अचानक 150 पार पहुंच जाता है BP तो जानें इसे कंट्रोल करने के सही तरीके

punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 05:33 PM (IST)

नारी डेस्क : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, खानपान की गलत आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों की शिकायत होती है कि उनका बीपी अचानक बढ़कर 150 के पार पहुंच जाता है और इसके बाद उन्हें घबराहट, बेचैनी या सिर भारी होने जैसा महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग डर जाते हैं और समझ नहीं पाते कि उन्हें क्या करना चाहिए। हालांकि, ब्लड प्रेशर का 150 तक पहुंचना हर बार इमरजेंसी की स्थिति नहीं होता, लेकिन अगर रीडिंग बार-बार इतनी आ रही है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बना रहे, तो यह दिल, दिमाग और किडनी की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, सही इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि बीपी अचानक क्यों बढ़ता है, घबराहट होने पर क्या करना चाहिए और इसे नियंत्रित रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

क्या है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या?

ब्लड प्रेशर वह दबाव है, जो खून के शरीर की धमनियों की दीवारों पर पड़ता है। जब दिल खून को पंप करता है, तो धमनियों में दबाव बनता है। इसे दो संख्याओं में मापा जाता है। पहली संख्या सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर होती है, जो दिल के धड़कने के दौरान दबाव बताती है, जबकि दूसरी संख्या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर होती है, जो दिल की धड़कनों के बीच का दबाव बताती है। आमतौर पर 120/80 mm Hg से कम ब्लड प्रेशर को सामान्य माना जाता है। वहीं, 130/80 mm Hg या उससे अधिक की लगातार रीडिंग हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकती है। अलग-अलग मेडिकल गाइडलाइंस में इसकी श्रेणियां कुछ अलग हो सकती हैं। इसलिए केवल एक बार की रीडिंग के आधार पर हाई बीपी की पुष्टि नहीं की जाती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2024 में दुनियाभर में 30 से 79 वर्ष की उम्र के लगभग 1.4 अरब वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित थे। यह इस आयु वर्ग की करीब 33 प्रतिशत आबादी है। चिंताजनक बात यह है कि बहुत से लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका बीपी बढ़ा हुआ है।

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अचानक BP 150 पार पहुंचने के क्या कारण हो सकते हैं?

अगर आपका ब्लड प्रेशर अचानक 150 या उससे ज्यादा हो जाता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, सही वजह जानने के लिए बीपी की दोबारा जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
तनाव और घबराहट: जब व्यक्ति तनाव में होता है या किसी बात से डर जाता है, तो शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं, जिनसे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकते हैं। कभी-कभी बीपी की रीडिंग देखकर घबराहट बढ़ जाती है, जिससे बेचैनी और बढ़ सकती है।
ज्यादा नमक का सेवन: खाने में जरूरत से ज्यादा नमक लेने से शरीर में पानी जमा होने और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है। अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में भी नमक अधिक हो सकता है।
चाय-कॉफी या कैफीन का अधिक सेवन: कुछ लोगों में ज्यादा कैफीन लेने से थोड़े समय के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।
नींद की कमी: लगातार कम सोना या नींद की गुणवत्ता खराब होना ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में परेशानी पैदा कर सकता है।
शारीरिक गतिविधि या दर्द: सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने, व्यायाम करने, दर्द होने या हाल ही में कोई मेहनत वाला काम करने के बाद बीपी कुछ समय के लिए बढ़ सकता है।
दवाओं का असर या अनियमित सेवन: कुछ दवाएं ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं। वहीं, डॉक्टर की बताई बीपी की दवाएं समय पर न लेना या अपनी मर्जी से बंद कर देना भी परेशानी पैदा कर सकता है। ध्यान रखें कि बार-बार बीपी बढ़ने के पीछे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। इसलिए इसे केवल तनाव या घबराहट मानकर नजरअंदाज न करें।

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हाई BP के लक्षण क्या होते हैं?

हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ज्यादातर लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार व्यक्ति सामान्य महसूस करता रहता है, लेकिन उसका बीपी लगातार बढ़ा हुआ होता है। कुछ लोगों को बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर होने पर सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखाई देना या सीने में परेशानी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं और केवल इनके आधार पर हाई बीपी का पता नहीं लगाया जा सकता। हाई बीपी की समस्या का पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका सही तरीके से ब्लड प्रेशर की जांच करना है।

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BP 150 पार पहुंच जाए और घबराहट होने लगे, तो क्या करें?

