बैंक के लॉकर में पड़ा सोना चोरी हो जाए तो कौन भरेगा पैसा? हर किसी को पता होना चाहिए ये नियम

punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 12:08 PM (IST)

नारी डेस्क: ज्यादातर लोग अपने सोने-चांदी, गहने और कीमती दस्तावेज़ बैंक लॉकर में यह सोचकर रखते हैं कि वहां सब कुछ पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन सवाल यह है कि अगर लॉकर से सामान चोरी हो जाए या नुकसान हो जाए, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?इस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने साफ नियम तय किए हैं। आज हम आपको  बैंक सेफ्टी लॉकर, उनके नियम, सोने जैसी महंगी चीजों के लिए अलग से इंश्योरेंस लेने की ज़रूरत और सोने को सुरक्षित रखने के दूसरे तरीकों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं 

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नुकसान होने पर मिलेगा सिर्फ 2 लाख 

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने साफ़ तौर पर बताया है कि आग, चोरी और कर्मचारियों द्वारा किए गए फ्रॉड जैसी अचानक होने वाली घटनाओं की वजह से लॉकर में रखे कीमती सामान के लिए बैंकों की ज़िम्मेदारी क्या है। यह ज़िम्मेदारी सेफ़्टी डिपॉजिट लॉकर के सालाना किराए के 100 गुना तक सीमित है। इसलिए, अगर आपके लॉकर का सालाना किराया ₹2,000 है, तो बैंक की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ ₹2 लाख होगी, जो काफ़ी नहीं है क्योंकि यह मौजूदा बाज़ार कीमतों पर दो सॉवरेन (16 ग्राम) सोने की ज्वेलरी को भी कवर नहीं कर पाएगा।


ज्वेलरी का नहीं होता इंश्योरेंस 

RBI ने कहा- "क्योंकि बैंक यह दावा नहीं कर सकते कि लॉकर में रखे सामान के नुकसान के लिए उनकी अपने कस्टमर के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं है, ऐसे मामलों में जहां लॉकर में रखे सामान का नुकसान ऊपर बताई गई घटनाओं (आग, चोरी/सेंधमारी/डकैती, डकैती, बिल्डिंग गिरना) या उसके कर्मचारी(कर्मचारियों) द्वारा किए गए फ्रॉड की वजह से होता है, तो बैंक की ज़िम्मेदारी सेफ डिपॉजिट लॉकर के मौजूदा सालाना किराए के सौ गुना के बराबर होगी।" इसके अलावा, बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए बैंकों की ज़ीरो जिम्मेदारी होती है, इसलिए ज़्यादा किराया देना असल में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है।" बैंक अपने लॉकर में जमा सोने की ज्वेलरी का इंश्योरेंस नहीं देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास लॉकर में रखे सामान का रिकॉर्ड नहीं होता है, जो सिर्फ़ कस्टमर को ही पता होता है।

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लॉकर लेने से पहले के नियम

RBI ने कहा- "बैंकों को अपने लॉकर एग्रीमेंट में यह साफ़ करना चाहिए कि चूंकि वे लॉकर के सामान या कस्टमर द्वारा उसमें से निकाले गए या रखे गए किसी भी सामान का रिकॉर्ड नहीं रखते हैं, इसलिए वे लॉकर के सामान को किसी भी रिस्क के खिलाफ़ इंश्योरेंस कराने के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।"  RBI के नए नियमों के अनुसार  लॉकर लेते समय नॉमिनेशन अनिवार्य है।  ग्राहक और बैंक के बीच स्टैंडर्ड लॉकर एग्रीमेंट होना जरूरी है।  लॉकर टूटने या शिफ्ट होने पर ग्राहक को पहले सूचना देना जरूरी है। बैंक लॉकर पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं  है। RBI के नियम साफ कहते हैं कि बैंक की जिम्मेदारी सीमित है, इसलिए केवल लॉकर के भरोसे अपने कीमती सोने की सुरक्षा छोड़ देना समझदारी नहीं। बेहतर है कि नियम जानकर, सही प्लानिंग और सावधानी के साथ लॉकर । 



सोना सुरक्षित रखने के दूसरे भरोसेमंद तरीके

 डिजिटल गोल्ड: मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में फिजिकल स्टोरेज का झंझट नहीं, लेकिन लंबी अवधि के लिए सावधानी जरूरी। 

 सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): सरकार द्वारा जारी इस बॉन्ड में ब्याज भी मिलता है। चोरी का कोई खतरा नहीं है। 

बैंक FD + गोल्ड ETF: इसमें निवेश और सुरक्षा दोनों है। इसमें लॉकर की जरूरत नहीं

 घर में सेफ लॉकर (कम मात्रा के लिए): फायरप्रूफ और डिजिटल लॉक वाला सेफ बड़ी मात्रा के लिए सुरक्षित नहीं


ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां

- लॉकर में रखे गहनों की फोटो/बिल संभालकर रखें
-बीमा (Insurance) कराना बेहतर विकल्प हो सकता है
- समय-समय पर लॉकर विज़िट का रिकॉर्ड रखें
- बैंक से एग्रीमेंट की कॉपी जरूर लें


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Content Writer

vasudha

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