बच्चों में दिखें ये लक्षण तो न समझें बीमारी, सही इलाज और थेरेपी से हो सकता है सुधार
punjabkesari.in Wednesday, Apr 01, 2026 - 07:18 PM (IST)
नारी डेस्क : अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के व्यवहार में बदलाव बचपन से ही नजर आने लगते हैं, जबकि कुछ बच्चों में ये बदलाव बड़े होने के साथ दिखाई देते हैं। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बाकी बच्चों की तरह ही हो, लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता कुछ बच्चे वाकई “स्पेशल” होते हैं, जो अपनी अलग दुनिया और अंदाज के साथ जीवन जीते हैं। बता दें की आज के समय में बच्चों के मानसिक और व्यवहारिक विकास से जुड़ी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बच्चा आंखों में आंखें नहीं मिलाता, कम बोलता है या दूसरों से जुड़ने में कठिनाई महसूस करता है, तो यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे में इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे को सही दिशा, प्यार और जरूरी सहायता मिल सके।
क्या हैं ऑटिज्म डिसऑर्डर (Autism spectrum disorder) (ASD)
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक न्यूरो-डेवलपमेंटल कंडीशन है, जो बच्चे के दिमाग के विकास को प्रभावित करती है। इसका असर उनके व्यवहार, बातचीत और सामाजिक संबंधों पर पड़ता है। अक्सर लोग इसे “बीमारी” समझ लेते हैं और मान लेते हैं कि बच्चा कभी सामान्य नहीं हो पाएगा, लेकिन यह सोच पूरी तरह गलत है। ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्पेक्ट्रम है। जिसमें हर बच्चा अलग होता है और अपनी खास पहचान रखता है। ऐसे बच्चे “स्पेशल” होते हैं, जिन्हें सही समझ, प्यार और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, सही थेरेपी और परिवार के सपोर्ट से ऐसे बच्चों में काफी सुधार लाया जा सकता है और वे एक बेहतर, आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

छोटे बच्चों में दिखने वाले शुरुआती संकेत
रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के मुताबिक, शिशुओं और टॉडलर्स में ऑटिज्म के शुरुआती संकेत इस प्रकार हो सकते हैं
नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
आंखों में आंखें डालकर बात न करना
कम मुस्कुराना या प्रतिक्रिया न देना
आवाज या स्पर्श के प्रति अधिक संवेदनशील होना
बार-बार एक ही हरकत दोहराना
उम्र के अनुसार कम बोलना या बिल्कुल न बोलना
खेल-कूद या काल्पनिक खेल में रुचि की कमी।
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बड़े बच्चों में दिखने वाले लक्षण
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, लक्षण और स्पष्ट हो सकते हैं
दूसरों की भावनाओं को समझने में कठिनाई
बातचीत में एक ही बात दोहराना
एक तय रूटीन पर निर्भर रहना
किसी एक विषय में अत्यधिक रुचि
दोस्त बनाने में परेशानी
मजाक या मुहावरों को समझने में दिक्कत।

ऑटिज्म (Autism) के संभावित कारण
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के पीछे कई कारण हो सकते हैं
दिमाग के विकास में बदलाव
जेनेटिक (आनुवंशिक) फैक्टर
पर्यावरणीय कारण
गर्भावस्था या जन्म के समय की जटिलताएं।
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इलाज और मैनेजमेंट
हालांकि ऑटिज्म का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर हस्तक्षेप से बच्चे के विकास में काफी सुधार किया जा सकता है।
स्पीच थेरेपी (Speech Therapy)
बिहेवियर थेरेपी (Behavior therapy)
ऑक्यूपेशनल थेरेपी (Occupational therapy)
विशेष शिक्षा और पैरेंटल सपोर्ट (Special Education and Parental Support)|
विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी जल्दी पहचान होगी, उतना बेहतर परिणाम मिल सकता है।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर को समझना और समय रहते इसके संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। सही देखभाल और सपोर्ट से ऑटिस्टिक बच्चे भी एक बेहतर और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

