Janmashtami 2026: एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां मां देवकी की गोद में विराजमान हैं बाल-कृष्ण

punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 04:40 PM (IST)

नारी डेस्क : जन्माष्टमी के मौके पर देशभर के कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भगवान श्रीकृष्ण के कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं उन्हें खास बनाती हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर गोवा के मार्सेल में स्थित है, जहां भगवान कृष्ण को उनकी माता देवकी के साथ बाल रूप में खड़े हुए दर्शाया गया है। मंदिर की यही अनोखी प्रतिमा इसे दूसरे कृष्ण मंदिरों से अलग पहचान देती है। गोवा को आमतौर पर समुद्र, बीच और नाइटलाइफ के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है देवकी कृष्ण रावलनाथ मंदिर, जहां मां देवकी और बाल-कृष्ण की एक अनोखी प्रतिमा स्थापित है।

कहां स्थित है देवकी कृष्ण रावलनाथ मंदिर?

देवकी कृष्ण रावलनाथ मंदिर गोवा के मार्सेल क्षेत्र में स्थित है। यह पणजी के कदंबा बस स्टैंड से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है। मंदिर को पिस्सो रावलनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में विशेष उत्सव और धार्मिक आयोजन होते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां गर्भगृह में स्थापित माता देवकी और बाल-कृष्ण की प्रतिमा है। यहां भगवान श्रीकृष्ण को उनकी माता देवकी के साथ बाल रूप में दिखाया गया है। प्रतिमा में बाल-कृष्ण को माता देवकी के पैरों के बीच खड़े हुए दिखाया गया है। दोनों की प्रतिमाएं काले पत्थर से बनी हुई बताई जाती हैं। कृष्ण को उनकी माता के साथ इस तरह दर्शाने की परंपरा मंदिर की सबसे खास पहचान मानी जाती है।

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क्या है मंदिर का इतिहास?

देवकी कृष्ण मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना और दिलचस्प बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, मंदिर का मूल स्थान चोडन (चोराओ) द्वीप पर था, जो मांडोवी नदी में स्थित है। पुर्तगाली शासन के दौर में पुराने मंदिर को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद मंदिर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 16वीं शताब्दी के दौरान मंदिर को कई बार स्थानांतरित किया गया और अंत में इसे मार्सेल में वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया। बाद में 1842 में मंदिर का पुनर्निर्माण भी कराया गया। लंबे इतिहास और अलग-अलग दौर में हुए बदलावों की वजह से मंदिर की वास्तुकला भी गोवा के कई पारंपरिक मंदिरों से अलग दिखाई देती है।

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मंदिर में किन देवी-देवताओं के होते हैं दर्शन?

गर्भगृह में माता देवकी और बाल-कृष्ण की प्रतिमा के अलावा कई अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है। मंदिर परिसर में भौमिका देवी, लक्ष्मी रावलनाथ, मल्लिनाथ, कात्यायनी देवी और धाडा शंकर जैसे देवी-देवताओं के दर्शन भी किए जा सकते हैं। इस वजह से यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है।

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जन्माष्टमी पर बढ़ जाती है मंदिर की रौनक

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है और इस मौके पर कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। देवकी कृष्ण रावलनाथ मंदिर में भी इस दौरान भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। अगर आप जन्माष्टमी के दौरान गोवा घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो समुद्र और बीच के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। मां देवकी और बाल-कृष्ण की अनोखी प्रतिमा इस मंदिर को गोवा के खास धार्मिक स्थलों में शामिल करती है।


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Monika

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