आपकी बॉडी में Blood Clot होने के संकेत, ऐसे लोगों का क्या खाना जरूरी

punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 07:15 PM (IST)

नारी डेस्कः ब्लड क्लोटिंग (Blood Clotting) शरीर की एक प्राकृतिक और जरूरी प्रक्रिया है, जो चोट लगने या कटने पर खून को बहने से रोकने का काम करती है। जब शरीर को कहीं चोट लगती है, तो खून में मौजूद प्लेटलेट्स और प्रोटीन मिलकर उस जगह पर थक्का (क्लॉट) बना देते हैं, जिससे रक्तस्राव रुक जाता है और घाव भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह एक सामान्य और जीवनरक्षक क्रिया है लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब खून बिना किसी बाहरी चोट के ही नसों या धमनियों के अंदर जमने लगे। इस स्थिति को थ्रॉम्बोसिस (Thrombosis) कहा जाता है। नसों में बना यह थक्का रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है, जिससे शरीर के जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में नहीं पहुंच पाते। यदि यह थक्का दिल की नसों में बने तो हार्ट अटैक, दिमाग की नसों में बने तो स्ट्रोक और फेफड़ों में पहुंच जाए तो पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए ब्लड क्लोटिंग जहां एक ओर शरीर की सुरक्षा के लिए जरूरी है, वहीं अनियंत्रित या असामान्य क्लॉटिंग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी बन सकती है। समय पर लक्षण पहचानना और उचित इलाज लेना बेहद जरूरी है।
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किन लोगों को ब्लड क्लोटिंग का ज्यादा खतरा होता है? 

कुछ लोगों में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना सामान्य से अधिक होती है। इसके पीछे जीवनशैली, स्वास्थ्य स्थितियां और आनुवंशिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

1. लंबे समय तक बैठने या बिस्तर पर रहने वाले लोग
जो लोग घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, जैसे लंबी फ्लाइट या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, या सर्जरी के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, उनमें पैरों की नसों में खून का प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) का खतरा बढ़ता है।

2. मोटापा या फिजिकल एक्टिविटी की कमी
अधिक वजन होने से नसों पर दबाव बढ़ता है और खून का संचार प्रभावित होता है। साथ ही, व्यायाम न करने से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे क्लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है।

3. धूम्रपान करने वाले लोग
सिगरेट में मौजूद रसायन रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) को नुकसान पहुंचाते हैं और खून को गाढ़ा बना सकते हैं। इससे थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।

4. गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं और खून स्वाभाविक रूप से थोड़ा गाढ़ा हो जाता है ताकि डिलीवरी के समय अधिक रक्तस्राव न हो। लेकिन इसी कारण क्लॉटिंग का जोखिम भी बढ़ सकता है।

5. हार्मोनल दवाएं लेने वाली महिलाएं
जैसे गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT)। इन दवाओं में मौजूद एस्ट्रोजन खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ा सकता है, खासकर यदि महिला धूम्रपान करती हो या मोटापे से ग्रस्त हो।

6. कैंसर या हार्ट रोग के मरीज
कैंसर शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर्स को प्रभावित कर सकता है, जिससे खून जल्दी जमने लगता है। इसी तरह, दिल की बीमारियों में रक्त प्रवाह असामान्य हो सकता है, जिससे थक्का बनने का खतरा रहता है।

7. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज
इन बीमारियों से रक्त वाहिकाएं कमजोर या संकरी हो सकती हैं, जिससे खून का प्रवाह प्रभावित होता है और क्लॉट बनने का जोखिम बढ़ता है।

8. जिनके परिवार में पहले से क्लॉटिंग की समस्या रही हो
कुछ लोगों में आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों से खून जल्दी जमने की प्रवृत्ति होती है। यदि परिवार में किसी को पहले DVT, स्ट्रोक या अन्य क्लॉटिंग समस्या रही है, तो सावधानी और नियमित जांच जरूरी है।

इन सभी स्थितियों में नियमित जांच, सक्रिय जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है ताकि ब्लड क्लोटिंग के खतरे को कम किया जा सके।
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ब्लड क्लोटिंग के लक्षण क्या हैं? 

