कैसे 1983 की जीत के बाद लता मंगेशकर ने BCCI को आर्थिक संकट से बचाया,बदले में बोर्ड हर साल...
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 04:14 PM (IST)
नारी डेस्क: 1983 में कपिल देव की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया था। लेकिन उस समय बीसीसीआई के पास इस जीत का जश्न मनाने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष और इंदिरा गांधी सरकार के मंत्री दिवंगत एनकेपी साल्वे के सामने यह एक बड़ी चुनौती थी। उस समय भारतीय क्रिकेट आज की तरह धनवान नहीं था। खिलाड़ी मुश्किल से 20 पाउंड दैनिक भत्ता पा सकते थे। टीवी प्रसारण और विज्ञापन का बड़ा करार भी उस समय नहीं था। ऐसे में विश्व कप जीत का जश्न मनाने के लिए फंड जुटाना मुश्किल काम था।
लता मंगेशकर ने बढ़ाया मदद का हाथ
समस्या का समाधान खोजने के लिए एनकेपी साल्वे ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह डुंगरपूर से संपर्क किया। डुंगरपूर ने अपनी करीबी दोस्त और भारतीय संगीत की दिवा लता मंगेशकर से मदद मांगी। लता जी ने तुरंत हाँ कर दी और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक विशेष कन्सर्ट देने का निर्णय लिया। स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था और लता जी ने दो घंटे तक शानदार प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम से बीसीसीआई ने पर्याप्त धन जुटाया और सभी खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपए प्रदान किए गए।
खिलाड़ियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
उस समय यह रकम खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी थी। सुनील वाल्सन ने कहा कि अगर यह मदद न मिलती तो खिलाड़ियों को दौरे से मिलने वाले छोटे भत्तों और बचत के जरिए ही पैसा जुटाना पड़ता। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने केवल 5,000 या 10,000 रुपये देने का वादा किया था, जो खिलाड़ियों के लिए अपमानजनक था। बीसीसीआई ने लता जी के इस योगदान को कभी नहीं भुलाया। सम्मान के तौर पर भारत के सभी स्टेडियमों में अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए दो VIP पास हमेशा लता जी के लिए आरक्षित रहते हैं।
लता मंगेशकर का क्रिकेट के प्रति प्यार
मुंबई के वरिष्ठ खेल पत्रकार मकरंद वैंगणकर ने बताया कि लता जी और उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर ब्रेबोर्न स्टेडियम पर हमेशा टेस्ट मैच देखने आते थे। चाहे उनकी व्यस्तता कितनी भी हो, सत्तर के दशक में वे हर मैच देखने पहुंचती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था "लता दीदी हमें छोड़कर चली गईं, इस खालीपन को भरना असंभव है।"
इस तरह, लता मंगेशकर ने सिर्फ संगीत नहीं दिया, बल्कि भारतीय क्रिकेट को मुश्किल समय में आर्थिक मदद और सम्मान भी दिलाया।

