हाथ-पैर की नब्ज गायब! लड़की को थी दिल की अजीब बीमारी,रिपोर्ट देख डॉक्टर भी हैरान

punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 12:10 PM (IST)

नारी डेस्क:  कानपुर के रेजेंसी हॉस्पिटल में डॉक्टर शशांक त्रिपाठी और उनकी टीम ने नेपाल की 22 वर्षीय युवती का एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग का सफल इलाज किया। इस लड़की को जन्म से ही जटिल दिल की समस्या थी, जिसे सामान्य तरीके से ठीक करना संभव नहीं था।

मरीज को थे लंबे समय से परेशान करने वाले लक्षण

मरीज को लंबे समय से तेज सिरदर्द, सिर में भारीपन और पूरे शरीर में कमजोरी जैसी समस्याएं हो रही थीं। जब डॉक्टरों ने उसका जांच किया, तो उन्होंने एक अजीब चीज़ देखी गर्दन में नब्ज बहुत तेज थी, लेकिन हाथ और पैरों में नब्ज पूरी तरह गायब थी। इसका मतलब था कि शरीर की मुख्य धमनी (एओर्टा) में गंभीर रुकावट थी और रक्त शरीर के निचले हिस्सों तक नहीं पहुंच पा रहा था।

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एडवांस जांच में सामने आई जटिलता

इसके बाद मरीज की सीटी एंजियोग्राफी और अन्य आधुनिक जांचें की गईं। जांच में यह पता चला कि रक्त वाहिकाओं की बनावट सामान्य नहीं थी और कई असामान्य कनेक्शन मौजूद थे। इस जटिल संरचना के कारण सामान्य सर्जरी या कैथेटर से इलाज करना संभव नहीं था।

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दुनिया में गिने-चुने मामलों में की जाने वाली सर्जरी

डॉक्टरों ने तय किया कि मरीज के लिए एक खास बायपास सर्जरी करनी होगी। इसमें छाती से शरीर के निचले हिस्सों तक रक्त पहुंचाने के लिए नया रास्ता बनाया गया। इसके लिए पेट में ग्राफ्ट लगाया गया, जिससे ब्लड फ्लो सुरक्षित तरीके से नीचे के अंगों तक पहुंच सका। यह तकनीक दुनिया में बहुत कम मामलों में अपनाई जाती है।

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सर्जरी के बाद शानदार नतीजा

सर्जरी के बाद मरीज के हाथ और पैरों में नब्ज सामान्य रूप से महसूस होने लगी। उसका ब्लड प्रेशर भी सामान्य हो गया। सिरदर्द, भारीपन और कमजोरी जैसे सभी लक्षण पूरी तरह ठीक हो गए। मरीज की रिकवरी बिना किसी जटिलता के हुई और सर्जरी के चौथे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

दुर्लभ बीमारियों में भी उम्मीद की किरण

यह केस दर्शाता है कि सही समय पर जांच, एडवांस सर्जिकल तकनीक और मरीज के अनुसार बनाई गई ट्रीटमेंट प्लानिंग से सबसे दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोगों का भी सफल इलाज संभव है। इस सफलता ने मरीज के लिए नई जिंदगी लाई और मेडिकल साइंस में विशेषज्ञता और नवाचार की ताकत को भी साबित किया।
  
   

 


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Content Editor

Priya Yadav

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