Holi 2026: यहां गुलाल नहीं! चिता की राख से खेली जाती है होली, जानें किसने शुरू की ये परंपरा
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 04:21 PM (IST)
नारी डेस्क : होली को रंगों, खुशियों और उल्लास का त्योहार माना जाता है, लेकिन देश की आध्यात्मिक राजधानी काशी (वाराणसी) में होली का स्वरूप बिल्कुल अलग है। यहां गुलाल और रंगों की जगह चिता की भस्म (राख) से होली खेली जाती है। इसे ‘मसान होली’ या ‘भस्म होली’ कहा जाता है। साल 2026 में काशी में मसान होली 28 फरवरी को मनाई जाएगी। यह परंपरा जितनी अनोखी है, उतनी ही गहरी आध्यात्मिक भावना से जुड़ी हुई भी है।
रंगभरी एकादशी से होती है होली की शुरुआत
काशी में होली का उत्सव रंगभरी एकादशी से शुरू होता है। मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे। उस दिन भक्तों ने गुलाल उड़ाकर उनका स्वागत किया। कहा जाता है कि इसी दिन बाबा विश्वनाथ ने माता पार्वती के साथ रंगों की होली खेली थी। इसके अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को भगवान शिव अपने गणों के साथ श्मशान में भस्म की होली खेलते हैं, जिसे आज मसान होली के नाम से जाना जाता है।

क्यों कहलाती है इसे मसान होली या भस्म होली?
‘मसान’ शब्द का अर्थ होता है श्मशान। इस होली में न तो रंग होते हैं और न ही पिचकारी। यहां जलती चिताओं की राख से होली खेली जाती है। इस दौरान शिव भक्त, साधु-संत और अघोरी भूत-प्रेत, गण और शिवगणों का वेश धारण करते हैं। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते हैं और वातावरण पूरी तरह वैराग्य और भक्ति में डूब जाता है। यह परंपरा इंसान को जीवन की सच्चाई का एहसास कराती है कि अंत में शरीर राख में ही बदल जाता है। मसान होली मोह-माया से मुक्ति, वैराग्य और आत्मा की अमरता का प्रतीक मानी जाती है।
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कौन खेल सकता है मसान होली?
मसान होली को भस्म होली और भभूत होली भी कहा जाता है। इसे देखने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचते हैं। इस होली में आमतौर पर साधु-संत, अघोरी और पुरुष श्रद्धालु शामिल होते हैं। परंपरा के अनुसार महिलाओं का इसमें शामिल होना वर्जित माना जाता है।

कैसे और कब शुरू हुई मसान होली की परंपरा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस अनोखी होली की शुरुआत स्वयं भगवान शिव ने की थी। रंगभरी एकादशी के दिन उन्होंने माता पार्वती के साथ गुलाल से होली खेली, लेकिन अगले दिन अपने गणों के साथ श्मशान में भस्म की होली खेली। तभी से यह परंपरा काशी में निभाई जा रही है।
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सिर्फ त्योहार नहीं, जीवन का दर्शन है मसान होली
मसान होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के सत्य को समझाने वाली आध्यात्मिक परंपरा है। यह सिखाती है कि इंसान को अपने अहंकार, लालच और मोह से ऊपर उठकर जीवन के अंतिम सत्य को स्वीकार करना चाहिए।

