क्या हाई ब्लड प्रेशर से दिमाग में blood clots बन सकते हैं?
punjabkesari.in Thursday, Feb 27, 2025 - 01:25 PM (IST)
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नारी डेस्क: हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकता है? हाई ब्लड प्रेशर से दिमाग में खून के थक्के (blood clots) बनने का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे स्ट्रोक या अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि कैसे हाई बीपी दिमागी सेहत पर असर डाल सकता है और इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
कैसे होता है ब्रेन हेमरेज?
हाई ब्लड प्रेशर की वजह से दिमाग की नसों की दीवारों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इस कारण रक्त वाहिकाएं संकीर्ण, सख्त हो जाती हैं और इनमें प्लाक जमा होने लगता है। यह थक्के बनने की आदर्श स्थिति तैयार करता है। जब इन संकुचित नसों में खून का थक्का बनता है, तो यह दिमाग में रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। जो ब्रेन हेमरेज का कारण बनता हैं।
ब्लीडिंग स्ट्रोक का खतरा
गंभीर मामलों में, उच्च रक्तचाप मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर सकता है, जिससे वे फट सकती हैं और रक्तस्रावी स्ट्रोक हो सकता है। यह स्थिति बहुत खतरनाक हो सकती है और जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है।
कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी का असर
हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बढ़ना दिमाग पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है। बढ़ता हुआ दबाव दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है और इससे ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया, अल्जाइमर जैसी समस्याएं भी दिमाग से जुड़ी समस्याओं के रूप में सामने आ सकती हैं। खराब जीवनशैली और खानपान के कारण हाई बीपी की समस्या बढ़ सकती है, जो दिमाग पर दबाव डालती है।
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ब्रेन हेमरेज का खतरा और हाई बीपी
हाई बीपी के कारण ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ता है, और इससे व्यक्ति की जान को भी खतरा हो सकता है। ब्रेन हेमरेज के दौरान दिमाग में खून बहने लगता है, जो स्ट्रोक के समान होता है। हाई बीपी से रक्त वाहिकाएं कमजोर हो सकती हैं, जिससे उनका फटना और खून का रिसाव हो सकता है।
हाई बीपी के प्रभाव
एक आंकड़े के मुताबिक, 95 प्रतिशत ब्रेन हेमरेज के मामले हाई ब्लड प्रेशर के कारण होते हैं। इसलिए नियमित रूप से बीपी की जांच कराना बहुत जरूरी है ताकि यह खतरनाक स्तर तक न पहुंच जाए। खासकर उन लोगों को ध्यान रखना चाहिए जिनकी उम्र 40 साल से अधिक हो। यदि बीपी के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और शुगर का स्तर भी बढ़ जाए, तो यह स्थिति और भी जोखिमपूर्ण हो सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना बहुत खतरनाक हो सकता है। यह दिमाग के रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है, जिससे थक्के, स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसीलिए, हाई बीपी के मरीजों को समय-समय पर अपनी सेहत की जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह से इलाज करना चाहिए।