बिना हिजाब गाने पर इस Singer को मिली 74 कोड़ों की सजा

punjabkesari.in Saturday, Jun 20, 2026 - 12:05 PM (IST)

नारी डेस्क : ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। देश की 29 वर्षीय गायिका Parastoo Ahmadi को बिना हिजाब पहने लाइव परफॉर्मेंस देने के मामले में अदालत ने 74 कोड़े मारने की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

अश्लील और अनैतिक कंटेंट बनाने का आरोप

ईरानी अदालत ने परस्तू अहमदी को ऑनलाइन "अश्लील और अनैतिक कंटेंट" बनाने और उसे प्रकाशित कर सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ उन पर दो वर्षों तक देश छोड़ने और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, इस कार्यक्रम से जुड़े प्रोडक्शन टीम के आठ सदस्यों और संगीतकारों को भी दोषी ठहराया गया है।

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दिसंबर 2024 की परफॉर्मेंस बनी विवाद की वजह

यह मामला दिसंबर 2024 में आयोजित एक ऑनलाइन संगीत प्रस्तुति से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब के देशभक्ति गीत "Az Khoone Javanan-e Vatan" प्रस्तुत किया था। इस परफॉर्मेंस को उनके यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया गया था, जिसे लाखों लोगों ने देखा और यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने अहमदी और कार्यक्रम से जुड़े कई कलाकारों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।

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मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी

फैसले के बाद दुनिया भर में इसकी आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल गाना गाने और बिना हिजाब के मंच पर आने के लिए इतनी कठोर सजा देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है। अमेरिका स्थित Center for Human Rights in Iran की एडवोकेसी डायरेक्टर Bahar Ghandehari ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति में अब तक कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ है।

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कानूनी विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल

मानवाधिकार वकील Moin Khajehli ने भी अदालत के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ईरानी आपराधिक कानून के तहत महिलाओं का गाना गाना, संगीत प्रस्तुत करना या संगीत तैयार करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में इन गतिविधियों को "अश्लील कंटेंट" बताकर सजा देना कानूनी रूप से भी विवादास्पद माना जा रहा है।


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Content Editor

Monika

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