अगर आपका बीपी 150 या उससे ज्यादा आता है और आपको बेचैनी महसूस होती है, तो सबसे पहले शांत रहने की कोशिश करें। घबराहट में बार-बार बीपी चेक करने से चिंता बढ़ सकती है और रीडिंग पर भी असर पड़ सकता है।
आराम से बैठ जाएं: किसी शांत जगह पर बैठकर 5 मिनट आराम करें। पीठ को सहारा दें, दोनों पैर जमीन पर रखें और पैरों को क्रॉस न करें।
सही तरीके से दोबारा बीपी चेक करें: हाथ को टेबल पर इस तरह रखें कि बीपी मशीन का कफ दिल के स्तर पर रहे। मापते समय बात न करें। कुछ मिनट के अंतराल पर दोबारा रीडिंग लें और दोनों रीडिंग नोट कर लें।
धीरे-धीरे सांस लें: अगर घबराहट हो रही है, तो आराम से और धीरे सांस लेने की कोशिश करें। सांस को जबरदस्ती रोकने या बहुत तेजी से गहरी सांसें लेने से बचें। ध्यान रखें कि सांस लेने की एक्सरसाइज हाई बीपी की दवा का विकल्प नहीं है।
तुरंत मेहनत वाला काम न करें: बीपी बढ़ा हुआ होने पर दौड़ने, तेज व्यायाम करने या भारी काम करने से बचें। पहले आराम करें और स्थिति को समझें।
अपनी मर्जी से दवा न लें: बीपी कम करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की दवा न लें और न ही डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी नियमित दवा की अतिरिक्त खुराक लें। अगर बीपी की रीडिंग बार-बार 150 या उससे अधिक आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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कब तुरंत मेडिकल मदद लें?

अगर ब्लड प्रेशर 180/120 mm Hg या उससे अधिक आता है, तो कम से कम एक मिनट रुककर दोबारा जांच करें। यदि रीडिंग इतनी ही बनी रहती है और सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, नजर में बदलाव या तेज असामान्य सिरदर्द जैसे लक्षण हैं, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। ऐसे लक्षणों में दोबारा जांच करने के लिए इलाज में देरी न करें। यदि बीपी 180/120 या उससे अधिक बना हुआ है, लेकिन कोई लक्षण नहीं है, तब भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जरूरी चिकित्सकीय सलाह लें।

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हाई BP को कंट्रोल करने के लिए क्या खाएं?

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में खानपान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संतुलित आहार अपनाने से बीपी के साथ-साथ दिल की सेहत को भी फायदा मिल सकता है।
फल और सब्जियां: अपनी डाइट में मौसमी फल और हरी सब्जियां शामिल करें। इनमें मौजूद फाइबर और दूसरे पोषक तत्व संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
साबुत अनाज: ओट्स, दलिया, साबुत गेहूं और अन्य साबुत अनाज को नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं।
दालें और प्रोटीन: दाल, बीन्स और जरूरत के अनुसार अन्य प्रोटीन स्रोतों का सेवन करें।
नमक कम करें: खाने में अतिरिक्त नमक डालने से बचें। WHO वयस्कों के लिए प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें भोजन में पहले से मौजूद नमक भी शामिल है।
पैकेट वाले खाद्य पदार्थ सीमित करें: चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और बहुत ज्यादा नमक वाले प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
अगर आपको किडनी की बीमारी है या डॉक्टर ने पोटैशियम सीमित करने की सलाह दी है, तो पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ या नमक के विकल्प अपनी मर्जी से न बढ़ाएं।

रोजाना एक्सरसाइज और अच्छी नींद क्यों जरूरी है?

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है। स्वस्थ वयस्क सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चाल से चलना, करने का लक्ष्य रख सकते हैं। अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार गतिविधि चुनें। अगर बीपी बहुत ज्यादा है या कोई गंभीर लक्षण है, तो व्यायाम करने के बजाय पहले चिकित्सकीय सलाह लें। इसके अलावा, पर्याप्त नींद लेना, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना और तनाव से निपटने के तरीके अपनाना भी जरूरी है। धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन न करना बेहतर है। यदि आप पहले से बीपी की दवाएं ले रहे हैं, तो इन बदलावों के साथ डॉक्टर की बताई दवाएं भी नियमित रूप से लेते रहें।

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क्या 150 BP होने पर दवा लेना जरूरी है?

इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं है। अगर किसी व्यक्ति का बीपी बार-बार 150 के आसपास या इससे अधिक आता है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। डॉक्टर आपकी उम्र, बार-बार आने वाली रीडिंग, डायबिटीज, किडनी की स्थिति, दिल से जुड़ी बीमारियों और अन्य जोखिमों को ध्यान में रखकर इलाज तय करेंगे। कुछ लोगों में खानपान और जीवनशैली में बदलाव के साथ दवाओं की भी जरूरत पड़ सकती है। वहीं, पहले से दवा लेने वाले लोगों को खुराक बदलने या दवा बंद करने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।


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Content Editor

Monika

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