ब्लड क्लॉट शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बन सकता है, और उसके अनुसार लक्षण भी अलग दिखाई देते हैं। कई बार शुरुआती संकेत हल्के होते हैं, लेकिन समय पर पहचान न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

1. पैरों में क्लॉट 

यह आमतौर पर पैरों की गहरी नसों में बनता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं:
एक पैर में सूजन - खासकर पिंडली या जांघ में अचानक सूजन आना।
दर्द या भारीपन- चलने या खड़े होने पर दर्द बढ़ सकता है।
त्वचा का लाल या नीला पड़ना- प्रभावित हिस्से की त्वचा का रंग बदल सकता है।
गर्म महसूस होना -उस जगह को छूने पर सामान्य से ज्यादा गर्मी लग सकती है।
अगर DVT का इलाज न हो, तो यह क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जो खतरनाक स्थिति है।

2. फेफड़ों में क्लॉट (Pulmonary Embolism – PE)

जब पैरों से क्लॉट टूटकर फेफड़ों की नसों में पहुंच जाता है, तो इसे पल्मोनरी एम्बोलिज़्म कहते हैं। इसके लक्षण अचानक और गंभीर हो सकते हैं:

अचानक सांस फूलना- बिना किसी स्पष्ट कारण के सांस लेने में कठिनाई।
सीने में तेज दर्द- गहरी सांस लेने पर दर्द बढ़ सकता है।
तेज या अनियमित धड़कन।
खांसी के साथ खून आना (कुछ मामलों में)
बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी। यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

3. दिमाग में क्लॉट

यदि खून का थक्का दिमाग की नसों में बन जाए या वहां पहुंच जाए तो स्ट्रोक हो सकता है। इसके लक्षण अचानक शुरू होते हैं:
बोलने में दिक्कत या शब्द साफ न निकलना।
चेहरे, हाथ या पैर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन।
अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना।
तेज सिरदर्द रहना। 
दृष्टि धुंधली होना या एक आंख से कम दिखना।
स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है इसलिए तुरंत इमरजेंसी सहायता लेनी चाहिए।

महत्वपूर्ण: यदि ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का अचानक अनुभव हो, तो देर न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल जाएं। समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है और गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।

ब्लड क्लोटिंग की समस्या है तो क्या खाना चाहिए?

हरी पत्तेदार सब्जियां (डॉक्टर की सलाह से, खासकर यदि ब्लड थिनर ले रहे हों)
लहसुन, अदरक (खून को पतला रखने में सहायक)
ओमेगा-3 युक्त भोजन (अलसी, अखरोट, मछली)
फल जैसे संतरा, अनार
पर्याप्त पानी

ब्लड क्लोटिंग की समस्या है तो क्या नहीं खाना चाहिए?

ज्यादा तला-भुना और जंक फूड
अत्यधिक नमक
ज्यादा चीनी
धूम्रपान और शराब
विटामिन K बहुत अधिक मात्रा में (यदि आप Warfarin जैसी दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से पूछें)

इलाज क्या है?

ब्लड थिनर दवाएं (जैसे Warfarin, Heparin, DOACs)
गंभीर स्थिति में सर्जरी या थ्रोम्बोलाइसिस
कंप्रेशन स्टॉकिंग्स
नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण

बचाव कैसे करें?

लंबे समय तक एक जगह न बैठें
रोज 30 मिनट टहलें
वजन नियंत्रित रखें
पानी पर्याप्त पिएं
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं

याद रखेंः ब्लड क्लोटिंग एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली समस्या है। समय पर पहचान, सही खानपान और डॉक्टर की सलाह से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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Content Writer

Vandana

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