रखते हैं ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और घर सुंदर भी दिखे। खासकर भगवान बुद्ध की मूर्तियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन कई लोग बिना सही जानकारी के इन्हें घर के प्रवेश द्वार या फर्श के पास रख देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सही है? इस विषय को समझने के लिए आध्यात्मिक मान्यताओं और व्यवहारिक तथ्यों दोनों को जानना बेहद जरूरी है।
क्या फर्श या नीचे रखना अपमान है?
परम पूज्य गुरुदेव आनंदमूर्ति गुरुमां के अनुसार, बुद्ध की मूर्ति को फर्श या बहुत नीचे रखना उनकी गरिमा के विरुद्ध माना जाता है। बुद्ध ज्ञान, शांति और करुणा के प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें सिर्फ सजावट की वस्तु मानकर कहीं भी रखना उचित नहीं है। वे मानती हैं कि फेंग शुई के नाम पर बिना समझ के मूर्ति को दरवाजे या जमीन के स्तर पर रखना एक प्रकार से आध्यात्मिक अनादर हो सकता है।
फेंग शुई और आस्था के बीच सच्चाई क्या है
आधुनिक फेंग शुई और वास्तु गाइड्स भी इस बात से सहमत हैं कि, की मूर्ति को हमेशा जमीन से ऊपर और सम्मानजनक स्थान पर रखना चाहिए। इसे फर्श पर रखना या ऐसी जगह रखना जहां पैरों का संपर्क हो, असम्मानजनक माना जाता है। मूर्ति के आसपास साफ-सफाई और शांति का माहौल होना जरूरी है। हालांकि कुछ फेंग शुई परंपराओं में प्रवेश द्वार के पास बुद्ध की मूर्ति रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन उसे भी ऊंचे स्थान (eye level या उससे ऊपर) पर रखना जरूरी बताया गया है।
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बुद्ध की मूर्ति कैसे और कहां रखें
बुद्ध की मूर्ति सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रतीक है
इसे हमेशा ऊंचे, साफ और शांत स्थान पर रखना चाहिए
जमीन, जूते के पास या अव्यवस्थित जगह पर रखना गलत माना जाता है
फेंग शुई का मतलब “सम्मान और संतुलन” है, न कि अंधविश्वास।

पवित्रता और सम्मान का महत्व
बुद्ध केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और जागरूकता का प्रतीक हैं।
इसलिए उन्हें साफ और शांत स्थान पर रखें
आसपास अनावश्यक वस्तुएं न रखें
उन्हें सम्मान और श्रद्धा के साथ स्थापित करें।
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फेंग शुई हो या आध्यात्मिक परंपरा, दोनों ही यह सिखाते हैं कि बुद्ध की मूर्ति को सम्मानजनक स्थान पर रखना चाहिए। जमीन पर या लापरवाही से रखी गई मूर्ति न केवल उसकी गरिमा कम करती है, बल्कि उसके वास्तविक आध्यात्मिक महत्व को भी नजरअंदाज करती है।

