संघर्षों से भरी जिंदगी, टूटे रिश्ते, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, जानें कैसे आशा भोसले ने बनाई अलग पहचान!

punjabkesari.in Sunday, Apr 12, 2026 - 02:00 PM (IST)

नारी डेस्क : मायानगरी को यूं ही ‘माया नगरी’ नहीं कहा जाता यहां जो दिखता है, उसके पीछे की कहानी अक्सर बेहद अलग होती है। आशा भोसले ने छोटी उम्र में ही अपनी सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी। अपनी बहन लता मंगेशकर की राह पर चलते हुए उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। करीब 82 साल के करियर में उन्होंने 12,000 से ज्यादा गाने गाए और कई भाषाओं में अपनी आवाज दी। पर हमारे बीच अब भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले नहीं रही। उनका 12 अप्रैल को उम्र नें निधन हो गया है। बता दें की उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने पर 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार सांस लेने की थी दिक्कत के कारण 92 साल की उम्र में हुआ निधन हो गया है।  

आवाज की मलिका, संघर्षों से भरी जिंदगी

आशा भोसले का नाम सुनते ही हर किसी के मन में उनकी मधुर आवाज गूंज उठती है। उन्होंने न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि 20 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाकर अपनी अलग पहचान बनाई। 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले एक संगीत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध गायक थे, जबकि उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर भी संगीत जगत की महान हस्ती रहीं। कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी आ गई, ऐसे में आशा ने छोटी उम्र से ही गाना शुरू कर दिया और संघर्षों के बीच अपनी पहचान बनाई।

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निजी जिंदगी में दर्द और संघर्ष

आशा जी ने 16 साल की उम्र में ही शादी करने का फैसला कर लिया था और इसी वजह से दोनों बहनों में लड़ाई हुई थी। लंबे समय तक दोनों ने बात नहीं की थी। दरअसल, आशा का दिल अपनी बहन लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी गणपतराव भोसले पर आया था। वह उनका सारा काम संभालता था। इसी दौरान आशा को गणपतराव से प्यार हो गया लेकिन शादी के लिए घरवाले तैयार नहीं थे। ऐसे में उन्होंने 16 साल की उम्र में 31 साल के गणपतराव से भागकर शादी कर ली थी लेकिन बावजूद इसके ये रिश्ता नहीं चला।

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आशा के इस शादी से 2 बच्चे थे, हेमंत और वर्षा और तीसरी बार वह प्रेग्नेंट थी लेकिन पति ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। दोनों बच्चों को साथ वह मायके वापिस आ गई। इस शादी के चलते दोनों बहनों के बीच दूरियां आ गई थी। इस बारे में लता जी ने कहा था कि ये रिश्ता उनकी छोटी बहन के लिए ठीक नहीं होगा और ऐसा हुआ भी। गणपतराव से अलग होने के बाद आशा ने आर.डी.बर्मन से शादी की हालांकि लता मंगेशकर और आशा भोंसले के बीच की दूरी फिर भी खत्म नहीं हुई। आर.डी.बर्मन भी पहले से शादीशुदा थे और पहली पत्नी से तलाक ले चुके थे। आशा और बर्मन साहब संगीत के जरिए एक दूसरे से मिले थे और 6 साल छोटे आर.डी.बर्मन ने आशा ताई को शादी के लिए प्रपोज किया था लेकिन वह भी दुनिया को अलविदा कह गए।

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सिंगिंग के साथ कुकिंग का भी शौक

आशा सिर्फ अच्छी सिंगर ही नहीं बल्कि कुकिंग का शौक भी रखती हैं। बॉलीवुड में ऐसी कई सेलेब्रिटी हैं, जो आशा ताई से अक्सर कढ़ाई गोश्त और बिरयानी की डिमांड करते हैं। अपने इसी हुनर के बारे में बात करते हुए आशा जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर गायिकी में उनका करियर उड़ान नहीं लेता तो वे कुक बन जातीं। आशा भोंसले अपना रेस्टोरेंट बिजनेस भी चलाती है। उनके दुबई,दोहा, बहरीन,आबु-धाबी और कुवैत में आशाज नाम के रेस्टोरेंट हैं। जहां पारंपरिक उत्तरी-पश्चिमी भारतीय खाना विशेष रूप से उपल्ब्ध है।

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करियर में बनाई अलग पहचान

बच्चों की बात करें तो आशा के तीन बच्चे हैं। वह कभी नहीं चाहती थी उनके बच्चे  म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बने क्योंकि उन्होंने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ भी पक्का नहीं है लेकिन उनका बेटा म्यूजिक डायरेक्टर बन गया हो, लेकिन इंडस्ट्री लक से चलती है। कभी भी कोई नया इंडस्ट्री में आए तो आपको भुला दिया जाता है। पर बदकिस्मती से कैंसर के चलते आशा के बेटे हेमंत का निधन हो गया और बेटी वर्षा ने भी सुसाइड कर लिया था। दो जवान बच्चों की मौत देखना, किसी भी मां को अंदर ही अंदर खत्म कर देता है और ये गम  आशा भोसले ने  झेला है ।  

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खबरें थी कि वर्षा 4 साल पहले भी नींद की गोलियां खा कर आत्‍महत्‍या की कोशिश कर चुकी थीं। उस समय यह बात सामने आई थी कि वर्षा मोटापे की समस्या से जूझ रही हैं और इसके चलते उन्हें डिप्रेशन समेत कई तरह की बीमारियां हैं। उनका सबसे छोटा बेटा आनंद फिल्म प्रोड्यूसर रह चुका है। बता दें की आशा भोसले को शुरुआत में उन्हें अक्सर ऐसे गाने दिए जाते थे जिन्हें अन्य गायक ठुकरा चुके होते थे, लेकिन आशा भोसले ने अपनी आवाज से उन्हें भी सुपरहिट बना दिया। उन्होंने फिल्म चुनरिया से अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी अलग गायकी शैली के कारण इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बना ली। आज भी उनकी आवाज उतनी ही लोकप्रिय है।

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कई बड़े पुरस्कार अपने नाम

1979 में आशा भोसले ने फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्वगायक पुरस्कार जीता। कुल मिलाकर उन्हें इस पुरस्कार के लिए 18 बार नामांकित किया गया जिसमें उन्होंने 7 बार जीत हासिल की। उनकी मेहनत और योगदान के लिए 2001 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया। इसके अलावा आशा को भारत सरकार ने पद्म विभूषण जैसे बड़े पुरस्कार से नवाजा है, जो देश के सबसे बड़े सम्मान में से एक है. उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी मिला, जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है.12,000 से ज्यादा गानों के साथ उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया, जो साबित करता है कि उन्होंने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़ी हस्तियों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर पहले चिंता जताई थी। अब उनके निधन के बाद पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है।


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Content Editor

Monika

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