भारत में तेजी से बढ़ रहे Perkinson के लक्षण, Symptoms पकड़ने बहुत जरूरी
punjabkesari.in Monday, Apr 13, 2026 - 03:51 PM (IST)
नारी डेस्क : आपने अपने आस-पास ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा हो रूक रूक कर बोलते हैं या उनके हाथ-पैर लगातार कांपते हैं। उन्हें लिखने में दिक्कत होती है। हर काम बड़ी धीमी गति से करते हैं, मांसपेशियों में अक्ड़न महसूस करते हैं तो ये सारे लक्षण पार्किंसंस डिसीस के हो सकते हैं लेकिन इस समस्या के होने के कारण क्या है, भारत में इसकी रेशो क्या है और बीमारी का सही इलाज क्या ।
पार्किंसंस रोग क्या है?
पार्किंसंस एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में Dopamine नहीं बना पातीं। डोपामाइन एक ऐसा केमिकल है, जो शरीर की गतिविधियों और संतुलन को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से शरीर की गति धीमी हो जाती है और कंपन जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
भारत में इसका रेशो और कौन ज्यादा प्रभावित?
आमतौर पर यह बीमारी 60–65 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है
हर 10 में से 1 मरीज 45 साल से कम उम्र का भी हो सकता है
भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है
पार्किंसंस के मुख्य लक्षण
पार्किंसंस के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ते जाते हैं:
हाथ, पैर या उंगलियों में कंपन (Tremors)
चलने-फिरने में धीमापन (Bradykinesia)
मांसपेशियों में अकड़न
संतुलन बिगड़ना और गिरने का डर
लिखने में दिक्कत (छोटी और तंग लिखावट)
बोलने में बदलाव (धीमी या अस्पष्ट आवाज)
चेहरे के भाव कम होना
अन्य लक्षण (Non-Motor Symptoms)
सूंघने की क्षमता कम होना
नींद की समस्या और कब्ज होना
डिप्रेशन और चिंता
अत्यधिक थकान आना।
पार्किंसंस में डाइट का क्या है रोल
पार्किंसंस में डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है:
क्या खाएं: साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी पीए।
क्या कम करें: ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक तला-भुना और ज्यादा शुगर ना खाएं।
विटामिन D कितना जरूरी है?
पार्किंसंस मरीजों में विटामिन D की कमी आम होती है।
डॉक्टर की सलाह से रोजाना 600–800 IU (या जरूरत अनुसार) लिया जा सकता है
धूप में 15–20 मिनट बैठना भी फायदेमंद होता है।
पार्किंसंस क्या है इलाज
पार्किंसंस का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है:
दवाएं: Levodopa, Carbidopa ये दवाएं दिमाग में डोपामाइन का स्तर बढ़ाने में मदद करती हैं।
सर्जरी: Deep Brain Stimulation (DBS) जब दवाएं असर कम करने लगती हैं, तब यह विकल्प अपनाया जाता है।
लाइफस्टाइल
नियमित व्यायाम
योग और मेडिटेशन
एक्टिव लाइफस्टाइल
कब डॉक्टर के पास जाएं?
अगर ये लक्षण लगातार दिखें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें:
बार-बार हाथ कांपना
चलने में असामान्य धीमापन
संतुलन बिगड़ना
बोलने या लिखने में बदलाव।
मरीज को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
रोजमर्रा के काम जैसे चलना, नहाना, कपड़े पहनना मुश्किल हो जाता है
हाथ कांपने से खाना या लिखना कठिन हो जाता है
बोलने में परेशानी से आत्मविश्वास कम हो सकता है
मानसिक तनाव और अवसाद बढ़ सकता है।
पार्किंसंस रोग एक गंभीर लेकिन मैनेज करने योग्य बीमारी है। समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज न करें। यही आपकी सेहत को बचाने का सबसे बड़ा तरीका है।

