ग्लोबल स्लीप सर्वे 2026: महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा अनिद्रा, अपनों की चिंता छीन रही नींद

punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 11:17 AM (IST)

नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसका असर महिलाओं पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। ‘ग्लोबल स्लीप सर्वे 2026’ के मुताबिक, भारत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक अनिद्रा (Insomnia) का सामना कर रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है परिवार की जिम्मेदारियां, मानसिक तनाव और लगातार चलने वाली चिंता। महिलाएं अक्सर अपने परिवार, बच्चों और घर की जिम्मेदारियों के बारे में ज्यादा सोचती हैं, जिससे उनका दिमाग शांत नहीं हो पाता और नींद प्रभावित होती है।

 आंकड़ों में समझें स्थिति

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में करीब 38% महिलाएं नींद की कमी की शिकायत करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 29% है। यानी महिलाओं में अनिद्रा की समस्या लगभग 9% ज्यादा है। वैश्विक स्तर पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहां 48% महिलाएं और 42% पुरुष अच्छी नींद नहीं ले पाने की बात कहते हैं। इसके अलावा, दुनियाभर में 52% महिलाएं और 46% पुरुष हफ्ते में कम से कम एक या दो रात पूरी तरह सो नहीं पाते। यह साफ दिखाता है कि नींद की समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक चिंता बन चुकी है।

इन 7 कारणों से महिलाओं की नींद नहीं हो पाती पूरी

 कितनी नींद ले पा रहे हैं भारतीय?

अच्छी सेहत के लिए रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है, लेकिन भारत में यह सपना जैसा बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औसतन लोग सिर्फ 6 घंटे 35 मिनट ही सो पा रहे हैं। अगर दूसरे देशों से तुलना करें, तो ब्रिटेन में लोग औसतन 7 घंटे 22 मिनट, अमेरिका में 7 घंटे 6 मिनट और चीन में 6 घंटे 43 मिनट सोते हैं। वहीं जापान में सबसे कम औसत नींद 5 घंटे 52 मिनट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि भारत भी पर्याप्त नींद लेने के मामले में पीछे चल रहा है।

नींद की कमी के पीछे क्या हैं कारण?

नींद पूरी न होने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण तनाव है, जिसकी वजह से 39% लोगों की नींद प्रभावित होती है। इसके बाद काम का दबाव (37%) और घरेलू जिम्मेदारियां (31%) भी बड़ी वजह हैं। महिलाओं के मामले में घरेलू जिम्मेदारियां और भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा होने के कारण उनकी नींद ज्यादा प्रभावित होती है। वे अक्सर खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता करती हैं, जिससे उनका मानसिक संतुलन और नींद दोनों प्रभावित होते हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

नींद की कमी का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। सर्वे के अनुसार, 39% लोग अगले दिन खुद को ज्यादा तनावग्रस्त महसूस करते हैं, जबकि 35% लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। कामकाजी लोगों पर इसका असर और भी ज्यादा दिखाई देता है। करीब 71% लोगों का मानना है कि नींद की कमी उनकी एकाग्रता और काम करने की क्षमता को कम कर देती है। इतना ही नहीं, 77% लोग खराब नींद के कारण कभी न कभी बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी भी लेते हैं।

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जागरूकता है, लेकिन आदत नहीं

दिलचस्प बात यह है कि भारत में 44% लोग मानते हैं कि अच्छी नींद लंबी उम्र के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी सही डाइट और एक्सरसाइज। इसके बावजूद, 53% भारतीय हफ्ते में सिर्फ 4 रात या उससे भी कम अच्छी नींद ले पाते हैं। यानी लोग नींद के महत्व को समझते तो हैं, लेकिन अपनी दिनचर्या में उसे सही जगह नहीं दे पा रहे हैं।

एक अलग सच: अंगदान में महिलाएं आगे

सर्वे में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार, अंगदान करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। पांच में से तीन से चार डोनर महिलाएं होती हैं। वहीं दूसरी ओर, अंग प्राप्त करने वालों में पांच में से चार पुरुष होते हैं। यह आंकड़ा समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके त्याग को भी दर्शाता है।

आसान शब्दों में समझें पूरी बात

अगर इस पूरी रिपोर्ट को सरल भाषा में समझें, तो महिलाओं की नींद पर सबसे ज्यादा असर उनकी जिम्मेदारियों और मानसिक तनाव का पड़ रहा है। वे परिवार और रिश्तों को लेकर ज्यादा संवेदनशील होती हैं, जिससे उनका मन शांत नहीं रह पाता। नींद की कमी धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी नींद को प्राथमिकता दें, तनाव कम करें और एक संतुलित दिनचर्या अपनाएं, ताकि बेहतर जीवन जी सकें।  


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Content Editor

Priya Yadav

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