सावधान! 18 फरवरी से होलाष्टक शुरू,छोटे बच्चों के लिए बरतें ये सावधानियां

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 03:16 PM (IST)

 नारी डेस्क: होलाष्टक हिन्दू पंचांग में एक विशेष पवित्र समय माना जाता है। होलाष्टक के इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए छोटे बच्चों वाले माता-पिता को इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। वीडियो में बताए गए इन 5 नियमों का पालन ज़रूर करें।

 शाम का समय: बाहर खेलने से बचें

होलाष्टक के दौरान शाम का समय विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। बच्चे इस समय बाहर खेलते हैं तो उन्हें चोट लगने या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ सकता है। शाम के समय बच्चों को घर में ही खेलाएं या सुरक्षित इनडोर एक्टिविटी करवाएं।

सुरक्षा कवच: लहसुन की कली रखें

वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, लहसुन नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाने का काम करता है। दि बच्चा बाहर जा रहा है, तो उसकी जेब में एक लहसुन की कली रखें। इससे बच्चे को सुरक्षा की अनुभूति होती है और बुरी ऊर्जा से बचाव होता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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बच्चों के कपड़े बाहर न छोड़ें

होलाष्टक के दौरान रात में कपड़े बाहर रखने से नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है। रात में बच्चों के कपड़े घर के अंदर सुखाएं और बाहर न छोड़ें। यह न केवल वास्तु के अनुसार सही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी कपड़े साफ और सुरक्षित रहते हैं।

 मीठी चीज़ों के प्रति सतर्क रहें

बच्चों को अनजाने में दी जाने वाली मीठी चीज़ें कभी-कभी नुकसानदेह भी हो सकती हैं। होलाष्टक में बच्चों को अनजान लोगों से मीठी चीज़ न लेने दें और न ही खिलाएं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, बल्कि बच्चों को बुरी नजर से भी बचाया जा सकता है।

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रात में चौराहा पार करते समय सावधानी

रात में सड़क या चौराहा पार करते समय बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। वास्तु के अनुसार भी रात में क्रॉसिंग जोखिम भरा समय होता है।बच्चों को अकेले बाहर न भेजें। हमेशा बड़े या अभिभावक के साथ ही सड़क पार करें। संभव हो तो रात में चौराहा और खाली सड़क से बचें। बच्चों को रात में जल्दी सोने दें ताकि उनकी इम्यूनिटी मजबूत रहे। अगर बच्चे बाहर जाते हैं, तो उन्हें हल्का और ढका हुआ कपड़ा पहनाएं। खेल-खेल में बच्चों को छोटी चीजें जैसे सिक्के, पेन, खिलौने आदि कान, नाक या मुंह में डालने से रोकें।

होलाष्टक के दौरान बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऊपर बताई गई सरल उपायों से न केवल वास्तु के अनुसार बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और मानसिक सुरक्षा भी मिलती है। माता-पिता और परिवार के सदस्य इन सावधानियों को अपनाकर बच्चों की रक्षा कर सकते हैं और उनके लिए सुरक्षित वातावरण बना सकते हैं।

  


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Content Editor

Priya Yadav

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