एक दिन में गर्मी ले लेगी 3,400 लोगों की जान... तपते मौसम को लेकर आई बेहद डरावनी रिपोर्ट
punjabkesari.in Friday, May 29, 2026 - 07:21 PM (IST)
नारी डेस्क: भारत में एक दिन में भीषण गर्मी से लगभग 3,400 अतिरिक्त मौत होती हैं, जबकि पांच दिन यह स्थिति कायम रहने से लगभग 30,000 मौत होती हैं। एक अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (बर्कले) के 'इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर' के शोधकर्ताओं-- पीयूष नारंग और अशोक गाडगिल ने कहा कि वैश्विक अध्ययन गर्मी से संबंधित मृत्यु दर में वृद्धि को उजागर करते हैं, लेकिन भारत के जिलों में भीषण गर्मी से मृत्यु दर कैसे प्रभावित होती है, इस बारे में विस्तृत आंकड़े आम शोधकर्ताओं के लिए सुलभ नहीं है।
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पांच दिन में हुई 30,000 मौतें
टीम ने भारत के 10 शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों पर किए गए एक बहु-शहरी अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग करके देश के सभी जिलों में अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया। अतिरिक्त मौतें' एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मापदंड है, जो किसी तय समय में हुई कुल मौतों और पुराने आंकड़ों के आधार पर अनुमानित मौतों के बीच का अंतर बताता है। 'फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल हेल्थ' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में नागरिक पंजीकरण प्रणाली के जिला-स्तरीय मृत्यु दर के आंकड़ों और 2024 की जनसंख्या अनुमान को जोड़कर, एक दिन और पांच दिनों के दौरान भीषण गर्मी से जिलों में होने वाली अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया। अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ''हमारा अनुमान है कि एक दिन की भीषण गर्मी से राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतें होती हैं; जबकि पांच दिनों में ऐसी स्थिति रहने पर लगभग 30,000 मौतें होती हैं।''
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सभी शहरों की रिपोर्ट
उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है तथा पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है। गर्मी से होने वाली मौतों की दर के जोखिम का अलग-अलग जिलों में विश्लेषण करने पर पता चला कि अकेले उत्तर प्रदेश राज्य में पांच दिनों में भीषण से लगभग 8,100 अतिरिक्त मौतें हुईं, जबकि अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे जिलों में प्रत्येक में एक ही बार में 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें हुईं। अध्ययन में पाया गया कि सबसे अधिक मौत वाले पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात में मृत्यु भार और आर्थिक क्षमता के बीच 2.3 गुना असंतुलन देखा गया। ये राज्य मिलकर देश की 66 प्रतिशत अतिरिक्त मौतों के लिए जिम्मेदार हैं जबकि भारत की जीडीपी में उनका योगदान केवल 29 प्रतिशत है।

