Pregnancy की शुरुआत में क्यों नहीं खाना चाहिए पपीता और पाइनएप्पल
punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 11:40 AM (IST)
नारी डेस्क: गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के जीवन का बेहद संवेदनशील दौर माना जाता है। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। यही वजह है कि प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही महिलाओं को खानपान से जुड़ी कई तरह की सलाह दी जाती हैं। इनमें सबसे आम सलाह पपीता और पाइनएप्पल से दूरी बनाए रखने की होती है। अक्सर परिवार के बड़े-बुजुर्ग, मित्र और कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ शुरुआती गर्भावस्था में इन फलों को न खाने की सलाह देते हैं। ऐसे में कई महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में पपीता और पाइनएप्पल गर्भपात का कारण बन सकते हैं या यह सिर्फ एक मिथक है।
कच्चे पपीते को लेकर क्यों रहती है सबसे ज्यादा चिंता?
गर्भावस्था में पपीते को लेकर जो सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, उसका संबंध मुख्य रूप से कच्चे या अधपके पपीते से है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे पपीते में लेटेक्स और पपेन नामक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। कुछ शोध और प्रयोगशाला अध्ययनों में यह देखा गया है कि ये तत्व गर्भाशय की मांसपेशियों को उत्तेजित कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे गर्भाशय में संकुचन (Contractions) बढ़ने की आशंका हो सकती है, जो शुरुआती गर्भावस्था में जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में हरे या अधपके पपीते के सेवन से बचने की सलाह देते हैं।

क्या पूरी तरह पका हुआ पपीता खाना सुरक्षित है?
कच्चे पपीते के विपरीत, पूरी तरह पका हुआ पपीता पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। इसमें विटामिन C, फोलेट, फाइबर और कई आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने वाली कई रिपोर्टों के अनुसार, पके हुए पपीते में लेटेक्स की मात्रा काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ सीमित मात्रा में पके पपीते के सेवन को पूरी तरह असुरक्षित नहीं मानते। हालांकि, गर्भवती महिलाओं पर इस विषय में व्यापक और निर्णायक वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी सीमित हैं। इसलिए अधिकांश डॉक्टर एहतियात के तौर पर शुरुआती गर्भावस्था में पपीते के सेवन को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं।
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पाइनएप्पल को लेकर क्यों उठते हैं सवाल
पपीते की तरह पाइनएप्पल को लेकर भी लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि इसका सेवन गर्भपात का कारण बन सकता है। इसके पीछे मुख्य वजह ब्रोमेलिन (Bromelain) नामक एंजाइम को माना जाता है, जो पाइनएप्पल में पाया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि यह एंजाइम गर्भाशय और सर्विक्स पर प्रभाव डाल सकता है तथा गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सामान्य मात्रा में पाइनएप्पल खाने और गर्भपात के बीच कोई मजबूत संबंध अब तक साबित नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में पाइनएप्पल का सेवन करे या उसकी गर्भावस्था पहले से ही किसी चिकित्सीय जोखिम की श्रेणी में आती हो।
इन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
हर गर्भावस्था एक जैसी नहीं होती। कुछ महिलाओं की प्रेग्नेंसी सामान्य होती है, जबकि कुछ को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। यदि किसी महिला का पहले गर्भपात हो चुका है, उसे गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग की समस्या है, प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क श्रेणी में है या डॉक्टर ने विशेष डाइट संबंधी निर्देश दिए हैं, तो पपीता और पाइनएप्पल जैसे फलों का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर बिना वजह डरने के बजाय संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। जहां कच्चे पपीते से बचने की सलाह दी जाती है, वहीं पके हुए पपीते और सीमित मात्रा में पाइनएप्पल के सेवन को लेकर राय अलग-अलग हो सकती है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भावस्था के दौरान कोई भी बड़ा बदलाव अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

