समय पर पकड़ ले ये संकेत, खराब होने से बच जाएगी Kidney!

punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 09:31 PM (IST)

नारी डेस्कः किडनी हमारे शरीर के जरूरी अंगों में से एक है। एक बार किडनी अपना काम करना बंद कर दें तो पूरी बॉडी रूक जाती है। बिगड़ते लाइफस्टाइल के चलते किडनी की समस्या भी कम उम्र के लोगों में सुनने को मिलने लगी है। किडनी में जब खराबी शुरू होती है तो ज्यादातर लक्षण इग्नोर कर दिए जाते हैं जबकि इन लक्षणों को अगर शुरूआत में ही पकड़ लिया जाए तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है। चलिए इन लक्षणों के बारे में ही बात करते हैं।
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किडनी खराब होने के प्रमुख लक्षण

पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन (Edema)

जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में अतिरिक्त पानी और नमक जमा होने लगता है। इसका असर सबसे पहले पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन के रूप में दिखाई देता है। सुबह उठने पर आंखों के आसपास सूजन विशेष रूप से दिखाई दे सकती है। जूते या चप्पल तंग लगने लगते हैं और शरीर का वजन अचानक बढ़ सकता है।

पेशाब में बदलाव

किडनी की बीमारी का सबसे महत्वपूर्ण संकेत पेशाब में बदलाव होता है।
बार-बार पेशाब आना, विशेषकर रात में।
सामान्य से कम पेशाब होना।
पेशाब का रंग गहरा या धुंधला होना।
पेशाब में झाग या फोम बनना जो प्रोटीन लीक होने का संकेत हो सकता है।
पेशाब में खून आना।
पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होना।

अत्यधिक थकान और कमजोरी

किडनी खराब होने पर शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण भी कम हो सकता है। इससे एनीमिया विकसित हो जाता है। व्यक्ति को हर समय थकान महसूस होती है, छोटी-छोटी गतिविधियों में भी ऊर्जा खत्म हो जाती है और शरीर कमजोर लगने लगता है।

सांस फूलना

खराब किडनी के कारण फेफड़ों में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है। इसके अलावा एनीमिया के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। परिणामस्वरूप थोड़ी दूरी चलने, सीढ़ियां चढ़ने या कभी-कभी आराम करते समय भी सांस फूल सकती है।

भूख कम लगना

शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के बढ़ने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है। मरीज को खाने की इच्छा कम होने लगती है, भोजन का स्वाद बदल सकता है और थोड़ी मात्रा खाने पर ही पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है।.

मतली और उल्टी

जब रक्त में विषैले पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है, तो व्यक्ति को बार-बार जी मिचलाना, उल्टी आना या पेट खराब रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह लक्षण अक्सर बीमारी बढ़ने पर अधिक स्पष्ट होते हैं।

त्वचा में खुजली और रूखापन

किडनी शरीर से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त खनिज बाहर निकालने में मदद करती है। जब यह काम प्रभावित होता है, तो त्वचा सूखी, बेजान और खुजलीदार हो सकती है। कई मरीजों को पूरे शरीर में लगातार खुजली की शिकायत रहती है।

मांसपेशियों में ऐंठन

किडनी की खराबी के कारण शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे विशेषकर रात के समय पैरों की मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन हो सकती है।

उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

किडनी और रक्तचाप का गहरा संबंध है। किडनी खराब होने पर रक्तचाप बढ़ सकता है और कई बार लगातार हाई ब्लड प्रेशर ही किडनी रोग का पहला संकेत होता है।

ध्यान लगाने में कठिनाई और मानसिक भ्रम

रक्त में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ने तथा एनीमिया के कारण मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे याददाश्त कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चक्कर आना और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आंखों के आसपास सूजन

सुबह उठते समय आंखों के नीचे या आसपास सूजन दिखाई देना किडनी से प्रोटीन के रिसाव का संकेत हो सकता है। यह प्रारंभिक लक्षणों में से एक माना जाता है।

मुंह का स्वाद बदलना और सांस से दुर्गंध

किडनी की बीमारी में रक्त में यूरिया बढ़ सकता है। इसके कारण मुंह में धातु जैसा स्वाद महसूस होना, खाना बेस्वाद लगना और सांस से अमोनिया जैसी दुर्गंध आ सकती है।

अचानक वजन बढ़ना या घटना

शरीर में पानी जमा होने से वजन तेजी से बढ़ सकता है। वहीं लंबे समय तक भूख कम रहने और कमजोरी के कारण वजन घट भी सकता है।

सीने में दर्द

यदि शरीर में अतिरिक्त तरल हृदय या उसके आसपास जमा होने लगे, तो सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तुरंत चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता होती है।

लगातार कमजोरी और शरीर टूटना

कई मरीज बताते हैं कि उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर में बिल्कुल ताकत नहीं बची हो। काम करने की क्षमता कम हो जाती है और दिनभर सुस्ती बनी रहती है।

ध्यान दें: किडनी की बीमारी अक्सर शुरुआती चरणों में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकती है। यदि आपको सूजन, पेशाब में बदलाव, लगातार थकान, हाई ब्लड प्रेशर या ऊपर बताए गए कई लक्षण एक साथ दिखाई दें, तो किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), सीरम क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट करवाना उचित रहता है।


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Content Writer

Vandana

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