बिना सरकारी मंजूरी नहीं होगा दवाओं का प्रचार! केंद्र सरकार ला रही सख्त नियम
punjabkesari.in Friday, Oct 09, 2026 - 06:57 PM (IST)
नारी डेस्क : दवाओं के विज्ञापन और उनके प्रचार को लेकर केंद्र सरकार नियम सख्त करने की तैयारी में है। सरकार का उद्देश्य ऐसी दवाओं के अनधिकृत प्रचार पर रोक लगाना है, जिन्हें डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही बेचा जाना चाहिए। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के तहत अब केवल दवा बनाने वाली कंपनियां ही नहीं, बल्कि दवाओं की बिक्री, स्टॉक और वितरण करने वाले लाइसेंसधारक भी विज्ञापन संबंधी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं का विज्ञापन करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
दवाओं के विज्ञापन को लेकर क्या है सरकार का प्रस्ताव?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को गजट अधिसूचना G.S.R. 861(E) के जरिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसके तहत नियम 65 में उप-नियम (22) जोड़ने का प्रस्ताव है। इस बदलाव के जरिए दवाओं को बेचने, स्टॉक करने, बिक्री के लिए प्रदर्शित करने, बिक्री की पेशकश करने या वितरण करने का लाइसेंस रखने वाले लोगों और संस्थानों को भी विज्ञापन संबंधी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की तैयारी है। इनमें खुदरा दवा विक्रेता, थोक विक्रेता और वितरक शामिल हो सकते हैं। फिलहाल मौजूदा प्रावधानों के तहत दवा बनाने वाली कंपनियों पर इन दवाओं के विज्ञापन को लेकर प्रतिबंध लागू हैं। सरकार का मानना है कि दवाओं की बिक्री और वितरण से जुड़े लाइसेंसधारकों को भी स्पष्ट रूप से इन नियमों के दायरे में लाने से नियामक व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

किन दवाओं के विज्ञापन पर लागू हो सकते हैं नए नियम?
प्रस्तावित बदलाव में ड्रग्स रूल्स के शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं को रखा गया है। ये ऐसी दवाएं हैं, जिनकी बिक्री निर्धारित नियमों और चिकित्सकीय पर्चे से जुड़ी शर्तों के अनुसार की जाती है। इन श्रेणियों में कुछ एंटीबायोटिक्स और अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाएं शामिल हैं। शेड्यूल X में कुछ ऐसी दवाएं भी आती हैं, जिनकी बिक्री, रिकॉर्ड रखने और वितरण को लेकर विशेष नियंत्रण लागू होते हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना जरूरी है। बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य विज्ञापन संबंधी प्रतिबंधों को दवाओं की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े अन्य लाइसेंसधारकों तक भी स्पष्ट रूप से लागू करना है।
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क्या अब दवा दुकानदार भी नहीं कर पाएंगे प्रचार?
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, संबंधित श्रेणियों की दवाओं का विज्ञापन करने पर प्रतिबंध का दायरा खुदरा और थोक विक्रेताओं तथा वितरकों तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे लाइसेंसधारकों को भी केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इन दवाओं का विज्ञापन करने से रोका जा सकेगा। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मसौदा अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे अंतिम रूप दिए जाने और लागू होने से पहले संबंधित प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसलिए फिलहाल इसे लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए।

ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में उठा था मुद्दा
दवाओं के विज्ञापन से जुड़े इन प्रावधानों पर ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की 93वीं बैठक में भी चर्चा हुई थी। यह बैठक 16 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। बैठक में दवाओं की बिक्री और वितरण का लाइसेंस रखने वाले लोगों तथा संस्थानों के विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिए उचित प्रावधानों की जरूरत पर विचार किया गया। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मौजूदा नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार किया। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दवाओं के विज्ञापन को लेकर नियमों में मौजूद कमी को दूर करना और दवा बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ बिक्री तथा वितरण से जुड़े कारोबारियों पर भी स्पष्ट प्रतिबंध लागू करना है।
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सरकार ने आम लोगों से मांगे सुझाव और आपत्तियां
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां मांगी हैं। मसौदे के अनुसार, गजट में नियमों की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां भेजी जा सकती हैं। निर्धारित अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार संशोधन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

