Raksha Bandhan 2026: सोने-चांदी की राखी बांधना सही या गलत? जानें रक्षासूत्र से जुड़े नियम
punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 05:00 PM (IST)
नारी डेस्क: रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा बेहद खास त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की रक्षा और हर मुश्किल में उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है। इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं और बाजार में भी तरह-तरह की राखियां देखने को मिल रही हैं। सोने-चांदी की राखी से लेकर रुद्राक्ष और तुलसी के मनकों वाली राखियां तक लोग अपनी पसंद के मुताबिक खरीद रहे हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में राखी को लेकर कुछ परंपराएं भी बताई गई हैं, जिन्हें कई लोग महत्वपूर्ण मानते हैं।
रक्षासूत्र को माना जाता है सुरक्षा का प्रतीक
हिंदू धार्मिक परंपरा में राखी को सिर्फ सजावटी धागा नहीं माना जाता। इसे रक्षासूत्र कहा जाता है और भाई की कलाई पर बांधते समय उसके सुख, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना की जाती है। मान्यता है कि रक्षासूत्र जितना सरल और श्रद्धा से जुड़ा हो, उसका महत्व उतना ही अधिक होता है। इसलिए राखी की कीमत या उसका दिखावा इस पर्व का मुख्य हिस्सा नहीं माना जाता।

तीन रंगों वाले रक्षासूत्र का क्या है महत्व
धार्मिक मान्यताओं में लाल, पीले और सफेद रंग के धागों से बने रक्षासूत्र को शुभ माना गया है। इन तीन रंगों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जोड़कर देखा जाता है। लाल रंग को ब्रह्मा जी, पीले रंग को भगवान विष्णु और सफेद रंग को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। अगर तीनों रंगों वाला रक्षासूत्र उपलब्ध न हो तो लाल और पीले रंग के धागे से बनी राखी भी बांधी जा सकती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और अलग-अलग परिवारों तथा परंपराओं में राखी के तरीके अलग हो सकते हैं।
राखी में चंदन को माना जाता है शुभ
कई धार्मिक परंपराओं में राखी के साथ चंदन का इस्तेमाल भी किया जाता है। चंदन को शीतलता, पवित्रता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। कुछ जगहों पर राखी में चंदन का छोटा टुकड़ा या चंदन का तिलक शामिल किया जाता है। मान्यता है कि चंदन युक्त रक्षासूत्र भाई-बहन दोनों के लिए मंगल और सौभाग्य का प्रतीक है।
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रुद्राक्ष और तुलसी वाली राखी भी कर सकते हैं पसंद
आजकल बाजार में रुद्राक्ष और तुलसी के मनकों वाली राखियां भी काफी आसानी से मिल जाती हैं। धार्मिक मान्यता में रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव और तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है। इसी वजह से कई लोग रुद्राक्ष या तुलसी से बनी राखी को आध्यात्मिक भाव से जोड़कर देखते हैं। अगर आप ऐसी राखी चुनते हैं तो इसे केवल फैशन या सजावट के बजाय अपनी श्रद्धा के अनुसार पहनाया जा सकता है।
महंगी राखी खरीदना जरूरी नहीं
रक्षाबंधन पर राखी की कीमत को लेकर किसी तरह का दबाव लेने की जरूरत नहीं है। अगर आप महंगी राखी नहीं खरीदना चाहते या खरीदना संभव नहीं है, तो साधारण मौली या कलावा भी पूरी श्रद्धा के साथ भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है। इस त्योहार में राखी की कीमत से ज्यादा महत्व उस भावना का माना जाता है, जिसके साथ बहन अपने भाई के लिए मंगलकामना करती है। इसलिए साधारण धागे की राखी भी उतनी ही खास हो सकती है।

राखी में कैसी सामग्री से बचें
राखी खरीदते समय उसके धागे और सजावटी सामग्री पर भी ध्यान देना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग ऐसी सामग्री से बनी राखी से बचते हैं, जिसे उनकी परंपरा में अशुद्ध माना जाता है। विशेष रूप से चमड़े जैसी सामग्री का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। अगर आप पारंपरिक तरीके से रक्षाबंधन मनाते हैं तो सूती या रेशमी धागे की राखी, मौली या कलावा चुन सकते हैं।
क्या सोने या चांदी की राखी बांध सकते हैं
सोने और चांदी की राखी को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं सुनने को मिलती हैं। कुछ परंपराओं में इसे रक्षासूत्र के स्थान पर प्राथमिकता नहीं दी जाती, जबकि ज्योतिषीय मान्यताओं में सोने का संबंध सूर्य और चांदी का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। अगर आप सोने या चांदी की राखी पहनाना चाहते हैं तो एक परंपरा के मुताबिक पहले भाई की कलाई पर साधारण रक्षासूत्र या मौली बांधें और उसके बाद सोने या चांदी की राखी पहनाई जा सकती है। इस तरह रक्षासूत्र की धार्मिक परंपरा भी निभ जाती है और आप अपनी पसंद की राखी भी बांध सकते हैं।

राखी से ज्यादा जरूरी है भावना
रक्षाबंधन का असली मतलब महंगी राखी, चमकदार डिजाइन या दिखावे में नहीं है। इस त्योहार की खूबसूरती भाई-बहन के बीच के प्रेम, भरोसे और एक-दूसरे के लिए की जाने वाली शुभकामना में है। इसलिए राखी चाहे साधारण मौली की हो या सोने-चांदी की, उसे बांधते समय मन में भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना होना सबसे जरूरी है। धार्मिक नियमों को मानने वाले लोग अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार रक्षासूत्र का चयन कर सकते हैं।

