सोने-चांदी के दामों को लेकर चौंकाने वाला दावा, 2027 के आंकड़े कर देंगे हैरान!
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 05:22 PM (IST)
नारी डेस्क : सोना हमेशा से भारतीय लोगों के लिए भरोसेमंद निवेश रहा है, लेकिन चांदी का महत्व भी कम नहीं है। जहां सोना ज्यादातर लोग संभालकर अलमारी में रखते हैं, वहीं रोज़ पहनने और इस्तेमाल के लिए चांदी को ज्यादा पसंद किया जाता है। अब तक सोने के दाम चांदी से कहीं ज्यादा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर बदल सकती है। BMO Capital Markets की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में चांदी के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं और सोने-चांदी की कीमतें ऐसी ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं, जिसकी आज कल्पना करना भी मुश्किल है।
2027 तक सोने-चांदी की कीमतों में संभावित ‘विस्फोट’
BMO Capital Markets की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2027 तक सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 8,650 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वहीं चांदी 220 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती है। अगर इन आंकड़ों को भारतीय बाजार के नजरिए से देखें, तो 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। चांदी 7.20 लाख रुपये प्रति किलो के पार जा सकती है। यह अनुमान मौजूदा कीमतों के मुकाबले कई गुना अधिक है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।

आखिर क्यों आसमान छुएंगे सोने-चांदी के दाम?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे कई बड़े वैश्विक कारण हैं। दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता। अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड मार्केट में निवेशकों का घटता भरोसा। सरकारी बैलेंस शीट्स पर बढ़ता दबाव। जापान समेत कई देशों के बाजारों में जारी उथल-पुथल। जब कागजी मुद्रा पर भरोसा कमजोर होता है, तब निवेशक सेफ हेवन यानी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।
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सोने से भी तेज दौड़ेगी चांदी
इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला पहलू चांदी को लेकर किया गया अनुमान है। BMO का मानना है कि आने वाले समय में चांदी सिर्फ एक औद्योगिक धातु नहीं रहेगी। बल्कि सोने से भी बेहतर निवेश विकल्प बनकर उभरेगी। अनुमान के मुताबिक 2026 के अंत तक चांदी 160 डॉलर प्रति औंस। 2027 के अंत तक 220 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह चांदी के इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा।

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इन शर्तों पर टिकी है यह बड़ी भविष्यवाणी
BMO Capital Markets के अनुसार, यह अनुमान तभी साकार होगा जब दुनिया भर के केंद्रीय बैंक हर तिमाही औसतन 80 लाख औंस सोना खरीदते रहें। Gold ETF में निवेशकों की मजबूत एंट्री बनी रहे। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी जारी रहे। अन्य निवेश विकल्पों से मिलने वाला रिटर्न कमजोर बना रहे। अगर ये हालात बने रहते हैं, तो सोने-चांदी को ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने से कोई नहीं रोक पाएगा। यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में कीमती धातुएं निवेश की दुनिया में बड़ा रोल निभा सकती हैं।

